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6 साल से मशीनें बंद, 774 कर्मचारियों का 10 माह का वेतन अटका; दिल्ली पहुंचा ताप्ती मिल का मामला

सांसद ज्ञानेश्वर पाटील कर्मचारी प्रतिनिधिमंडल के साथ वस्त्र मंत्रालय की सचिव से मिले; 5 साल का बोनस दिलाने और मिल शुरू करने के लिए विशेष आर्थिक पैकेज की मांग

बुरहानपुर। शहर की औद्योगिक पहचान रही ताप्ती मिल में 22 मार्च 2020 से उत्पादन बंद है। करीब छह साल बाद भी मिल के दोबारा शुरू होने का इंतजार खत्म नहीं हुआ है। दूसरी ओर इससे जुड़े कर्मचारियों की आर्थिक परेशानी लगातार बढ़ रही है। 774 कर्मचारियों का अक्टूबर 2025 से जुलाई 2026 तक 10 माह का वेतन बकाया बताया गया है, जबकि कोविड काल से करीब 5 वर्षों का बोनस भी लंबित है।

Sadaiv News
सांसद ज्ञानेश्वर पाटील ने कर्मचारी प्रतिनिधिमंडल के साथ वस्त्र मंत्रालय की सचिव नीलम शमी राव से मुलाकात की

अब कर्मचारियों की यही आवाज एक बार फिर दिल्ली पहुंची है। खंडवा सांसद ज्ञानेश्वर पाटील ने बुधवार को ताप्ती मिल कर्मचारियों के प्रतिनिधिमंडल के साथ नई दिल्ली में वस्त्र मंत्रालय की सचिव नीलम शमी राव से मुलाकात की। उन्होंने तीन प्रमुख मांगें रखीं—बकाया वेतन का भुगतान, लंबित बोनस जारी करना और ताप्ती मिल को दोबारा शुरू करने के लिए केंद्र सरकार से विशेष आर्थिक पैकेज उपलब्ध कराना। सांसद ने मंत्रालय के सामने मिल की मौजूदा स्थिति रखते हुए कहा कि उत्पादन भले ही वर्षों से बंद है, लेकिन मिल की सुरक्षा और आवश्यक व्यवस्थाओं से जुड़े कर्मचारी अब भी सेवाएं दे रहे हैं। लंबे समय तक भुगतान नहीं होने से इन कर्मचारियों और उनके परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

उत्पादन शून्य, लेकिन जिम्मेदारी जारी; 19 कर्मचारी तीन शिफ्ट में कर रहे सुरक्षा

ताप्ती मिल नेशनल टेक्सटाइल कॉरपोरेशन (एनटीसी) की इकाई है। इसका उत्पादन 22 मार्च 2020 से बंद है। इसके बावजूद अधिकारी, लिपिक, सुरक्षा कर्मचारी और आवश्यक सेवाओं से जुड़े कर्मचारी मिल की व्यवस्थाएं संभाल रहे हैं। सांसद पाटील ने सचिव के सामने विशेष रूप से सुरक्षा विभाग में कार्यरत 19 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों का मामला रखा। बताया कि उत्पादन बंद होने के बाद भी ये कर्मचारी तीनों शिफ्ट में मिल की संपत्ति और परिसंपत्तियों की सुरक्षा कर रहे हैं। इन कर्मचारियों का भी करीब 10 माह का वेतन और पांच वर्षों का बोनस लंबित बताया गया है। सांसद ने कहा कि नियमित रूप से जिम्मेदारी निभा रहे कर्मचारियों को समय पर पारिश्रमिक मिलना चाहिए।

वेतन मिल भी गया तो बड़ा सवाल बाकी—ताप्ती मिल दोबारा कब चलेगी?

कर्मचारियों के लिए तत्काल मुद्दा बकाया वेतन और बोनस का है, लेकिन ताप्ती मिल का बड़ा सवाल इसके भविष्य को लेकर है। करीब छह वर्षों से उत्पादन बंद होने के कारण मिल से जुड़े रोजगार का संकट जस का तस बना हुआ है। इसीलिए सांसद ने मंत्रालय के सामने केवल लंबित भुगतान की मांग नहीं रखी, बल्कि मिल के नियमित संचालन के लिए केंद्र सरकार से विशेष आर्थिक पैकेज मांगा है।

पहले भी दिल्ली पहुंचा मामला, सांसद की पहल के बाद मिला था दो माह का वेतन

यह पहला मौका नहीं है जब ताप्ती मिल कर्मचारियों के बकाया वेतन का मुद्दा वस्त्र मंत्रालय तक पहुंचा है। सांसद ज्ञानेश्वर पाटील इससे पहले भी सचिव नीलम शमी राव से मिलकर कर्मचारियों की समस्या उठा चुके हैं। सांसद पक्ष के मुताबिक, उस पहल के बाद कर्मचारियों का दो माह का बकाया वेतन जारी हुआ था। अब अक्टूबर 2025 से जुलाई 2026 तक के 10 माह के वेतन और करीब पांच साल के बोनस के भुगतान की मांग की गई है। इस बार कर्मचारियों की मांगों के साथ मिल के पुनः संचालन के लिए आर्थिक पैकेज का मुद्दा भी प्रमुखता से रखा गया।

प्रधानमंत्री मोदी से भी मिल चुके सांसद, वित्तीय मदद की रखी थी मांग

ताप्ती मिल को दोबारा शुरू कराने का मामला प्रधानमंत्री स्तर तक भी पहुंच चुका है। सांसद ज्ञानेश्वर पाटील ने इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर मिल की स्थिति से अवगत कराया था। उन्होंने प्रधानमंत्री के सामने ताप्ती मिल को बुरहानपुर की औद्योगिक पहचान और श्रमिक परिवारों की आजीविका से जुड़ा बताते हुए इसके पुनः संचालन के लिए आवश्यक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था। अब वस्त्र मंत्रालय की सचिव के सामने दोबारा मामला उठाए जाने से कर्मचारियों की उम्मीदें फिर बढ़ी हैं।

774 परिवारों की नजर अब मंत्रालय के अगले कदम पर

सांसद ने कहा कि 774 कर्मचारियों और उनके परिवारों के हित में केंद्र सरकार के स्तर पर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। कर्मचारियों का बकाया वेतन और बोनस दिलाना तथा मिल को नियमित रूप से शुरू कराना प्राथमिकता है। मुलाकात के दौरान वस्त्र मंत्रालय की सचिव ने प्रतिनिधिमंडल की मांगों को सुना। सांसद पक्ष के अनुसार उन्होंने कर्मचारियों की समस्याओं और मिल के पुनः संचालन से जुड़े विषय पर आवश्यक सकारात्मक कदम उठाने का भरोसा दिलाया है। हालांकि कर्मचारियों के लिए अब सबसे अहम सवाल यही है कि 10 माह का बकाया वेतन और पांच वर्षों का बोनस कब जारी होगा तथा करीब छह साल से बंद पड़ी ताप्ती मिल की मशीनें दोबारा कब चलेंगी।

ये कर्मचारी प्रतिनिधि रहे मौजूद

सांसद के साथ प्रतिनिधिमंडल में ज्योतिबा धड़स, विजय कारले, संतोष लहाने, दिनेश जाधव, राजेश सूर्यवंशी, पंकज पवार और गोलू ठाकुर मौजूद रहे।

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