बुरहानपुर। आरके ऑटो डील की पार्किंग से 7 लाख रुपए की अर्टिगा चोरी की वारदात में पुलिस जांच के साथ चौंकाने वाली कड़ियां सामने आई हैं। यह किसी अनजान चोर द्वारा मौका देखकर कार ले जाने का मामला नहीं था। पुलिस के मुताबिक पकड़ा गया आरोपी शेख नासीर अली कभी इसी कार के पुराने मालिक के यहां काम करता था। करीब डेढ़ साल पहले नौकरी छोड़ चुका था, लेकिन कार की डुप्लीकेट चाबी उसके पास थी। चोरी से पहले उसने GPS सिस्टम सक्रिय कराकर कार की लोकेशन पता की। मुंबई से बुरहानपुर आया, करीब 7-8 दिन ठहरकर रैकी की और फिर पार्किंग का ताला कटर से काटकर अर्टिगा ले गया।
पूरी वारदात में सबसे अहम बात यही है कि कार का मालिक और शहर बदल गया, लेकिन कथित तौर पर उसका पुराना ‘एक्सेस’ आरोपी के पास बना रहा। पुलिस की जांच अब उस डुप्लीकेट चाबी और GPS तक आरोपी की पहुंच की कहानी भी सामने ला रही है।
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पहली कड़ी: मुंबई से खरीदी गई थी कार, आरोपी को पहले से थी जानकारी
आरके ऑटो डील संचालक ने अर्टिगा मुंबई से खरीदी थी। गणपति नाका टीआई कमल सिंह पवार के मुताबिक गिरफ्तार आरोपी शेख नासीर कार के पुराने मालिक शेख मोहम्मद के यहां काम करता था। आरोपी ने करीब डेढ़ साल पहले वहां काम छोड़ दिया था। पुलिस के अनुसार उसने कार की डुप्लीकेट चाबी बना रखी थी। इससे उसे वाहन के बारे में पहले से जानकारी थी। यही पुराना कनेक्शन आगे चलकर चोरी की महत्वपूर्ण कड़ी बना।
दूसरी कड़ी: GPS एक्टिवेट कराया और पता लगा लिया कार कहां है
मामले का सबसे दिलचस्प पहलू GPS सिस्टम है। पुलिस के मुताबिक आरोपी ने चोरी से पहले कार का GPS सिस्टम सक्रिय कराकर उसकी लोकेशन पता की। इससे उसे जानकारी मिली कि जिस कार से उसका पुराना कनेक्शन था, वह अब बुरहानपुर में है। यानी जिस ट्रैकिंग तकनीक का इस्तेमाल सामान्य तौर पर वाहन की लोकेशन और सुरक्षा के लिए किया जाता है, उसी तक कथित पहुंच आरोपी के लिए कार खोजने का जरिया बन गई। यहां जांच का एक अहम सवाल भी बनता है कि कार बिकने के बाद GPS सिस्टम तक पुराने कर्मचारी की पहुंच कैसे बनी रही? पुलिस की ओर से उपलब्ध जानकारी में अभी इसका विस्तृत तकनीकी ब्यौरा सामने नहीं आया है।
तीसरी कड़ी: लोकेशन मिलते ही चोरी नहीं की, 7-8 दिन पहले पहुंचा बुरहानपुर
पुलिस के अनुसार लोकेशन पता चलने के बाद आरोपी ने जल्दबाजी नहीं की। वह वारदात से करीब सात-आठ दिन पहले बुरहानपुर आ गया था। यहां एक लॉज में ठहरा और पहले आसपास की गतिविधियों की रैकी की। जांच में मिले CCTV फुटेज में संदिग्धों के बस स्टैंड स्थित जनता होटल में रुककर रैकी करने की बात सामने आई। इससे पुलिस को संकेत मिला कि चोरी के पहले आरोपियों ने पर्याप्त समय लेकर कार और पार्किंग की स्थिति को समझा था।
चौथी कड़ी: 22 अगस्त की रात काटा ताला, डुप्लीकेट चाबी से ले गए कार
दरअसल 22 अगस्त को जयस्तंभ निवासी सहजीम खान ने गणपति नाका थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। उनकी सफेद अर्टिगा MH-47-AS-2405 आरके ऑटो डील की पार्किंग में खड़ी थी। बदमाश पार्किंग के गेट का ताला कटर से काटकर अंदर घुसे और कार लेकर फरार हो गए। पुलिस जांच के अनुसार डुप्लीकेट चाबी पहले से होने के कारण कार तक पहुंचने के बाद उसे ले जाना आरोपियों के लिए आसान हो गया। यहां वारदात की तैयारी साफ दिखाई देती है—पहले कार की लोकेशन, फिर शहर में डेरा, उसके बाद रैकी और अंत में कटर के साथ पार्किंग में प्रवेश।
पांचवीं कड़ी: CCTV में दो संदिग्ध, जांच बुरहानपुर से मुंबई पहुंची
मामला दर्ज होने के बाद एसपी आशुतोष बागरी ने टीम गठित की। पुलिस ने घटनास्थल और आसपास के CCTV फुटेज खंगाले तथा तकनीकी साक्ष्यों को जोड़ना शुरू किया। टीआई पवार के मुताबिक CCTV और तकनीकी जांच में दो लोगों को चिह्नित किया गया। पुलिस ने एक-एक कड़ी जोड़ते हुए आरोपियों का मुंबई कनेक्शन निकाला। इसके बाद शेख नासीर अली पिता शेख शाकिर अली, मूल निवासी चांदपुर, बिजनौर तथा वर्तमान निवासी खान कंपाउंड, मुंब्रा मुंबई को पुलिस ने अभिरक्षा में लिया। पुलिस के मुताबिक पूछताछ में उसने अपने साथी के साथ वारदात करना स्वीकार किया। उसके कब्जे से चोरी गई करीब 7 लाख रुपए कीमत की अर्टिगा भी बरामद कर ली गई।
एक गिरफ्तार, दूसरी कड़ी अभी फरार
पुलिस के मुताबिक वारदात में शामिल दूसरा आरोपी इनायत उल्ला पिता रहमतुल्लाह (40), निवासी कुर्ला फिनिक्स मॉल चाल, मुंबई अभी फरार है। पुलिस उसकी तलाश कर रही है। फरार आरोपी की गिरफ्तारी के बाद वारदात की तैयारी, बुरहानपुर में दोनों की गतिविधियां और चोरी के बाद कार को लेकर बनाई गई योजना से जुड़ी कुछ और जानकारियां सामने आ सकती हैं।
चोरी से बड़ा सवाल: सेकंड हैंड कार खरीदी तो पुराने ‘डिजिटल एक्सेस’ का क्या हुआ?
इस केस ने सेकंड हैंड वाहनों की खरीद-बिक्री में एक महत्वपूर्ण सुरक्षा पहलू उजागर किया है। आमतौर पर वाहन खरीदते समय RC, बीमा और उपलब्ध चाबियों पर ध्यान दिया जाता है, लेकिन आधुनिक वाहनों में GPS या दूसरे ट्रैकिंग सिस्टम से जुड़े पुराने अकाउंट और एक्सेस भी सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। इस मामले में पुलिस का दावा है कि आरोपी के पास डुप्लीकेट चाबी थी और उसने GPS सिस्टम सक्रिय कराकर कार की लोकेशन हासिल की। ऐसे में सवाल उठता है कि वाहन मुंबई से बिककर बुरहानपुर पहुंचने के बाद भी पुरानी चाबी और GPS की पहुंच निष्क्रिय क्यों नहीं हुई? फिलहाल पुलिस ने एक आरोपी को पकड़कर कार बरामद कर ली है, लेकिन इस चोरी की कहानी यह बताती है कि वारदात की शुरुआत 22 अगस्त को पार्किंग का ताला कटने से नहीं, बल्कि उससे काफी पहले कार की जानकारी, डुप्लीकेट चाबी और लोकेशन तक पहुंच से हो चुकी थी।



