बुरहानपुर। शहर से सटी ग्राम पंचायत ऐमागिर्द के हमीदपुरा स्थित वक्फ कब्रिस्तान की बेशकीमती जमीन को लेकर विवाद गहरा गया है। सवाल उस हिस्से को लेकर है जो हाईवे से लगा है। मुस्लिम समाज के कुछ लोगों का आरोप है कि विधायक निधि से बनाई जा रही बाउंड्रीवाल में इस हिस्से को बाहर छोड़ा जा रहा है। गुरुवार को लोगों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सवाल उठाया—जब हाईवे से लगी जमीन भी कब्रिस्तान का हिस्सा है तो बाउंड्रीवाल उसकी वास्तविक सीमा तक क्यों नहीं बनाई जा रही?
दरअसल समाज के लोगों ने भविष्य में खुली छोड़ी जा रही जमीन पर अतिक्रमण और व्यावसायिक निर्माण की आशंका जताई है। जिला प्रशासन से शिकायत कर फिलहाल निर्माण रोकने, राजस्व और वक्फ रिकॉर्ड के आधार पर पूरी जमीन का सीमांकन कराने और इसके बाद वास्तविक सीमा तक बाउंड्रीवाल बनाने की मांग की गई है। हालांकि जमीन के व्यावसायिक उपयोग की कोई आधिकारिक पुष्टि या स्वीकृति सामने नहीं आई है। यह शिकायतकर्ताओं की ओर से जताई गई आशंका है।
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खसरा 495 से शुरू हुआ विवाद; दावा—हाईवे बनने के बाद तीन हिस्से हुए
मोहम्मद इब्राहिम सहित अन्य लोगों ने बताया कि वक्फ संपत्ति खसरा नंबर 495 पहले एक ही भूभाग था। हाईवे निकलने के बाद यह 495, 495/1 और 495/3 में विभाजित हो गया। अब ग्राम पंचायत द्वारा विधायक निधि से कब्रिस्तान की पश्चिम दिशा में बाउंड्रीवाल का निर्माण कराया जा रहा है। लोगों का आरोप है कि निर्माण में हाईवे से लगी जमीन को बाउंड्रीवाल के भीतर नहीं लिया जा रहा। इसी हिस्से की कीमत और भविष्य में उसके उपयोग को लेकर विवाद खड़ा हुआ है।
समाज का सवाल—जगह पहले ही कम, फिर जमीन बाहर छोड़ने की जरूरत क्या?
समाज के लोगों का कहना है कि आबादी बढ़ने के साथ कब्रिस्तान में जगह की जरूरत भी बढ़ रही है। सड़क निर्माण के कारण जमीन का हिस्सा पहले ही प्रभावित हुआ है। ऐसे में शेष भूमि का प्रत्येक हिस्सा कब्रिस्तान के लिए सुरक्षित रखा जाना चाहिए। उनकी मांग है कि बाउंड्रीवाल का काम आगे बढ़ाने से पहले खसरा नक्शा, राजस्व रिकॉर्ड और वक्फ अभिलेखों के आधार पर मौके पर सीमांकन कराया जाए। यदि हाईवे से लगी जमीन कब्रिस्तान में दर्ज है तो उसे भी बाउंड्रीवाल के भीतर लिया जाए। यही इस पूरे विवाद का सबसे अहम तथ्य है, जिसकी स्थिति दस्तावेज और सीमांकन से ही स्पष्ट हो सकती है।
अधिवक्ता बोले—कब्रिस्तान के अलावा दूसरा उपयोग नहीं होने देंगे, जरूरत पड़ी तो कोर्ट जाएंगे
अधिवक्ता जहीर उद्दीन ने कहा कि कब्रिस्तान में जगह पहले ही कम पड़ रही है। इसलिए उपलब्ध भूमि को कब्रिस्तान के लिए ही रहने दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि समाज की आपत्ति का निराकरण नहीं किया गया तो मामले को न्यायालय में ले जाएंगे। मामले की जानकारी मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड को भी भेजे जाने की बात कही गई है।
दूसरे निर्माण के प्लान ने बढ़ाई नाराजगी
विवाद केवल बाउंड्रीवाल तक सीमित नहीं है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चे के जिलाध्यक्ष अजहर उल हक ने कब्रिस्तान की जमीन पर कुछ अन्य निर्माण कार्यों को लेकर एक प्लान वक्फ से जुड़े पदाधिकारियों के सामने रखा है। इसी बात को लेकर समाज के कुछ लोगों में नाराजगी है। लोगों का कहना है कि जब कब्रिस्तान के लिए ही जमीन कम पड़ने की स्थिति है तो वहां किसी दूसरे निर्माण की जरूरत क्यों है? पहले यह स्पष्ट होना चाहिए कि प्रस्ताव क्या है, निर्माण कहां होना है और उसके लिए किस स्तर से अनुमति ली गई है। फिलहाल ऐसे किसी प्रस्तावित निर्माण की प्रशासनिक स्वीकृति अथवा जमीन के व्यावसायिक उपयोग का दस्तावेज सामने नहीं आया है। इसलिए इसे स्थापित तथ्य के बजाय शिकायतकर्ताओं का दावा माना जाना चाहिए।
वक्फ पक्ष का जवाब—जमीन बचाने के लिए करा रहे फेंसिंग
वक्फ से जुड़े शेख फारूक ने विवाद पर कहा कि जमीन कब्रिस्तान की है और समाज के लिए ही काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि संबंधित स्थान पर अवैध कब्जा हो रहा था, इसलिए तार फेंसिंग का काम कराया जा रहा है। उनका कहना है कि समाज के कुछ लोगों को पहले ही स्थिति से अवगत कराया गया था। अब जो आपत्ति सामने आई है, उसे लेकर समाज के लोगों के साथ बैठक की जाएगी और चर्चा कर समाधान निकाला जाएगा।
सबसे बड़ा सवाल—रिकॉर्ड में जमीन कहां तक?
विवाद में दोनों पक्षों के अपने-अपने दावे हैं, लेकिन इसका जवाब राजस्व रिकॉर्ड और वक्फ अभिलेख ही दे सकते हैं। प्रशासन यदि मौके पर विधिवत सीमांकन कराकर खसरा 495, 495/1 और 495/3 की स्थिति तथा प्रस्तावित बाउंड्रीवाल की स्वीकृत सीमा सार्वजनिक कर देता है तो यह स्पष्ट हो सकता है कि हाईवे से लगा हिस्सा कब्रिस्तान की भूमि में कहां तक दर्ज है। फिलहाल समाज की मांग साफ है—पहले जमीन की पूरी सीमा तय हो, फिर बाउंड्रीवाल बने। वहीं वक्फ पक्ष फेंसिंग को जमीन पर अवैध कब्जा रोकने की कार्रवाई बता रहा है। अब निगाह प्रशासन पर है कि वह शिकायत के बाद रिकॉर्ड और मौके की स्थिति की जांच कर विवाद को स्पष्ट करता है या मामला न्यायालय तक पहुंचता है।



