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इलाज के नाम पर करोड़ों का खेल? CMHO ने गुड हॉस्पिटल की आयुष्मान बिलिंग पर उठाए बड़े सवाल

- सीएमएचओ की रिपोर्ट में 50 बेड की अनुमति के बावजूद 100 मरीज भर्ती, रिकॉर्ड गायब, लाइसेंस निलंबन के बाद भी इलाज जारी रहने सहित कई चौंकाने वाले खुलासे

  • खंडवा के आदिवासी और ग्रामीण मरीजों को बुरहानपुर लाकर सामान्य बीमारियों में किया भर्ती, आयुष्मान के नाम पर सरकारी खजाने से करोड़ों की निकासी का संदेह

बुरहानपुर। गरीब, आदिवासी और ग्रामीण परिवारों को मुफ्त इलाज देने के उद्देश्य से शुरू की गई आयुष्मान भारत योजना में बुरहानपुर के एक निजी अस्पताल पर बड़े आर्थिक फर्जीवाड़े की आशंका ने स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मचा दिया है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) बुरहानपुर डॉ. राजेंद्र कुमार वर्मा द्वारा आयुष्मान भारत (निरामय) के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, भोपाल को भेजे गए आधिकारिक पत्र में गुड हॉस्पिटल के संचालन और आयुष्मान योजना के तहत किए गए भुगतान पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।

आरोप है कि खंडवा जिले के आदिवासी और दूरदराज ग्रामीण क्षेत्रों से मरीजों को बुरहानपुर लाकर सामान्य बीमारियों में भी कई दिनों तक भर्ती रखा गया और उन्हें गंभीर मरीज बताकर आयुष्मान योजना के तहत करोड़ों रुपए के भुगतान का लाभ लिया गया। यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह प्रदेश की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजनाओं में से एक के दुरुपयोग का गंभीर मामला हो सकता है।

50 बेड की अनुमति, लेकिन भर्ती कर दिए करीब 100 मरीज

सीएमएचओ डॉ. वर्मा की रिपोर्ट के अनुसार गुड हॉस्पिटल को केवल 50 बेड संचालित करने की अनुमति थी, लेकिन निरीक्षण के दौरान अस्पताल में करीब 100 मरीज भर्ती पाए गए। यह सीधे-सीधे अस्पताल संचालन संबंधी नियमों का उल्लंघन माना गया है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि अस्पताल में बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन, संक्रमण नियंत्रण व्यवस्था और मरीजों से जुड़े दस्तावेजों में भी गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। इसके अलावा चिकित्सकों एवं पैरामेडिकल स्टाफ से संबंधित रिकॉर्ड में भी कथित रूप से हेरफेर के संकेत मिले।

नोटिस, लाइसेंस निलंबन… फिर भी नहीं रुका खेल

रिपोर्ट के मुताबिक अनियमितताएं मिलने के बाद अस्पताल प्रबंधन को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर अस्पताल का लाइसेंस निलंबित कर दिया गया। इसके बावजूद आरोप है कि अस्पताल ने मरीजों की भर्ती और आयुष्मान योजना के तहत उपचार जारी रखा। स्थिति गंभीर होने पर 9 जुलाई 2026 को अस्पताल को सील करने की कार्रवाई की गई।

सीलिंग के दौरान सामने आईं चौंकाने वाली बातें

सीएमएचओ के पत्र में दावा किया गया है कि अस्पताल सील करने के समय लगभग 100 मरीज भर्ती थे, लेकिन इनमें से करीब 40 मरीज मौके पर नहीं मिले। जिन बेड पर उनका नाम दर्ज था, वहां दूसरे मरीज मौजूद थे। इतना ही नहीं, अस्पताल का रिकॉर्ड गायब बताया गया। भर्ती मरीजों की सूची उपलब्ध नहीं कराई गई और आरोप है कि कंप्यूटर सिस्टम तक हटा दिया गया, जिससे दस्तावेजों की जांच प्रभावित हुई।

सामान्य बीमारी, लेकिन कई-कई दिन भर्ती

जांच के दौरान मरीजों से बातचीत में सामने आया कि कई लोगों को सर्दी, खांसी, सिरदर्द, हाथ-पैर दर्द जैसी सामान्य बीमारियों के बावजूद चार से पांच दिन या उससे अधिक समय तक अस्पताल में भर्ती रखा गया। स्वास्थ्य विभाग को आशंका है कि सामान्य मरीजों को गंभीर बीमारी का मरीज दर्शाकर आयुष्मान योजना के तहत अधिक भुगतान प्राप्त किया गया।

आदिवासी और ग्रामीण मरीज बने निशाना?

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि अस्पताल में भर्ती अधिकांश मरीज खंडवा जिले के ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों से लाए गए थे। स्वास्थ्य विभाग को संदेह है कि गरीब और जागरूकता से वंचित लोगों को योजना का लाभ दिलाने के नाम पर अस्पताल तक लाया गया और उनके नाम पर भारी-भरकम क्लेम लगाए गए।

पहले भी मिली थीं शिकायतें

सीएमएचओ ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि अस्पताल के खिलाफ पहले भी शिकायतें प्राप्त हुई थीं। शिकायतों में आरोप था कि सामान्य उपचार को गंभीर बीमारी बताकर आयुष्मान योजना के तहत भुगतान लिया गया। चूंकि आयुष्मान योजना से जुड़े भुगतान और क्लेम की विस्तृत जानकारी जिला स्तर पर उपलब्ध नहीं रहती, इसलिए पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की गई है।

भोपाल से मांगी गई विस्तृत जांच

सीएमएचओ ने पूरे प्रकरण की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और आवश्यक मार्गदर्शन देने का अनुरोध आयुष्मान भारत (निरामय) के मुख्य कार्यपालन अधिकारी से किया है। पत्र की प्रतिलिपि क्षेत्रीय संचालक स्वास्थ्य सेवाएं, इंदौर तथा कलेक्टर बुरहानपुर को भी भेजी गई है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला केवल नियमों के उल्लंघन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सरकारी धन के दुरुपयोग, फर्जी क्लेम और स्वास्थ्य व्यवस्था में संगठित अनियमितता के रूप में भी सामने आ सकता है।

रिपोर्ट में प्रमुख आरोप

  • 50 बेड की अनुमति के बावजूद करीब 100 मरीज भर्ती।
  • खंडवा के आदिवासी एवं ग्रामीण मरीजों को बुरहानपुर लाने का आरोप।
  • सामान्य बीमारी को गंभीर बताकर आयुष्मान क्लेम लेने की आशंका।
  • बायोमेडिकल वेस्ट और संक्रमण नियंत्रण नियमों का उल्लंघन।
  • लाइसेंस निलंबित होने के बाद भी मरीज भर्ती करने का आरोप।
  • अस्पताल सील होने के दौरान रिकॉर्ड और कंप्यूटर सिस्टम गायब मिलने का उल्लेख।
  • मरीजों की सूची उपलब्ध नहीं कराई गई।
  • पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग।

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