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रसूख ऐसा- ट्रेड लायसेंस निरस्त होने के बाद भी संचालित होता रहा मेट्रो अस्पताल 

नियम के विपरीत संचालित हो रहा मेट्रो मेडिकेयर मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल अस्पताल में हादसे की आशंका, मॉल पर ही कार्रवाई कर रहा प्रशासन बुरहानपुर। शहर में संचालित मेट्रो मेडिकेयर मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल नियमों को ताक में रखकर संचालित किया जा रहा है, इसमें नगर निगम अफसरों की भूमिका भी संदेह के दायरे में है। दरअसल […]

बुरहानपुर। शहर में संचालित मेट्रो मेडिकेयर मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल नियमों को ताक में रखकर संचालित किया जा रहा है, इसमें नगर निगम अफसरों की भूमिका भी संदेह के दायरे में है। दरअसल शनवारा रोड स्थित इस अस्पताल का ट्रेड लायसेंस कोर्ट में केस चलने के कारण पहले ही निरस्त हो गया था, लेकिन इसके बाद भी निगम के अफसर रसूख के आगे बेबस नज़र आये, उन्होंने अब तक यहां कोई कार्रवाई नहीं की। जिला प्रशासन के अमले द्वारा मॉल आदि की चेकिंग की जा रही है, लेकिन जो अस्पताल नियम के विपरीत संचालित हो रहे हैं वहां अनदेखी की जा रही है।
खास बात यह है कि नगर निगम की ओर से 8 नवंबर 21 को ही मेट्रो अस्पताल की एनओसी निरस्त कर दी गई थी तब एक पत्र जारी किया गया था जिसमें नगर निगम सहायक आयुक्त की ओर से कहा गया था कि आपके द्वारा अस्पताल के लिए नर्सिंग होम का लायसेंस आवेदन साल 2020-21 के लिए किया गया था। 10 जुलाई 2020 को आवेदन किया गया था। आवेदन के आधार पर निकाय की ओर से लायसेंस जारी किया गया था। पूर्व में जारी किए गए वित्ती वर्ष 2020-21 के लायसेंस के आधार पर वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए लायसेंस नवीनीकरण करने के लिए 28 अप्रैल 21 को आवेदन प्रस्तुत करने पर निकाय द्वारा आपको लायसेंस जारी किया गया। जानकारी के अनुसार आपको प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन है। न्यायालय के अंतिम आदेश निर्णय तक इस निकाय द्वारा जारी लायसेंस तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाता है। इस संबंध में निकाय द्वारा सूचन पत्र देकर सूचित किया गया। इसके बाद भी तथ्यों को छिपाकर भ्रमित कर आनलाइन आवेदन कर लायसेंस ले लिया गया। इसलिए लायसेंस निरस्त किया जाता है।
नगर निगम की भूमिका सन्देह के घेरे में
पूरे मामले में नगर निगम की भूमिका सन्देह के घेरे में है, क्योंकि नगर निगम ने अब तक भी कार्रवाई नहीं कि जबकि निगम अफसरों के संज्ञान में आने के बाद पत्र जारी कर एनओसी निरस्त कर दी गई थी। मेट्रो अस्पताल किसी भी दिन हादसे का सबब बन सकता है, क्योंकि यहां से आने जाने के लिए सिर्फ एक ही रास्ता है। आग लगने की स्थिति में यह जानलेवा साबित हो सकता है। दिल्ली के बेबी केयर की तरह यहां भी बच्चों को रखा जाता है। आगे से 4.5-4.5 फिट जगह छोड़ने का नियम है। उसे भी फॉलो नहीं किया जा रहा है।
होटल के ऊपर संचालित हो रहा गुड़ अस्पताल, बन सकती है घातक स्थिति
अमरावती रोड पर गुड अस्पताल एक होटल के ऊपर संचालित हो रहा है। इसके पास भी एनओसी नहीं है। नगर निगम आयुक्त संदीप श्रीवास्तव ने भी माना कि नियमानुसार होटल के ऊपर अस्पताल संचालन ठीक नहीं। उन्होंने कार्रवाई के संकेत भी दिए हैं। वहीं इधर स्वास्थ्य विभाग भी अपनी जिम्मेदारी से बचता है। नियमानुसार स्वास्थ्य अफसरों को भी जांच करना चाहिए, लेकिन वह भी ऐसा नहीं करते।
यह है नियम
– 5 हजार वर्गफीट से अधिक का निर्माण करने पर अनुमति लेना जरूरी है। इसके लिए शर्तें, नियम लागू किए गए हैं उसे सभी को पालन करना जरूरी है। अनुमति के लिए राज्य सरकार ने एक सॉफ्टवेयर भी बनाया है। उसी में इंट्री की जाती है।
वर्जन-
एक टीम का गठन हुआ है जिसमें 8 अफसर शामिल हैं। कल एक मॉल को भी बंद कराया गया था। होटल के ऊपर संचालित अस्पताल की जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
-संदीप श्रीवास्तव, आयुक्त नगर निगम बुरहानपुर

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