बुरहानपुर। खनिज विभाग की ट्रैक्टर जब्ती की कार्रवाई विवादों में आ गई है। प्रधानमंत्री आवास निर्माण के लिए वैध रॉयल्टी के साथ गिट्टी लेकर जा रहे ट्रैक्टर को दो बार रोकने और बाद में जब्त करने का मामला सामने आया है। ट्रैक्टर मालिक अनिल बारकू बावस्कर ने खनिज अधिकारी गोविंद पाल पर चालक से कथित रूप से राशि मांगने और भुगतान से इनकार करने पर वाहन जब्त करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कलेक्टर को शिकायत देकर पूरी कार्रवाई की निष्पक्ष जांच की मांग की है। इस सम्बन्ध में खनिज अधिकारी का पक्ष जानना चाहा, तो उन्होंने मोबाइल उठाना भी उचित नहीं समझा।
दरअसल मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस ट्रैक्टर को पहली बार रॉयल्टी की जांच के बाद जाने दिया गया, उसे कुछ देर बाद दोबारा रोककर किस आधार पर जब्त किया गया? शिकायतकर्ता का आरोप है कि पहली जांच के दौरान रॉयल्टी और गिट्टी की मात्रा को लेकर कोई आपत्ति नहीं जताई गई थी, लेकिन दूसरी बार जांच में दोनों पर सवाल उठा दिए गए। हालांकि, रॉयल्टी की वास्तविक वैधता, गिट्टी की मात्रा और ट्रैक्टर जब्ती के आधार की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
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प्रधानमंत्री आवास के लिए गिट्टी लेने भेजा था ट्रैक्टर
कलेक्टर को दी शिकायत में अनिल बावस्कर ने बताया कि उनके दिवंगत बड़े भाई सुनील बावस्कर की पत्नी शारदा बावस्कर को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास निर्माण के लिए राशि मिली है। मकान निर्माण के लिए गिट्टी की आवश्यकता होने पर उन्होंने अपने भतीजे को ट्रैक्टर क्रमांक MP-12-AB-4578 देकर वैध रॉयल्टी के साथ गिट्टी लाने भेजा था। 23 सितंबर को ट्रैक्टर गिट्टी लेकर लौट रहा था। इसी दौरान गुप्तेश्वर मंदिर के पास वाहन पंचर हो गया। इसके बाद दोपहर करीब 3.25 बजे खनिज अधिकारी गोविंद पाल ने ताप्ती ब्रिज के पास स्थित बजाज शोरूम के समीप ट्रैक्टर रोक लिया। शिकायतकर्ता के अनुसार अधिकारी ने रॉयल्टी की जांच की और करीब 20 मिनट तक वाहन रोके रखा। इसके बाद ट्रैक्टर को जाने दिया गया।
रेणुका माता मंदिर के पास दोबारा रोका, इस बार रॉयल्टी की वैधता पर आपत्ति
अनिल बावस्कर का आरोप है कि पहली जांच के बाद ट्रैक्टर कुछ ही दूर पहुंचा था कि रेणुका माता मंदिर के पास उसे दोबारा रोक लिया गया। इस बार खनिज अधिकारी ने चालक से कहा कि रॉयल्टी की वैधता समाप्त हो चुकी है। साथ ही ट्रैक्टर में निर्धारित मात्रा से अधिक गिट्टी होने की बात भी कही गई। शिकायतकर्ता का कहना है कि पहली जांच में अधिकारी ने गिट्टी की मात्रा अधिक होने की कोई बात नहीं कही थी। ऐसे में दूसरी बार वाहन रोककर नई आपत्तियां जताने से पूरी कार्रवाई पर सवाल खड़े हो रहे हैं। अब यह जांच का विषय है कि पहली और दूसरी जांच के बीच रॉयल्टी की समय-सीमा में क्या बदलाव हुआ था और गिट्टी की मात्रा किस आधार पर अधिक बताई गई।
चालक ने फोन कर बताया- अधिकारी लेनदेन की बात कर रहे हैं
शिकायत में अनिल बावस्कर ने आरोप लगाया कि दूसरी बार ट्रैक्टर रोके जाने पर चालक ने उन्हें फोन कर मौके पर बुलाया। चालक ने फोन पर बताया कि खनिज अधिकारी लेनदेन की बात कर रहे हैं। अनिल के अनुसार उन्होंने चालक से कहा कि जब गिट्टी की वैध रॉयल्टी उपलब्ध है तो किसी को राशि देने की आवश्यकता नहीं है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि राशि देने से इनकार करने के बाद खनिज अधिकारी ने ट्रैक्टर जब्त कर लिया और उसे होमगार्ड कार्यालय में खड़ा करवा दिया। हालांकि, कथित रूप से राशि मांगने के आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। शिकायत में राशि कितनी मांगी गई, इसका भी स्पष्ट उल्लेख नहीं है।
पहली जांच में जाने दिया तो दूसरी बार जब्ती का आधार क्या?
पूरे घटनाक्रम में ट्रैक्टर की दो बार जांच और दूसरी बार जब्ती की कार्रवाई प्रमुख सवाल बनकर सामने आई है। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि जांच में यह स्पष्ट किया जाए कि पहली बार रॉयल्टी की जांच के बाद वाहन को किस आधार पर जाने दिया गया था। दूसरी बार जांच के दौरान रॉयल्टी की वैधता समाप्त होने और गिट्टी की मात्रा अधिक होने का निष्कर्ष किन दस्तावेजों और माप के आधार पर निकाला गया? इसके साथ ही ट्रैक्टर के पंचर होने के कारण परिवहन में हुई देरी, रॉयल्टी जारी होने और उसकी वैधता समाप्त होने का समय तथा वाहन जब्ती से संबंधित दस्तावेजों की जांच भी आवश्यक है। इन तथ्यों की जांच से ही स्पष्ट हो सकेगा कि खनिज विभाग की कार्रवाई नियमानुसार थी या शिकायतकर्ता के आरोपों में तथ्य हैं।
कलेक्टर के साथ सीएम हेल्पलाइन पर भी शिकायत, निष्पक्ष जांच की मांग
अनिल बावस्कर ने मामले को लेकर कलेक्टर को लिखित शिकायत देने के साथ सीएम हेल्पलाइन पर भी शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने आरोप लगाया कि वैध रॉयल्टी उपलब्ध होने के बावजूद खनिज अधिकारी ने मनमाने तरीके से ट्रैक्टर जब्त किया। शिकायतकर्ता ने पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है। अब मामले में खनिज विभाग के आधिकारिक रिकॉर्ड, रॉयल्टी दस्तावेज और वाहन जब्ती की कार्रवाई की जांच से ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।



