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खाद के स्टॉक में 20 टन से ज्यादा का अंतर, आखिर कहां गया खाद? अरिहंत फर्टिलाइजर्स को नोटिस

अमरावती रोड स्थित दुकान पर एसडीएम और कृषि विभाग की संयुक्त जांच में बड़ा खुलासा; 15 टन एनपीके 12-32-16 और अन्य खाद के 5 टन से ज्यादा स्टॉक का हिसाब नहीं मिला, कालाबाजारी की आशंका

बुरहानपुर। किसानों को मिलने वाले खाद के भंडारण और वितरण में बड़ी विसंगति सामने आई है। अमरावती रोड स्थित अरिहंत फर्टिलाइजर्स पर प्रशासन की जांच में ऑनलाइन रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक के बीच 20 टन से अधिक का अंतर मिला है। अकेले एनपीके 12-32-16 खाद में करीब 15 टन का हिसाब मेल नहीं खाया, जबकि एनपीके 10-26-26 सहित अन्य खाद में भी 5 टन से ज्यादा का अंतर पाया गया। इतनी बड़ी मात्रा में खाद का हिसाब नहीं मिलने से स्टॉक प्रबंधन और बिक्री प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कालाबाजारी की आशंका के बीच एसडीएम पल्लवी पौराणिक ने दुकानदार को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है।

ऑनलाइन रिकॉर्ड कुछ और, दुकान में खाद का स्टॉक कुछ और

Sadaiv News
अरिहंत फर्टिलाइजर्स में खाद के स्टॉक की जांच करते अधिकारी।

एसडीएम पल्लवी पौराणिक और कृषि विभाग की संयुक्त टीम ने अरिहंत फर्टिलाइजर्स पहुंचकर खाद के स्टॉक का भौतिक सत्यापन किया। इस दौरान पीओएस मशीन के ऑनलाइन रिकॉर्ड का मौके पर उपलब्ध खाद से मिलान किया गया। जांच में दोनों आंकड़ों में बड़ा अंतर सामने आया। नियमानुसार खाद की बिक्री पीओएस मशीन के माध्यम से दर्ज की जाती है, ताकि बिक्री और शेष स्टॉक का हिसाब पारदर्शी रहे। ऐसे में 20 टन से अधिक का अंतर सामने आना गंभीर जांच का विषय है। सवाल यह है कि रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में इतनी बड़ी विसंगति कैसे आई? क्या बिक्री की प्रविष्टियों में गड़बड़ी हुई या खाद के भंडारण और वितरण में अनियमितता बरती गई? इन सवालों का जवाब अब जांच से सामने आएगा।

15 टन एनपीके का अंतर, अन्य खाद का हिसाब भी नहीं मिला

जांच में सबसे बड़ा अंतर एनपीके 12-32-16 खाद के स्टॉक में मिला। ऑनलाइन रिकॉर्ड और भौतिक उपलब्धता के बीच करीब 15 टन की विसंगति दर्ज की गई। इसके अलावा एनपीके 10-26-26 सहित अन्य खाद में 5 टन से अधिक का अंतर पाया गया।

रबी सीजन में खाद का हिसाब गड़बड़ाना गंभीर सवाल

रबी सीजन में किसानों के लिए खाद की समय पर उपलब्धता महत्वपूर्ण है। ऐसे समय में किसी विक्रेता के ऑनलाइन रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में बड़ा अंतर मिलने से वितरण व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। पीओएस व्यवस्था का उद्देश्य खाद की बिक्री और उपलब्धता का सही रिकॉर्ड रखना है। यदि बिक्री की प्रविष्टियां और वास्तविक स्टॉक मेल नहीं खाते तो खाद की आवक, बिक्री और शेष मात्रा का सत्यापन जरूरी हो जाता है। अरिहंत फर्टिलाइजर्स में सामने आई विसंगति की वास्तविक वजह अब प्रशासनिक जांच और संबंधित दस्तावेजों के मिलान से स्पष्ट होगी।

दुकानदार से मांगा जवाब, अनियमितता साबित हुई तो कार्रवाई

एसडीएम पल्लवी पौराणिक ने स्टॉक में मिले अंतर को गंभीरता से लेते हुए दुकानदार को नोटिस जारी किया है। उससे ऑनलाइन रिकॉर्ड और वास्तविक उपलब्धता में विसंगति का स्पष्टीकरण मांगा गया है। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने अथवा जांच में नियमों का उल्लंघन प्रमाणित होने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि 20 टन से अधिक खाद के स्टॉक का हिसाब क्यों नहीं मिला। क्या यह रिकॉर्ड संधारण की लापरवाही है या वितरण व्यवस्था में कोई बड़ी गड़बड़ी? प्रशासन की आगामी जांच और दुकानदार के जवाब से इसकी स्थिति स्पष्ट होगी।

जांच में सामने आए प्रमुख तथ्य

  • करीब 15 टन: एनपीके 12-32-16 के स्टॉक में अंतर।
  • 5 टन से अधिक: एनपीके 10-26-26 सहित अन्य खाद में विसंगति।
  • 20 टन से अधिक: ऑनलाइन और भौतिक स्टॉक में कुल अंतर।
  • कार्रवाई: एसडीएम और कृषि विभाग की संयुक्त टीम ने किया सत्यापन।
  • अगला कदम: दुकानदार के स्पष्टीकरण के आधार पर जांच और नियमानुसार कार्रवाई।
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