नेपानगर। नगर पालिका में कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर बरती जा रही कथित लापरवाही शुक्रवार को एक सफाई कर्मचारी की जान पर बन आई। नपा में सफाई कर्मचारी के पद पर कार्यरत ललित डुलगज से इलेक्ट्रिक हेल्पर का काम कराया जा रहा था। वार्ड नंबर-20 में बिजली लाइन सुधारने के दौरान पोल पर ही उसे करंट लग गया। गनीमत यह रही कि उसके हाथ सीधे तार से नहीं टकराए और वह पोल पर चढ़ने के लिए लगाए गए झूले में अटक गया। बड़ा हादसा टल गया, लेकिन कर्मचारी की हालत गंभीर होने पर उसे बुरहानपुर जिला अस्पताल रेफर करना पड़ा।
हादसे ने नगर पालिका की व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि सफाई के लिए नियुक्त कर्मचारी को विद्युत लाइन जैसे तकनीकी और जानलेवा जोखिम वाले काम पर किसके आदेश से लगाया गया? क्या वह विद्युत कार्य के लिए प्रशिक्षित था? यदि था तो उसका रिकॉर्ड क्या है? और यदि नहीं था तो उसे पोल पर चढ़ाने की अनुमति किसने दी? मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि कर्मचारियों को विद्युत सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने की मांग करीब एक साल पहले लिखित रूप में की जा चुकी थी। आरोप है कि तब शिकायत पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अब हादसा होने के बाद नपा प्रशासन कह रहा है कि जिन कर्मचारियों के पास सुरक्षा उपकरण नहीं हैं, उन्हें जल्द उपलब्ध करा दिए जाएंगे।
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पोल पर लगा करंट, झूले में अटका रहा कर्मचारी
शुक्रवार दोपहर वार्ड नंबर-20 में विद्युत लाइन में सुधार का काम किया जा रहा था। इसी दौरान सफाई कर्मचारी ललित डुलगज को इलेक्ट्रिक हेल्पर के रूप में काम पर लगाया गया। वह झूले के सहारे बिजली के पोल पर चढ़कर काम कर रहा था, तभी अचानक करंट की चपेट में आ गया। राहत की बात यह रही कि उसके हाथ सीधे तार से नहीं टकराए। करंट लगने के बाद वह नीचे गिरने के बजाय झूले में ही अटक गया। आसपास मौजूद लोगों ने उसे नीचे उतारा और नेपा मिल अस्पताल पहुंचाया। यहां प्राथमिक उपचार के बाद हालत गंभीर देखते हुए डॉक्टरों ने उसे बुरहानपुर जिला अस्पताल रेफर कर दिया। वहां उसका उपचार जारी है। घटना की जानकारी मिलते ही नपाध्यक्ष भारती पाटील, सीएमओ संतराम चौहान सहित नगर पालिका के कर्मचारी अस्पताल पहुंचे।
पद सफाई कर्मचारी का, काम बिजली का; जिम्मेदारी किसकी?
हादसे के बाद नगर पालिका में कर्मचारियों से उनके मूल कार्य के बजाय दूसरे जोखिमपूर्ण काम कराए जाने का मुद्दा सामने आया है। ललित सफाई कर्मचारी है, लेकिन उससे विद्युत लाइन पर काम कराया जा रहा था। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या सफाई कर्मचारी को बिजली लाइन पर काम करने के लिए कोई तकनीकी प्रशिक्षण दिया गया था? क्या उसे विद्युत कार्य करने के लिए अधिकृत किया गया था? यदि उसे इलेक्ट्रिक हेल्पर की जिम्मेदारी दी गई थी तो इसका लिखित आदेश कहां है? इन सवालों के जवाब प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे। हालांकि घटना के बाद समाजजनों और जनप्रतिनिधियों ने जिम्मेदारी तय करने की मांग तेज कर दी है।
एक साल पहले चेताया था, फिर भी सुरक्षा उपकरणों पर सवाल
इस पूरे घटनाक्रम में करीब एक साल पुराना आवेदन महत्वपूर्ण हो गया है। पार्षद प्रतिनिधि जितेंद्र सावकारे के अनुसार उन्होंने लगभग एक वर्ष पहले लिखित रूप से विद्युत कार्य करने वाले कर्मचारियों के लिए बरसाती, रेनकोट और आवश्यक विद्युत सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने की मांग की थी। सावकारे का आरोप है कि उस समय इंजीनियर विजय सिंह कुश्वाह की ओर से कहा गया था कि ऐसे कर्मचारियों को यह सामग्री उपलब्ध कराने का कोई प्रावधान नहीं है। अब विद्युत कार्य के दौरान कर्मचारी को करंट लगने के बाद पुराने आवेदन को लेकर भी जवाब मांगा जा रहा है। सवाल यह है कि यदि कर्मचारी विद्युत लाइन पर काम कर रहे थे तो उनकी सुरक्षा के लिए आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था किसकी जिम्मेदारी थी? पुराने आवेदन पर क्या कार्रवाई की गई? यदि मांग अस्वीकार की गई तो उसका आधार क्या था?
समाजजन बोले- खरीदी के टेंडर होते हैं, कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए सामग्री क्यों नहीं?
घटना के बाद समाज के लोगों में भी आक्रोश है। निलेश कटारिया ने नगर पालिका की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि नपा में विभिन्न सामग्रियों की खरीदी के लिए टेंडर किए जाते हैं, लेकिन जोखिम के बीच काम करने वाले कर्मचारियों को सुरक्षा उपकरण नहीं दिए जाते। उन्होंने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी कि कर्मचारियों के लिए जल्द सुरक्षा सामग्री उपलब्ध नहीं कराई गई तो समाज आंदोलन करेगा। समाजजनों का कहना है कि मामला केवल एक कर्मचारी के घायल होने तक सीमित नहीं है। यदि विद्युत कार्य करने वाले अन्य कर्मचारी भी पर्याप्त सुरक्षा संसाधनों के बिना काम कर रहे हैं तो भविष्य में इससे कहीं बड़ा हादसा हो सकता है।
शिकायत में 5 सवाल- इनके जवाब चाहता है पक्ष
पार्षद प्रतिनिधि जितेंद्र सावकारे ने सीएमओ के नाम शिकायत देकर पूरे मामले की जांच की मांग की है। शिकायत में मुख्य रूप से यह पता लगाने को कहा गया है कि सफाई कर्मचारी को विद्युत कार्य करने का निर्देश किसने दिया, कर्मचारी को इसका प्रशिक्षण और अनुमति थी या नहीं, घटना के समय उसे कौन-कौन से सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए गए थे, पूर्व में दिए आवेदन पर इंजीनियर की ओर से क्या कार्रवाई की गई और घायल कर्मचारी के उपचार का खर्च कौन उठाएगा। मांग की गई है कि घायल कर्मचारी के उपचार का पूरा खर्च नगर पालिका प्रशासन वहन करे और जांच के बाद लापरवाही सामने आने पर जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाए।
हादसे के बाद CMO बोले- जिनके पास उपकरण नहीं, उन्हें जल्द देंगे
सीएमओ संतराम चौहान ने कहा कि कर्मचारी विद्युत लाइन पर काम कर रहा था। कर्मचारियों को सुरक्षा उपकरण मुहैया कराए जाते हैं। जिन कर्मचारियों के पास सुरक्षा उपकरण नहीं हैं, उन्हें जल्द उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि पूर्व में बैठक के दौरान कर्मचारियों को अपनी सुरक्षा का ध्यान रखने के निर्देश दिए गए थे।
हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल- सुरक्षा की जिम्मेदारी सिर्फ कर्मचारी की?
सीएमओ के बयान के बाद एक और सवाल खड़ा होता है। विद्युत लाइन जैसे जोखिमपूर्ण कार्य में केवल कर्मचारी को ‘अपनी सुरक्षा रखने’ की हिदायत देना पर्याप्त है या नियोक्ता की ओर से निर्धारित सुरक्षा उपकरण, प्रशिक्षण और निगरानी सुनिश्चित करना भी जरूरी है? नगर पालिका को अब यह स्पष्ट करना होगा कि घटना के समय ललित के पास विद्युत कार्य के लिए निर्धारित सुरक्षा उपकरण कौन-कौन से थे। यदि सभी उपकरण उपलब्ध थे तो हादसा किन परिस्थितियों में हुआ और यदि उपकरण उपलब्ध नहीं थे तो उसे पोल पर काम करने की अनुमति क्यों दी गई? एक साल पुरानी शिकायत, सफाई कर्मचारी से विद्युत कार्य और अब करंट लगने की घटना—इन तीनों तथ्यों ने मामले को केवल हादसा नहीं, बल्कि नगर पालिका की कर्मचारी सुरक्षा व्यवस्था की जांच का विषय बना दिया है।



