बुरहानपुर। जिले में करीब 48 घंटे के भीतर जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की दो शाखाओं में सेंधमारी की कोशिश ने बैंक सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पहले झिरी के शुगर फैक्ट्री परिसर स्थित शाखा में बदमाश शटर का ताला तोड़कर तिजोरी तक पहुंच गए। इसके बाद चापोरा में भी बैंक का ताला तोड़कर चोर अंदर घुसे और लॉकर तक पहुंचने की कोशिश की। दोनों ही वारदातों में चोर कैश तक नहीं पहुंच सके।
दोनों वारदातों में एक अहम समानता सामने आई है—निशाना जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की शाखा, रात का समय, ताला तोड़कर प्रवेश और सीधे तिजोरी अथवा लॉकर तक पहुंचने की कोशिश। हालांकि दोनों घटनाओं के पीछे एक ही गिरोह है या अलग-अलग आरोपी, इसे लेकर पुलिस ने अभी कोई आधिकारिक निष्कर्ष नहीं दिया है। लगातार बैंक शाखाओं को निशाना बनाए जाने के बीच पुलिस ने जिलेभर में बैंक सुरक्षा चेकिंग अभियान चलाया। थानों की टीमें बैंकों में पहुंचीं और CCTV कैमरे, DVR बैकअप, इमरजेंसी अलार्म, सुरक्षा गार्ड से लेकर एंट्री-एग्जिट पॉइंट तक जांचे।
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पहली वारदात: शुगर फैक्ट्री परिसर में बैंक का शटर तोड़ा, तिजोरी क्षतिग्रस्त
पहली घटना 15 और 16 अगस्त की दरमियानी रात नवल नगर झिरी स्थित शुगर फैक्ट्री परिसर में हुई। यहां संचालित जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित की शाखा में अज्ञात बदमाशों ने सेंध लगाई। बदमाश बैंक के मुख्य शटर का ताला तोड़कर अंदर घुसे। भीतर सामान अस्त-व्यस्त किया और तिजोरी खोलने का प्रयास किया। तिजोरी को क्षतिग्रस्त भी किया गया, लेकिन बदमाश उसे खोल नहीं सके। इसी कारण बैंक में रखी राशि सुरक्षित बच गई। घटना ने सुरक्षा को लेकर यह सवाल जरूर खड़ा किया कि शुगर फैक्ट्री जैसे परिसर में बदमाश बैंक का ताला तोड़कर तिजोरी तक पहुंच गए और वारदात का पता बाद में चला।
रात 3.30 बजे फोन आया- बैंक के ताले टूटे हैं
बैंक मैनेजर लखन बट्टी, निवासी जसवाड़ी जिला खंडवा ने निंबोला थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के मुताबिक 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस पर बैंक स्टाफ के साथ झंडावंदन किया गया था। इसके बाद अवकाश होने के कारण सुबह करीब 9 बजे बैंक में ताले लगाकर वे चले गए। 16 अगस्त की रात करीब 3.30 बजे नवलसिंह सहकारी शकर कारखाना के सिक्योरिटी इंचार्ज हरी चौधरी का फोन आया। उन्होंने बैंक के शटर के ताले टूटे होने और सामान बिखरा पड़ा होने की जानकारी दी। इसके बाद मैनेजर ने कैशियर कमलेश और पियून दिनेश को सूचना दी। बैंक के अंदर जाकर देखा तो मुख्य शटर का ताला टूटा हुआ था। सामान बिखरा था और तिजोरी के साथ छेड़छाड़ कर उसे क्षतिग्रस्त किया गया था। तिजोरी नहीं खुलने के कारण कोई राशि चोरी नहीं हुई।
ASP-SDOP भी पहुंचे, अज्ञात आरोपियों पर केस
सूचना मिलने के बाद निंबोला थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रदीप शेंडे और नेपानगर एसडीओपी सुरेश महाले ने भी बैंक पहुंचकर घटनास्थल का निरीक्षण किया। पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता-2023 की धारा 331(4) के तहत केस दर्ज किया है। आरोपियों की तलाश की जा रही है।
दूसरी वारदात: चापोरा में रात 2 बजे बैंक में सेंध
झिरी की वारदात के बाद मामला ठंडा भी नहीं पड़ा था कि शाहपुर थाना क्षेत्र के ग्राम चापोरा में जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की एक और शाखा चोरों के निशाने पर आ गई। सोमवार रात करीब 2 बजे अज्ञात चोर बैंक का ताला तोड़कर अंदर घुसे। उनका निशाना यहां भी बैंक का लॉकर था। चोर लॉकर नहीं तोड़ पाए और वारदात में नकदी हाथ नहीं लगी। शिकायत के आधार पर शाहपुर पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पैटर्न पर नजर: दोनों जगह सहकारी बैंक, दोनों जगह निशाना कैश तक पहुंचना
दोनों घटनाओं को एक साथ देखने पर कुछ समानताएं जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। दोनों जगह जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की शाखाएं निशाने पर रहीं। दोनों वारदात रात में हुईं। ताले तोड़कर बैंक के अंदर प्रवेश किया गया और इसके बाद तिजोरी अथवा लॉकर तक पहुंचने की कोशिश हुई। यही समानताएं यह सवाल खड़ा करती हैं कि कहीं कोई गिरोह जिले की बैंक शाखाओं को योजनाबद्ध तरीके से तो निशाना नहीं बना रहा? हालांकि फिलहाल ऐसा निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। पुलिस की ओर से दोनों वारदातों के बीच किसी तरह का कनेक्शन होने की पुष्टि नहीं की गई है। CCTV फुटेज, आरोपियों के आने-जाने के रास्ते और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
सबसे बड़ा सवाल- रात में बैंक सुरक्षा कितनी मजबूत?
दो घटनाओं के बाद अब सवाल सिर्फ आरोपियों की पहचान का नहीं, बल्कि बैंक शाखाओं की रात्रिकालीन सुरक्षा का भी है। क्या दोनों बैंकों में रात में सुरक्षा गार्ड मौजूद थे? CCTV कैमरों में आरोपी कैद हुए या नहीं? अलार्म सिस्टम सक्रिय था या नहीं? बदमाश कितनी देर बैंक के अंदर रहे? उन्होंने पहले से बैंक की रेकी की थी या नहीं? इन सवालों पर फिलहाल आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। जांच आगे बढ़ने पर इनके जवाब महत्वपूर्ण होंगे।
पुलिस अलर्ट: जिलेभर के बैंकों में पहुंचीं टीमें
बैंक सुरक्षा को लेकर 17 अगस्त को पुलिस ने जिलेभर में व्यापक जांच अभियान चलाया। पुलिस अधीक्षक आशुतोष बागरी के निर्देशन तथा एएसपी प्रदीप शेंडे और नगर पुलिस अधीक्षक विनोद सिंह कुशवाह के मार्गदर्शन में सभी थाना प्रभारियों को अपने-अपने क्षेत्र के शासकीय और अर्ध-शासकीय बैंकों की सुरक्षा व्यवस्था जांचने के निर्देश दिए गए। पुलिस टीमें बैंकों में पहुंचीं और सुरक्षा के निर्धारित मानकों की जांच की। जिम्मेदार बैंक अधिकारियों को कमियां मिलने पर व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश भी दिए गए।
कैमरा लगा होना काफी नहीं, रिकॉर्डिंग और DVR भी जांचा
अभियान में पुलिस ने बैंक परिसर के अंदर और बाहर लगे CCTV कैमरों की स्थिति, कार्यशीलता और रिकॉर्डिंग की गुणवत्ता देखी। कैमरे चालू हैं या नहीं, रिकॉर्डिंग क्षमता कितनी है, DVR बैकअप उपलब्ध है या नहीं और फुटेज सुरक्षित रखने की क्या व्यवस्था है, इसे भी परखा गया। बैंकों में सशस्त्र एवं प्रशिक्षित सुरक्षा गार्ड की उपलब्धता की जांच की गई। एंट्री और एग्जिट पॉइंट पर दरवाजों की सुरक्षा, फ्रेम मेल डिटेक्टर और बैरिकेडिंग भी जांची गई।
इमरजेंसी अलार्म भी बजाकर परखा, SOP की समीक्षा
पुलिस ने बैंक परिसर में लगे Emergency Alarm System की कार्यशीलता और सक्रियता का परीक्षण किया। चोरी और डकैती जैसी घटनाओं की रोकथाम के लिए तय सुरक्षा मानकों और SOP का पालन हो रहा है या नहीं, इसकी भी समीक्षा की गई। बैंक कर्मचारियों को संदिग्ध व्यक्ति या गतिविधि दिखाई देने पर तत्काल पुलिस और डायल-112 को सूचना देने के लिए कहा गया। थाना स्तर पर बैंक प्रबंधकों से नियमित समन्वय बनाकर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
पुलिस जांच के सामने अब ये अहम सवाल
- एक ही बैंक की दो शाखाएं क्यों बनीं निशाना?
झिरी और चापोरा दोनों जगह जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की शाखाओं को निशाना बनाया गया। यह संयोग है या इसके पीछे कोई खास वजह, जांच में स्पष्ट होना बाकी है। - क्या दोनों वारदातों में एक ही गिरोह?
ताला तोड़कर प्रवेश और तिजोरी-लॉकर तक पहुंचने का तरीका समान दिखाई देता है, लेकिन पुलिस ने अभी दोनों घटनाओं को जोड़कर कोई आधिकारिक दावा नहीं किया है। - क्या पहले की गई थी रेकी?
आरोपियों को तिजोरी या लॉकर की स्थिति की जानकारी कैसे थी, यह भी जांच का विषय हो सकता है। - CCTV से मिलेगा सुराग?
बैंक और आसपास के कैमरों में संदिग्ध व्यक्ति या वाहन कैद हुए हैं या नहीं, इसकी जांच आरोपियों तक पहुंचने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। -
कैश बचा, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था कठघरे में
दोनों घटनाओं में चोर तिजोरी और लॉकर खोलने में नाकाम रहे, इसलिए नकदी चोरी नहीं हुई। लेकिन इसे केवल ‘असफल चोरी’ मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। 48 घंटे के भीतर दो बैंक शाखाओं के ताले टूटना और चोरों का तिजोरी-लॉकर तक पहुंच जाना सुरक्षा व्यवस्था के लिए चेतावनी है।
अब पुलिस के सामने चुनौती सिर्फ दोनों मामलों के आरोपियों को पकड़ने की नहीं है, बल्कि यह पता लगाने की भी है कि दोनों वारदातों की कड़ी आपस में जुड़ी है या नहीं। इसका जवाब आरोपियों की पहचान, CCTV फुटेज और तकनीकी जांच के बाद ही सामने आएगा।



