बुरहानपुर। गणपति विसर्जन और चल समारोह के दौरान 25 और 26 सितंबर को शहर में वाहन लेकर निकल रहे हैं तो रोज का रास्ता देखकर आगे न बढ़ें। कहीं बैरिकेड मिलेगा, कहीं वाहन आगे नहीं जाने दिया जाएगा और कहीं पहुंचने तथा लौटने का रास्ता अलग होगा। शहर में उमड़ने वाली भीड़ और विसर्जन के लिए पहुंचने वाली गणेश प्रतिमाओं को देखते हुए पुलिस ने राजघाट से हतनूर तक यातायात व्यवस्था में बड़े बदलाव किए हैं।
सबसे अहम व्यवस्था राजघाट और हतनूर विसर्जन स्थलों की है। दोनों जगह वन-वे ट्रैफिक रहेगा। परकोटे के अंदर दो दिन भारी वाहनों की एंट्री पूरी तरह बंद रहेगी। इतना ही नहीं, इंदौर-खंडवा से इच्छापुर, खकनार और अमरावती की ओर जाने वाले बाहरी वाहनों को भी शहर के व्यस्त हिस्सों में आने के बजाय नए बाईपास से निकाला जाएगा। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है—25-26 सितंबर को कौन-सा रास्ता खुला रहेगा, कहां वाहन रोकना होगा और विसर्जन के बाद वापस शहर कैसे पहुंचेंगे?
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राजघाट जाना है? वाहन कारंज बाजार में छोड़ना होगा
25 सितंबर को राजघाट पर गणेश प्रतिमा विसर्जन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के दोपहिया और चारपहिया वाहनों की पार्किंग कारंज बाजार में निर्धारित रहेगी। मतलब, निजी वाहन लेकर आने वाले श्रद्धालु सड़क किनारे मनमर्जी से वाहन खड़ा नहीं कर सकेंगे। वाहन निर्धारित पार्किंग में ही लगाना होगा। इसका उद्देश्य राजघाट की ओर जाने वाले रास्ते पर वाहनों का दबाव कम करना है।
राजघाट पहुंचे तो वापसी उसी रास्ते से नहीं होगी
राजघाट के ट्रैफिक प्लान में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव वापसी के रास्ते का है। प्रतिमा विसर्जन के बाद राजघाट गेट से चकला तिराहा, बाईसाहब की हवेली और पांडुमल की ओर किसी भी छोटे-बड़े वाहन को नहीं जाने दिया जाएगा। यहां वन-वे व्यवस्था रहेगी। विसर्जन के बाद शहर लौटने वाले वाहनों को सीधे पुराने रास्ते पर आने के बजाय— राजघाट पुल → जैनाबाद → पुराना आरटीओ बैरियर → बड़ा ताप्ती पुल → शहर का रास्ता लेना होगा। यानी राजघाट से लौटने वालों को पहले जैनाबाद की ओर जाना पड़ेगा और फिर बड़ा ताप्ती पुल होते हुए शहर में प्रवेश मिलेगा।
चकला तिराहा से राजघाट की तरफ गाड़ी ले गए तो आगे रोक
प्रतिमा विसर्जन के दौरान चकला तिराहा और कारंज बाजार से राजघाट की ओर वाहनों की एंट्री प्रतिबंधित रहेगी। भीड़ बढ़ने पर इस पूरे हिस्से को जरूरत के मुताबिक नो-व्हीकल जोन बनाया जा सकेगा। इसी तरह जैनाबाद की तरफ से बड़े वाहन, लोडिंग वाहन और ट्रैक्टर-ट्रॉली राजघाट पुल की ओर नहीं आ सकेंगे। इसलिए राजघाट क्षेत्र में जाने वालों के लिए यह समझना जरूरी होगा कि श्रद्धालुओं की पैदल आवाजाही और विसर्जन वाहनों को प्राथमिकता देते हुए सामान्य वाहनों की आवाजाही सीमित रहेगी।
हतनूर में भी आने और जाने का रास्ता अलग
हतनूर घाट पर भी वन-वे व्यवस्था लागू रहेगी। प्रतिमा विसर्जन के बाद खाली ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को सीधे उसी मार्ग से वापस नहीं भेजा जाएगा। उन्हें— नाचनखेड़ा/भातखेड़ा → ग्राम नैर → हाईवे → बड़ा ताप्ती पुल → शहर के रास्ते वापस भेजा जाएगा। इससे विसर्जन के लिए हतनूर घाट की ओर जाने वाली प्रतिमाओं और लौट रही खाली ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को आमने-सामने आने से रोकने का प्रयास रहेगा।
हतनूर तिराहा-भातखेड़ा के बीच ट्रक-डंपर नहीं चलेंगे
हतनूर तिराहा से भातखेड़ा के बीच दोनों तरफ बड़े वाहन, ट्रक, डंपर और लोडिंग वाहनों का आवागमन प्रतिबंधित रहेगा। इस मार्ग पर विसर्जन के दौरान प्रतिमाओं और श्रद्धालुओं की आवाजाही को देखते हुए भारी वाहनों को रोकने की व्यवस्था की गई है।
प्रतिमाओं की कतार बढ़ी तो हाईवे के ट्रक कहां जाएंगे?
हतनूर घाट पर प्रतिमाओं की संख्या बढ़ने और लंबी कतार लगने की स्थिति के लिए भी पुलिस ने अलग प्लान बनाया है। जलगांव और रावेर की ओर से आने वाले भारी वाहनों को नवोदय विद्यालय, बहादरपुर रोड के होल्डिंग एरिया में रोका जाएगा। वहीं दूसरी दिशा में बुरहानपुर से जलगांव जाने वाले भारी वाहनों को रेणुका माता मंदिर के सामने दशहरा मैदान में रोका जाएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य हतनूर घाट की तरफ ट्रैफिक का दबाव बढ़ने पर भारी वाहनों को पहले ही रोकना है, ताकि विसर्जन मार्ग पर जाम की स्थिति न बने।
इंदौर-खंडवा से इच्छापुर जा रहे हैं? शहर के बजाय बाईपास पकड़ें
25-26 सितंबर को बाहरी मार्गों से गुजरने वाले वाहन भी ट्रैफिक प्लान से प्रभावित होंगे। इंदौर और खंडवा की ओर से इच्छापुर, खकनार और अमरावती जाने वाले वाहनों को बसाड़ फाटा → नया बाईपास मार्ग से निकाला जाएगा। वहीं इच्छापुर की ओर से इंदौर और खंडवा जाने वाले वाहन— कालू शाह बाबा की दरगाह → नया बाईपास → बसाड़ फाटा होते हुए आगे जा सकेंगे। इससे बाहरी वाहनों को विसर्जन से प्रभावित शहर के यातायात में प्रवेश करने से रोका जा सकेगा।
हतनूर पहुंचे तो तीन जगह मिलेगी पार्किंग
हतनूर विसर्जन स्थल पर श्रद्धालुओं के वाहनों के लिए तीन पार्किंग स्थल बनाए गए हैं। पुलिस ने साफ किया है कि वाहन इन्हीं निर्धारित पार्किंग स्थलों पर लगाए जाएं। सड़क किनारे वाहन खड़ा करने से रास्ता संकरा होने और विसर्जन वाहनों की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका रहेगी।
परकोटे में दो दिन भारी वाहनों की ‘नो एंट्री’
25 और 26 सितंबर को परकोटे के अंदर भारी वाहनों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। इसका सीधा मतलब है कि इन दो दिनों में शहर के अंदर भारी वाहनों की सामान्य आवाजाही नहीं हो सकेगी। उन्हें निर्धारित डायवर्शन और होल्डिंग व्यवस्था का पालन करना होगा।
भीड़ बढ़ी तो मौके पर भी बदल सकता है रूट
पुलिस का ट्रैफिक प्लान पहले से निर्धारित है, लेकिन यह अंतिम रूप से स्थिर व्यवस्था नहीं होगी। विसर्जन स्थलों पर भीड़, प्रतिमाओं की कतार और सड़कों पर यातायात की स्थिति को देखते हुए पुलिस अतिरिक्त डायवर्शन और नो-व्हीकल जोन लागू कर सकती है। इसलिए वाहन चालकों के लिए केवल निर्धारित रूट जानना ही पर्याप्त नहीं होगा। मौके पर तैनात यातायात पुलिस के निर्देश भी मानने होंगे।
25-26 सितंबर को इन क्षेत्रों में संभलकर निकलें
राजघाट, कारंज बाजार, चकला तिराहा, जैनाबाद, बड़ा ताप्ती पुल, हतनूर, भातखेड़ा, बहादरपुर रोड और परकोटा क्षेत्र में इन दो दिनों में यातायात का सबसे ज्यादा असर दिखाई देगा। गणपति विसर्जन के दौरान शहर और ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए प्रशासन पहले से सुरक्षा और यातायात प्रबंधन की तैयारियां कर रहा है।
इसलिए 25 और 26 सितंबर को घर से वाहन लेकर निकलने से पहले रास्ता जरूर समझ लें। रोज जिस सड़क से सीधे निकल जाते हैं, वहां इस बार बैरिकेड मिल सकता है; और राजघाट गए तो लौटने के लिए जैनाबाद और बड़ा ताप्ती पुल का रास्ता पकड़ना पड़ेगा।



