बुरहानपुर। नाबालिग छात्रा को कथित रूप से बहला-फुसलाकर असीरगढ़ ले जाने का मामला अब पुलिस केस से आगे बढ़कर बड़े विरोध और जांच की मांग तक पहुंच गया है। हिंदू जागरण मंच ने मंगलवार को कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक के नाम शिकायत देकर मामले की SIT गठित कर जांच कराने की मांग की। संगठन ने आशंका जताई है कि प्रकरण में केवल सामने आए लोगों की भूमिका नहीं, बल्कि इसके पीछे अन्य लोग भी हो सकते हैं। साथ ही आरोपियों के मकान पर बुलडोजर चलाने की मांग भी की गई है।
संगठन की शिकायत ने अब सबसे बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—क्या यह एक नाबालिग से जुड़ा अकेला मामला है या इसके पीछे और भी कड़ियां हैं? हालांकि संगठन द्वारा लगाए गए संगठित गिरोह संबंधी आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इनकी सच्चाई पुलिस जांच में ही सामने आएगी।
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15 अगस्त की घटना, अब 18 अगस्त को SIT की मांग
शिकायत के मुताबिक मामला 15 अगस्त 2026 का है। कोतवाली थाना क्षेत्र की एक नाबालिग छात्रा को बहला-फुसलाकर असीरगढ़ ले जाने का आरोप है। प्रकरण सामने आने के बाद पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू की। मामले को लेकर पहले हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता कोतवाली भी पहुंचे थे और कार्रवाई की मांग की थी। अब तीन दिन बाद हिंदू जागरण मंच ने सीधे जिला प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के सामने मामला उठाते हुए जांच का दायरा बढ़ाने की मांग कर दी है।
मंच का सवाल—असीरगढ़ तक कैसे पहुंची नाबालिग, और कौन था शामिल?
हिंदू जागरण मंच के अजित परदेशी ने शिकायत में पूरे घटनाक्रम की बारीकी से जांच की मांग की है। संगठन चाहता है कि पुलिस यह पता लगाए कि नाबालिग को असीरगढ़ तक ले जाने की योजना कैसे बनी, किसने मदद की और घटनाक्रम में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से और कौन शामिल था। संगठन ने दावा किया है कि शहर में ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं और इसके पीछे संगठित तरीके से काम करने वाले लोगों की भूमिका की जांच होनी चाहिए। फिलहाल यह हिंदू जागरण मंच का आरोप और आशंका है, पुलिस की ओर से किसी संगठित गिरोह की पुष्टि नहीं की गई है।
अनस, उबेद और सहेली का नाम लेकर कार्रवाई की मांग
शिकायत में अनस, उबेद और पीड़ित युवती की सहेली का नाम लेते हुए उनके आवास पर बुलडोजर कार्रवाई की मांग की गई है। हालांकि किसी भी मकान को तोड़ने जैसी कार्रवाई वैधानिक प्रक्रिया, संपत्ति की स्थिति और सक्षम प्राधिकारी के निर्णय के आधार पर ही हो सकती है। मंच ने यह भी मांग की कि प्रकरण में गंभीर धाराओं के तहत विवेचना की जाए और वरिष्ठ अधिकारियों की SIT गठित कर जांच कराई जाए, ताकि मामले से जुड़ी हर कड़ी सामने आ सके।
शिकायत में तीखा आरोप—‘इस्लामिक स्टेट’ बनाने की मंशा तक का जिक्र
हिंदू जागरण मंच की शिकायत में बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कथित गतिविधियों को देश को ‘इस्लामिक स्टेट’ बनाने की मंशा से भी जोड़ा गया है। यह संगठन का आरोप है और शिकायत में इसके समर्थन में किसी जांच एजेंसी के निष्कर्ष का उल्लेख नहीं है। इसलिए इस दावे की सत्यता पुलिस जांच और साक्ष्यों के बाद ही तय हो सकेगी। यही वजह है कि अब मामले में SIT की मांग महत्वपूर्ण हो गई है। यदि पुलिस जांच में किसी नेटवर्क या अन्य व्यक्तियों की भूमिका के प्रमाण मिलते हैं तो जांच का दायरा बढ़ सकता है। वहीं यदि प्रमाण नहीं मिलते हैं तो संगठन द्वारा लगाए गए आरोपों की स्थिति भी स्पष्ट हो जाएगी।
तीन बड़े सवाल, जिनके जवाब जांच से मिलने बाकी
पूरे मामले में अब तीन सवाल अहम हैं—नाबालिग को असीरगढ़ ले जाने के पीछे वास्तविक घटनाक्रम क्या था? क्या इसमें अन्य लोगों की भूमिका थी? और क्या यह अकेला मामला था या संगठन द्वारा जताई जा रही किसी नेटवर्क की आशंका में तथ्य हैं? इन सवालों के जवाब आरोप-प्रत्यारोप से नहीं, बल्कि पुलिस की निष्पक्ष जांच, डिजिटल साक्ष्य, कॉल रिकॉर्ड, संबंधित लोगों के बयान और अन्य उपलब्ध सबूतों से ही सामने आ सकेंगे।
18 अगस्त को दी गई शिकायत के बाद अब गेंद पुलिस और प्रशासन के पाले में है। हिंदू जागरण मंच ने SIT से लेकर आरोपियों के मकान पर बुलडोजर चलाने तक की मांग रख दी है। ऐसे में नजर इस बात पर रहेगी कि पुलिस मौजूदा जांच को ही आगे बढ़ाती है या संगठन की मांग के बाद प्रकरण की जांच का दायरा और बढ़ाया जाता है।



