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फैक्ट्री पर दबिश: 680 किलो अमानक पॉलीथिन जब्त, जुर्माना सिर्फ ₹15 हजार; फैक्ट्री सील क्यों नहीं?

निगम का दावा—50 माइक्रॉन से कम मोटाई की पॉलीथिन बन रही थी; एक लाख से ज्यादा का माल जब्त, कार्रवाई जुर्माने तक सिमटी

बुरहानपुर। शहर में अमानक पॉलीथिन पर सख्ती का दावा कर रहे नगर निगम ने बुधवार को आलमगंज स्थित योगेश पैकेजिंग फैक्ट्री पर दबिश देकर 680 किलो पॉलीथिन जब्त की। निगम के मुताबिक जब्त पॉलीथिन 50 माइक्रॉन से कम मोटाई की थी और इसकी कीमत एक लाख रुपए से अधिक है। लेकिन इतनी बड़ी मात्रा में माल मिलने के बावजूद निगम ने फैक्ट्री को सील नहीं किया। कार्रवाई सिर्फ 15 हजार रुपए के जुर्माने तक सिमट गई। यही वजह है कि निगम की कार्रवाई अब सवालों के घेरे में है। यदि फैक्ट्री में नियमों के विपरीत पॉलीथिन का उत्पादन और बिक्री हो रही थी तो उत्पादन रोकने या फैक्ट्री सील करने जैसी कार्रवाई क्यों नहीं की गई? और यदि फैक्ट्री का उत्पादन नियमों के दायरे में था तो 680 किलो माल किस आधार पर जब्त किया गया?

Sadaiv News
बुरहानपुर आलमगंज योगेश पैकेजिंग में 680 किलो अमानक पॉलीथिन जब्त

नगर निगम की सहायक आयुक्त स्वर्णिका वर्मा के नेतृत्व में टीम बुधवार दोपहर करीब 12.30 बजे आलमगंज स्थित योगेश पैकेजिंग पहुंची। यहां जांच के दौरान प्लास्टिक निर्माण का रॉ मटेरियल भी बड़ी मात्रा में मौजूद था। निगम ने तैयार पॉलीथिन की जांच कर इसमें से 680 किलो माल को 50 माइक्रॉन से कम मोटाई का बताते हुए जब्त कर लिया।

निगम बोला—परमिशन है, लेकिन कम माइक्रॉन का उत्पादन किया

सहायक आयुक्त स्वर्णिका वर्मा के अनुसार फैक्ट्री में प्लास्टिक के दानों से पैकेजिंग मटेरियल तैयार किया जा रहा था। फैक्ट्री के पास प्लास्टिक मटेरियल के निर्माण और बिक्री की अनुमति है, लेकिन मौके पर 50 माइक्रॉन से कम मोटाई वाली पॉलीथिन का उत्पादन और बिक्री होना पाया गया। इसी आधार पर 680 किलो पॉलीथिन जब्त कर 15 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया। यह नगर निगम की एक सप्ताह के भीतर अमानक प्लास्टिक को लेकर दूसरी बड़ी कार्रवाई है। हाल ही में निगम आयुक्त संदीप श्रीवास्तव ने बैठक लेकर अधिकारियों-कर्मचारियों को अमानक पॉलीथिन के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे।

बड़ा सवाल: उत्पादन गलत था तो फैक्ट्री पर ताला क्यों नहीं?

निगम की कार्रवाई में सबसे बड़ा सवाल यहीं खड़ा होता है। एक तरफ निगम खुद दावा कर रहा है कि फैक्ट्री में निर्धारित मानक से कम मोटाई वाली पॉलीथिन बनाई और बेची जा रही थी। दूसरी ओर, कार्रवाई के बाद फैक्ट्री को सील नहीं किया गया।मौके पर प्लास्टिक के दानों सहित निर्माण में इस्तेमाल होने वाला रॉ मटेरियल बड़ी मात्रा में दिखाई दिया। इसके बावजूद निगम ने तत्काल उत्पादन बंद कराने या परिसर सील करने जैसी कार्रवाई नहीं की। कार्रवाई 680 किलो माल जब्त करने और 15 हजार रुपए का जुर्माना लगाने तक सीमित रही। ऐसे में सवाल है कि क्या 15 हजार रुपए का जुर्माना लगाकर अमानक पॉलीथिन के उत्पादन पर प्रभावी रोक लग पाएगी?

मानकों को लेकर मौके पर स्थिति स्पष्ट नहीं

कार्रवाई के दौरान यह भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं किया गया कि फैक्ट्री को किस प्रकार और कितनी मोटाई के प्लास्टिक उत्पाद बनाने की अनुमति है। निगम अधिकारियों के अनुसार फैक्ट्री के पास निर्माण और बिक्री की अनुमति है, लेकिन कम माइक्रॉन वाली पॉलीथिन बनाने की अनुमति नहीं है। ऐसी स्थिति में फैक्ट्री के अनुमति संबंधी दस्तावेजों, उत्पादन की श्रेणी और तैयार उत्पादों के निर्धारित मानकों की विस्तृत जांच महत्वपूर्ण हो जाती है। यदि दस्तावेजों और उत्पादन में अंतर मिलता है तो आगे क्या कार्रवाई होगी, निगम ने फिलहाल इसे स्पष्ट नहीं किया है।

संचालक का दावा—औद्योगिक पैकेजिंग के लिए बनाते हैं बैग

फैक्ट्री संचालक श्रीचंद ने निगम की कार्रवाई पर अलग पक्ष रखा। उनका कहना है कि यहां प्लास्टिक के बड़े बैग तैयार किए जाते हैं, जिनका उपयोग उद्योग नगर में कपड़े सहित अन्य वस्तुओं की पैकेजिंग के लिए होता है। रंगीन पॉलीथिन नहीं बनाई जाती और तैयार किया जा रहा मटेरियल औद्योगिक उपयोग के लिए स्वीकृत है। उन्होंने पॉलीथिन की मोटाई की जांच के तरीके पर भी सवाल उठाया। श्रीचंद के मुताबिक उन्हें यह जानकारी नहीं है कि माइक्रॉन का आकलन किस तरीके से किया गया। उन्होंने कहा कि कुछ माल कम माइक्रॉन का हो सकता है, लेकिन फैक्ट्री में काम नियमानुसार किया जा रहा है।

एक तरफ 680 किलो की जब्ती, दूसरी तरफ सिर्फ ₹15 हजार जुर्माना

नगर निगम ने कार्रवाई को अमानक पॉलीथिन के खिलाफ सख्ती के रूप में पेश किया है, लेकिन 680 किलो माल की जब्ती के मुकाबले महज 15 हजार रुपए का जुर्माना और फैक्ट्री को सील नहीं किए जाने ने कार्रवाई की सख्ती पर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं। अब निगाह निगम की अगली कार्रवाई पर है। क्या फैक्ट्री के लाइसेंस, उत्पादन अनुमति और पॉलीथिन के मानकों की विस्तृत जांच होगी? क्या दोबारा नियमों का उल्लंघन मिलने पर उत्पादन बंद कराया जाएगा? या मामला 680 किलो पॉलीथिन जब्त कर 15 हजार रुपए की रसीद काटने तक ही सीमित रह जाएगा?

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