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‘वंदे मातरम्’ पर दिल्ली में छिड़ी सियासत बुरहानपुर पहुंची: भाजपा का कैंडल मार्च, कांग्रेस कार्यालय के सामने गाया राष्ट्रीय गीत

सोनिया गांधी, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे से माफी की मांग; शिवाजी महाराज की प्रतिमा से कांग्रेस कार्यालय तक पहुंचे कार्यकर्ता, सांसद ज्ञानेश्वर पाटील-अर्चना चिटनिस भी उतरे सड़क पर

बुरहानपुर। स्वतंत्रता दिवस पर दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में ‘वंदे मातरम्’ के गायन के दौरान सामने आए वीडियो को लेकर छिड़ी सियासी लड़ाई रविवार को बुरहानपुर की सड़कों पर दिखाई दी। भाजपा ने कांग्रेस नेतृत्व पर राष्ट्रीय गीत के कथित अपमान का आरोप लगाते हुए कैंडल मार्च निकाला। कार्यकर्ता नारे लगाते हुए सुभाष स्कूल के पास स्थित छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा से सिंधी बस्ती स्थित जिला कांग्रेस कार्यालय तक पहुंचे। यहां विरोध दर्ज कराने के साथ सामूहिक रूप से ‘वंदे मातरम्’ का गायन किया गया।

Sadaiv News
वंदे मातरम् विवाद पर बुरहानपुर भाजपा का कैंडल मार्च

इस प्रदर्शन में सांसद ज्ञानेश्वर पाटील, प्रदेश भाजपा प्रवक्ता एवं पूर्व मंत्री विधायक अर्चना चिटनिस, भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ. मनोज माने, महापौर माधुरी पटेल सहित पार्टी के वरिष्ठ नेता, पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल हुए। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी और राहुल गांधी से माफी मांगने की मांग की।

यह विवाद 15 अगस्त को कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम के एक वीडियो के बाद शुरू हुआ। भाजपा का आरोप है कि पूर्ण ‘वंदे मातरम्’ के गायन के दौरान सोनिया गांधी ने आपत्ति जताई या इसे रोकने का संकेत दिया। कांग्रेस ने इस आरोप को खारिज किया है और कहा है कि सोनिया गांधी उस समय लंबे समय से खड़े मल्लिकार्जुन खड़गे के लिए कुर्सी की व्यवस्था करने का इशारा कर रही थीं तथा ‘वंदे मातरम्’ का गायन रोका नहीं गया था।

दिल्ली का वीडियो बना मुद्दा, बुरहानपुर में सड़क पर उतरी भाजपा

राष्ट्रीय स्तर पर एक दिन से चल रही बयानबाजी के बीच बुरहानपुर भाजपा ने मामले को सीधे सड़क पर उतार दिया। रविवार शाम कार्यकर्ता हाथों में मोमबत्तियां लेकर एकत्र हुए। छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा से शुरू हुआ मार्च शहर से होते हुए कांग्रेस के जिला कार्यालय तक पहुंचा। पूरे रास्ते कांग्रेस नेतृत्व के खिलाफ नारे लगाए गए। कांग्रेस कार्यालय पहुंचने के बाद भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने ‘वंदे मातरम्’ का गायन किया। प्रदर्शन का राजनीतिक संदेश साफ था—भाजपा इस विवाद को केवल दिल्ली की घटना मानकर छोड़ने के मूड में नहीं है। राष्ट्रीय स्तर पर भी भाजपा ने इस मुद्दे पर हमला तेज किया है। 16 अगस्त को भाजपा नेताओं ने कांग्रेस नेतृत्व से माफी की मांग की, जबकि कांग्रेस लगातार आरोप को गलत बताते हुए भाजपा पर राजनीतिक विवाद खड़ा करने का आरोप लगा रही है।

भाजपा का सवाल- स्वतंत्रता दिवस पर ‘वंदे मातरम्’ से आपत्ति क्यों?

प्रदर्शन के दौरान भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर ‘वंदे मातरम्’ के प्रति कथित आपत्ति स्वीकार नहीं की जा सकती। उनका कहना था कि राष्ट्रीय गीत स्वतंत्रता आंदोलन की भावना और देश के गौरव से जुड़ा है, इसलिए कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को पूरे घटनाक्रम पर देश के सामने स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। भाजपा नेताओं ने कहा कि केंद्र सरकार और भाजपा ने ‘वंदे मातरम्’ के संपूर्ण गायन को सम्मान देने की पहल की है, लेकिन कांग्रेस मुख्यालय में सामने आए घटनाक्रम ने कई सवाल खड़े किए हैं। हालांकि वीडियो में दिखाई दे रहे इशारों के अर्थ को लेकर दोनों दलों की व्याख्या बिल्कुल अलग है। भाजपा इसे ‘वंदे मातरम्’ के पूर्ण गायन पर आपत्ति बता रही है, जबकि कांग्रेस का स्पष्ट पक्ष है कि बातचीत खड़गे के बैठने के लिए कुर्सी मंगाने से संबंधित थी। इसलिए ‘अपमान’ का दावा फिलहाल भाजपा का राजनीतिक आरोप है, निर्विवाद रूप से स्थापित तथ्य नहीं।

सांसद-विधायक भी उतरे, कांग्रेस पर बोला तीखा हमला

कैंडल मार्च में सांसद ज्ञानेश्वर पाटील और विधायक अर्चना चिटनिस की मौजूदगी ने प्रदर्शन को स्थानीय स्तर पर बड़ा राजनीतिक स्वर दिया। भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ. मनोज माने, महापौर माधुरी अतुल पटेल सहित नेताओं ने कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को निशाने पर लिया और सार्वजनिक माफी की मांग दोहराई। भाजपा का कहना है कि सवाल केवल एक कार्यक्रम का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय प्रतीकों और स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े गीत के सम्मान का है। पार्टी इस मुद्दे को जनभावना से जोड़कर कांग्रेस को घेर रही है।

कांग्रेस कार्यालय तक मार्च, वहीं ‘वंदे मातरम्’ गाकर दिया जवाब

प्रदर्शन की सबसे राजनीतिक तस्वीर कांग्रेस जिला कार्यालय के सामने बनी। भाजपा कार्यकर्ता कैंडल मार्च लेकर वहां पहुंचे, नारेबाजी की और फिर ‘वंदे मातरम्’ का सामूहिक गायन किया। भाजपा ने इसी जगह से यह संदेश देने की कोशिश की कि जिस गीत को लेकर कांग्रेस पर सवाल उठ रहे हैं, उसी गीत को कांग्रेस कार्यालय के सामने गाकर विरोध दर्ज कराया जाएगा।

राष्ट्रीय मुद्दे पर स्थानीय राजनीति भी हुई गर्म

15 अगस्त तक जो विवाद दिल्ली में कांग्रेस और भाजपा के बीच था, 16 अगस्त को उसका असर बुरहानपुर की स्थानीय राजनीति पर भी स्पष्ट दिखाई दिया। एक ओर भाजपा ने सांसद, विधायक, महापौर और संगठन पदाधिकारियों को साथ लेकर शक्ति प्रदर्शन किया, तो दूसरी ओर कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व को सीधे निशाने पर रखा गया। मौजूदा विवाद में तथ्य से अधिक वीडियो की व्याख्या राजनीतिक संघर्ष का केंद्र बनी हुई है। भाजपा इसे राष्ट्रीय गीत के सम्मान से जोड़ रही है, जबकि कांग्रेस भाजपा के आरोप की बुनियाद को ही खारिज कर रही है।

ये नेता रहे प्रदर्शन में

कैंडल मार्च में सांसद ज्ञानेश्वर पाटील, विधायक अर्चना चिटनिस, भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ. मनोज माने, जिला महामंत्री ईश्वर चौहान, महापौर माधुरी अतुल पटेल, किसान मोर्चा प्रदेश महामंत्री मनोज लधवे, पूर्व जिलाध्यक्ष दिलीप श्रॉफ, प्रकाश कानगो, गजेंद्र पाटील, पूर्व महापौर अतुल पटेल सहित जिला, मंडल, मोर्चा एवं प्रकोष्ठों के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि और कार्यकर्ता शामिल हुए।

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