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श्री इच्छेश्वर हनुमान मंदिर-दरगाह ए हकीमी विवाद- सुप्रीम कोर्ट के वकील बोले, यथास्थिति बनाए रखने के हैं आदेश, मंदिर नहीं हटेगा

समिति के लोगों ने कहा, प्रशासन सुप्रीम कोर्ट के आदेश को नहीं समझ रहा, पूर्व की स्थिति बनाए रखने के आदेश के बाद भी लगाए बोर्ड बुरहानपुर। लोधीपुरा स्थित प्राचीन श्री इच्छेश्वर हनुमान मंदिर ट्रस्ट और दरगाह ए हकीमी के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा है। इस मामले में पिछले दिनों

On: December 24, 2023 8:17 PM
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  • समिति के लोगों ने कहा, प्रशासन सुप्रीम कोर्ट के आदेश को नहीं समझ रहा, पूर्व की स्थिति बनाए रखने के आदेश के बाद भी लगाए बोर्ड

बुरहानपुर। लोधीपुरा स्थित प्राचीन श्री इच्छेश्वर हनुमान मंदिर ट्रस्ट और दरगाह ए हकीमी के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा है। इस मामले में पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखने को कहा है। साथ ही यहां से मंदिर नहीं हटाने की बात कही है, लेकिन इसके बाद प्रशासन ने यहां बोर्ड लगा दिए। इसे लेकर मंदिर समिति सदस्यों का कहना है कि प्रशासन सुप्रीम कोर्ट के आदेश को नहीं समझ रहा है। पूर्व की तरह स्थिति यथावत रखने, पूजा अर्चना जारी रखने की बात कही गई है, लेकिन यहां हाईकोर्ट के बोर्ड लगा दिए गए।
इसे लेकर पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट हरिशंकर जैन वर्चुअली जुड़े थे और कहा था कि सुप्रीम कोर्ट ने स्थिति यथावत रखने को कहा है। मंदिर अपनी जगह से नहीं हटेगा और वहां पूजा, अर्चना भी की जा सकती है। इस आदेश का पालन करना होगा। जब तक सुप्रीम कोर्ट से कोई फैसला नहीं होता तब तक स्थिति यथावत रहेगी।
धारा 188 के तहत कार्रवाई किया जाना गलत
मंदिर समिति सदस्यों का कहना है कि प्रशासन द्वारा यहां पूजा, अर्चना के लिए जाने वाले लोगों पर धारा 188 के तहत कार्रवाई की जा रही है। पहले हाईकोर्ट जबलपुर ने 22 जून 2023 को आदेश किया था कि प्रशासन, समिति मंदिर हटाए, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे यथावत रखने को कहा है। अपने फैसल में कोर्ट ने एज ऑन टुडे लिखा है। इसका मतलब साफ है कि जो स्थिति वर्तमान में है उसे ही यथावत रखने को कहा गया है, लेकिन प्रशासन इसे समझ नहीं पा रहा है।
फैसला कानून के खिलाफ था – हरिशंकर जैन
इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट अधिवक्ता हरिशंकर जैन ने कहा- फैसला कानून के खिलाफ था। मैंने याचिका लगाई। इसके बाद पूजा, पाठ चालू रहने का आर्डर कोर्ट ने किया है। सरकारी जमीन पर कुछ दरगाह, मजारें बनी है। शासन, प्रशासन ने कुछ नहीं देखा। किस तरह जमीन पर कब्जा करने की कार्रवाई चल रही है। प्राचीन श्री हनुमान मंदिर पर उनकी नजर है। उच्च न्यायालय ने मामला गंभीरता से लिया है। सारी बात पर गौर करने के बाद आर्डर दिया गया है। शासन प्रशासन को सही कानून बताने वाला कोई नहीं है। अगर इसमें शासन प्रशासन समय रहते नहीं चेता तो हम कठोर न्यायिक प्रक्रिया करेंगे। कंटेम्ट की बात हुई तो वह भी करेंगे। अफसर अंग्रेजी, हिंदी पढ़े हुए हैं। यथास्थिति को पूजा पाठ न करने से जोड़ दिया गया जो कि गलत है। समय रहते कानून का पालन कर सही निर्णय लें। कानूनी राय लें। इसके बाद आगे बढ़ें।
सुप्रीम कोर्ट ने एज ऑन टुडे लिखा है
इधर, दरगाह ए हकीमी उप प्रबंधक मुस्तुफा उज्जैनवाला का कहना है कि मामला सर्वोच्च न्यायालय में चल रहा है। दरगाह ए हकीमी की ओर से अधिवक्ता शब्बीर रावलपिंडीवाला का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश में एज ऑन टुडे लिखा गया है यानी हाईकोर्ट ने जो निर्णय 22 जून 23 को दिया था उसे यथावत रखने को कहा गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है मंदिर की शिफ्टिंग नहीं होगी -कलेक्टर
इसे लेकर कलेक्टर भव्या मित्तल ने कहा- हाईकोर्ट का आर्डर कहता था कि वहां मंदिर की शिफिंटंग होनी है जिसके संदर्भ में वह सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर की शिफ्टिंग पर स्टे लगाया हुआ है। जो अंतरिम आर्डर आया है उसमें सुप्रीम कोर्ट ने स्टेटस को एज ऑन टुडे। इस संदर्भ में एक सिविल कोर्ट में भी एक प्रकरण चल रहा है। जिसमें इंटरपिटीशन पर चर्चा चल रही है। जब तक कोर्ट से कोई निर्णय नहीं होता तब तक किसी प्रकार की एक्टिविटी वहां नहीं होगी। पूजा अर्चना अभी वहां चल रही है वह लिमिटेड फार्मेट में वहां चलेगी। बैनर पोस्टर लगे थे उसे हटवाए हैं और सुप्रीम कोर्ट के आर्डर के बोर्ड प्रशासन ने भी वहां लगाए हैं।

 

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