बुरहानपुर। गांवों में वर्षों से जिस मकान और आवासीय भूखंड पर ग्रामीण रह रहे हैं, उसका वैधानिक दस्तावेज उपलब्ध कराने की दिशा में जिला प्रशासन ने अभियान तेज कर दिया है। स्वामित्व योजना के पंजीयन कार्य में तेजी लाने के लिए शनिवार को जिलेभर में अधिकारियों को मैदान में उतारा गया। सुबह 7:30 बजे कलेक्ट्रेट में ब्रीफिंग के बाद अधिकारी सीधे आवंटित पटवारी हल्कों में पहुंचे। राजस्व अमले के साथ पंजीयन की प्रगति जांची और लंबित कार्यों को गति देने में जुट गए। इस अभियान का असर यह रहा कि शाम 4 बजे तक जिले में 1653 रजिस्ट्रियां पूरी हो गईं। इसके साथ ही कुल पंजीयन का आंकड़ा 15,214 तक पहुंच गया।
अभियान की निगरानी के लिए कलेक्टर विवेक कुमार भी खुद मैदान में उतरे। उन्होंने ग्राम बिरोदा और बहादरपुर पहुंचकर पंजीयन कार्यों की जमीनी स्थिति देखी। बहादरपुर में अपने सामने हितग्राहियों का पंजीयन कराया और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि पात्र ग्रामीणों को स्वामित्व अभिलेख उपलब्ध कराने में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए।
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दफ्तरों से निकलकर गांवों में पहुंचे अफसर, पटवारी हल्कों में जांची प्रगति
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ग्रामीण आबादी क्षेत्रों के भूखंडधारियों को स्वामित्व अभिलेख उपलब्ध कराने पर जोर दे रही है। इसी के तहत कलेक्टर विवेक कुमार ने जिले में विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए।शनिवार सुबह 7:30 बजे कलेक्ट्रेट में विभिन्न विभागों के अधिकारियों की ब्रीफिंग हुई। इसके बाद अधिकारियों को अलग-अलग पटवारी हल्कों की जिम्मेदारी देकर रवाना किया गया। अधिकारियों ने संबंधित क्षेत्रों में पहुंचकर राजस्व अमले से पंजीयन की स्थिति जानी और प्रक्रिया को गति देने के लिए समन्वय किया। अभियान में केवल पटवारियों पर जिम्मेदारी नहीं छोड़ी गई। ग्राम पंचायत सचिवों और रोजगार सहायकों को भी सहयोग के लिए लगाया गया, ताकि स्थानीय स्तर पर पंजीयन कार्य में तेजी लाई जा सके।
कलेक्टर ने खुद संभाली निगरानी, बहादरपुर में सामने कराई रजिस्ट्री
विशेष अभियान की जमीनी स्थिति परखने के लिए कलेक्टर विवेक कुमार ग्राम बिरोदा और बहादरपुर पहुंचे। उन्होंने अधिकारियों और राजस्व कर्मचारियों से पंजीयन की प्रगति का ब्यौरा लिया। साथ ही प्रक्रिया में तेजी लाने और पात्र हितग्राहियों तक समय पर दस्तावेज पहुंचाने के निर्देश दिए। बहादरपुर में कलेक्टर ने अपनी मौजूदगी में हितग्राहियों की स्वामित्व पंजीयन प्रक्रिया पूरी कराई। इस दौरान उन्होंने ग्रामीणों को योजना के महत्व की जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि स्वामित्व अभिलेख ग्रामीण परिवारों के लिए उनकी आवासीय संपत्ति का महत्वपूर्ण कानूनी दस्तावेज है। इससे संपत्ति पर अधिकारों की स्पष्ट पहचान होगी और आवश्यकता पड़ने पर बैंक अथवा वित्तीय संस्थानों से ऋण प्राप्त करने में भी सुविधा मिल सकती है।
1653 रजिस्ट्रियां एक दिन में, कुल आंकड़ा 15 हजार के पार
शनिवार के विशेष अभियान में पंजीयन की रफ्तार बढ़ी। प्रशासन से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार शाम 4 बजे तक जिले में 1653 रजिस्ट्रियां पूरी की गईं। इसके साथ ही जिले में अब तक कुल 15,214 रजिस्ट्रियां पूर्ण हो चुकी हैं। यह आंकड़ा अभियान के दौरान अधिकारियों की मैदानी सक्रियता और राजस्व अमले के समन्वित प्रयासों को दर्शाता है। हालांकि जिले में कुल कितने पात्र भूखंडधारियों का पंजीयन शेष है, इसकी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है। ऐसे में अभियान की वास्तविक पूर्णता का आकलन शेष पात्र हितग्राहियों की संख्या सामने आने के बाद ही हो सकेगा।
मकान पर अधिकार का दस्तावेज, बैंक से कर्ज लेने में भी मिल सकती है सुविधा
ग्रामीण क्षेत्रों में कई परिवार लंबे समय से अपने आवासीय भूखंडों पर रह रहे हैं, लेकिन संपत्ति के वैधानिक दस्तावेजों का अभाव उनके लिए परेशानी का कारण बन सकता है। स्वामित्व योजना के तहत आबादी क्षेत्र के पात्र भूखंडधारियों को संपत्ति के अधिकार संबंधी अभिलेख उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसका एक महत्वपूर्ण पहलू आर्थिक सशक्तिकरण भी है। वैधानिक संपत्ति दस्तावेज होने से ग्रामीण नागरिकों को अपनी संपत्ति का प्रमाण प्रस्तुत करने में सुविधा मिलेगी। आवश्यकता पड़ने पर वे बैंक और वित्तीय संस्थानों में ऋण के लिए आवेदन भी कर सकेंगे। हालांकि ऋण मिलना बैंक की पात्रता, मूल्यांकन और अन्य शर्तों पर निर्भर करेगा।
पंजीयन की संख्या बढ़ी, अब दस्तावेज समय पर उपलब्ध कराना भी चुनौती
विशेष अभियान में एक दिन में 1653 रजिस्ट्रियां होना प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण प्रगति है। लेकिन योजना की सफलता केवल पंजीयन के आंकड़ों से तय नहीं होगी। असली उद्देश्य तब पूरा होगा, जब प्रत्येक पात्र ग्रामीण को उसकी आवासीय संपत्ति का सही और वैधानिक अभिलेख समय पर उपलब्ध हो जाएगा। इसके लिए पंजीयन के साथ अभिलेखों की शुद्धता, पात्रता का सत्यापन और हितग्राहियों तक दस्तावेज पहुंचाने की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण है। जिला प्रशासन ने अधिकारियों को इसी दिशा में काम करने के निर्देश दिए हैं। अब यह देखना होगा कि विशेष अभियान की रफ्तार आगे भी कितनी बनी रहती है और शेष पात्र ग्रामीण परिवारों को कब तक स्वामित्व अभिलेख उपलब्ध हो पाते हैं।
फैक्ट फाइल: स्वामित्व पंजीयन अभियान
- सुबह 7:30 बजे: कलेक्ट्रेट में अधिकारियों की ब्रीफिंग।
- मैदानी जिम्मेदारी: विभिन्न विभागों के अधिकारी, पटवारी, पंचायत सचिव और रोजगार सहायक।
- कलेक्टर का दौरा: बिरोदा और बहादरपुर।
- शनिवार शाम 4 बजे तक: 1653 रजिस्ट्रियां।
- जिले में अब तक: 15,214 रजिस्ट्रियां पूर्ण।
- मुख्य उद्देश्य: ग्रामीण आबादी क्षेत्र के पात्र भूखंडधारियों को वैधानिक स्वामित्व अभिलेख उपलब्ध कराना।
बड़ा सवाल: 15,214 रजिस्ट्रियां पूरी, लेकिन कितने ग्रामीणों का पंजीयन अभी बाकी?
जिले में स्वामित्व पंजीयन का आंकड़ा 15 हजार के पार पहुंच चुका है। हालांकि प्रशासन की ओर से कुल पात्र हितग्राहियों और शेष पंजीयन की संख्या स्पष्ट नहीं की गई है। ऐसे में यह जानना महत्वपूर्ण होगा कि जिले में कितने ग्रामीण परिवारों को अभी स्वामित्व अभिलेख मिलने बाकी हैं। विशेष अभियान के बाद अब प्रशासन के सामने पंजीयन की रफ्तार बनाए रखने के साथ प्रत्येक पात्र परिवार तक दस्तावेज पहुंचाने की जिम्मेदारी भी है।

