बुरहानपुर। शहर में आवारा कुत्तों की समस्या अब लोगों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा बनती जा रही है। मंगलवार को राजीव वार्ड के प्रगति नगर निवासी 7 वर्षीय आहिल पिता आजम खान को आवारा कुत्ते ने काटकर घायल कर दिया। चिंताजनक बात यह है कि घटना नगर निगम कार्यालय कुछ ही दूरी पर है। जिस निगम पर शहर में आवारा कुत्तों के प्रबंधन की जिम्मेदारी है, उसी के आसपास कुत्तों के जमावड़े और बच्चे पर हमले की घटना ने व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
दरअसल शहर के अलग-अलग हिस्सों में आवारा कुत्तों के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्रगति नगर और नगर निगम कार्यालय के आसपास भी कुत्तों का जमावड़ा देखा जाता है। स्थानीय लोगों के मुताबिक समस्या लंबे समय से बनी हुई है, लेकिन इससे राहत नहीं मिल पा रही है।
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निगम के पास हमला, जिम्मेदारों के सामने चुनौती
मंगलवार को सात साल का आहिल क्षेत्र से गुजर रहा था। इसी दौरान कुत्ते ने उस पर हमला कर दिया और काटकर घायल कर दिया। घटना के बाद एक बार फिर सवाल उठा है कि आवारा कुत्तों की संख्या और आक्रामक घटनाओं को नियंत्रित करने के लिए निगम की मौजूदा व्यवस्था कितनी प्रभावी है? विशेष रूप से नगर निगम कार्यालय और प्रगति नगर जैसे आवाजाही वाले क्षेत्रों में कुत्तों का जमावड़ा बच्चों और बुजुर्गों के लिए चिंता का कारण बना हुआ है।
रात में और बढ़ता है खौफ, बाइक के पीछे दौड़ते हैं कुत्ते
स्थानीय लोगों के अनुसार समस्या केवल कुत्ते के काटने तक सीमित नहीं है। रात के समय स्थिति ज्यादा परेशानी वाली हो जाती है। सड़क पर घूमने वाले कुत्ते कई बार दोपहिया वाहन चालकों के पीछे दौड़ पड़ते हैं। अचानक कुत्तों के पीछे दौड़ने से बाइक चालक घबरा जाते हैं और संतुलन बिगड़ने का खतरा रहता है। ऐसे में कुत्तों के सीधे हमले के साथ सड़क दुर्घटना का जोखिम भी बना हुआ है।
नसबंदी भी हुई, शेल्टर भी बना; फिर सड़कों पर समस्या क्यों?
नगर निगम की ओर से आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रित करने के लिए नसबंदी अभियान चलाने और शेल्टर होम बनाने की व्यवस्था की गई है। इसके बावजूद लोगों को राहत नहीं मिलना इन प्रयासों की प्रभावशीलता पर सवाल खड़ा करता है। अब जरूरत इस बात की है कि निगम यह भी देखे कि कितने कुत्तों की नसबंदी हुई, किन क्षेत्रों में अभियान चलाया गया, टीकाकरण की स्थिति क्या है और शिकायत मिलने के बाद कार्रवाई कितनी जल्दी की जा रही है। आवारा कुत्तों का प्रबंधन निर्धारित पशु कल्याण नियमों के तहत किया जाना होता है, इसलिए समस्या का समाधान भी नियमानुसार नसबंदी, टीकाकरण और प्रभावी निगरानी के जरिए करना होगा।
दरअसल 2026 में नगर निगम द्वारा बुरहानपुर में आवारा कुत्तों की नसबंदी एवं टीकाकरण के लिए एनिमल बर्थ कंट्रोल कार्यक्रम के तहत करीब 21 लाख रुपए की निविदा भी निकाली गई थी। इसके बावजूद मौजूदा घटना बताती है कि सार्वजनिक स्थानों पर मानव-कुत्ता संघर्ष रोकने के लिए प्रभावी निगरानी जरूरी है।
रोज अस्पताल पहुंच रहे पीड़ित तो आंकड़े भी सार्वजनिक हों
शहर में कुत्तों के काटने से लोगों के अस्पताल पहुंचने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। ऐसे में नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि शहर में प्रतिदिन या प्रतिमाह कितने डॉग बाइट के मामले सामने आ रहे हैं। इन आंकड़ों के आधार पर उन इलाकों को चिह्नित किया जा सकता है जहां घटनाएं अधिक हो रही हैं। इससे नसबंदी और एंटी-रेबीज टीकाकरण अभियान को भी प्राथमिकता के आधार पर चलाया जा सकेगा।
लोगों का सवाल—कब मिलेगी आवारा कुत्तों के खौफ से राहत?
प्रगति नगर और आसपास के रहवासियों की मांग है कि नगर निगम समस्या को गंभीरता से लेकर प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल प्रभावी कदम उठाए। जिन स्थानों पर कुत्तों के झुंड अधिक हैं, वहां निगरानी बढ़ाने के साथ नियमानुसार नसबंदी और टीकाकरण अभियान तेज किया जाए।



