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कुर्बानी से गौवंश और कृषि पशुओं की हत्या न हो – चिटनिस

ईद से पहले पूर्व मंत्री अर्चना चिटनिस ने उठाई मांग – गौवंश की रक्षा को लेकर कलेक्टर-एसपी को लिखा पत्र बुरहानपुर। बकरी ईद से पहले प्रदेश की राजनीति में बड़ा बयान सामने आया है। पूर्व मंत्री एवं विधायक अर्चना चिटनिस ने कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखकर जिले में गौवंश व कृषि उपयोगी पशुओं […]

  • ईद से पहले पूर्व मंत्री अर्चना चिटनिस ने उठाई मांग – गौवंश की रक्षा को लेकर कलेक्टर-एसपी को लिखा पत्र

बुरहानपुर। बकरी ईद से पहले प्रदेश की राजनीति में बड़ा बयान सामने आया है। पूर्व मंत्री एवं विधायक अर्चना चिटनिस ने कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखकर जिले में गौवंश व कृषि उपयोगी पशुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। चिटनिस ने चेताया कि यदि समय रहते प्रशासन ने सतर्कता नहीं बरती, तो गौवध, कृषि पशुओं की कुर्बानी और नदी में रक्त बहाव जैसी घटनाएं दोहराई जा सकती हैं।
पत्र के मुख्य बिंदु
Sadaiv News• ईद से पहले और बाद में गौवंश की गणना व वेरीफिकेशन की प्रक्रिया अपनाने की मांग
• गौवंश वध प्रतिषेध अधिनियम 2024, पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960, व पशु संरक्षण अधिनियम के पालन की अपील
• ताप्ती नदी में बहाए गए रक्त व अवशिष्ट को बताया “पर्यावरणीय खतरा”
• निकाय, राजस्व, पशुपालन, पुलिस और पंचायतों को सौंपे जाएं अलग-अलग ज़िम्मेदारियां
गौमाता के रक्त से नहीं होना चाहिए
विधायक अर्चना चिटनिस ने पत्र में लिखा– बकरी ईद एक पवित्र पर्व है, पर इस अवसर पर अगर कृषि उपयोगी पशुओं की हत्या कर दी जाए और रक्त नदी में बहाया जाए, तो यह समाज व पर्यावरण दोनों के लिए घातक होगा। ताप्ती के घाटों पर पहले भी ऐसी घटनाएं हुई हैं – नागझिरी से लेकर नेहरू नगर तक ताप्ती का पानी खून से लाल हो गया था।
त्योहार मनाइए, लेकिन क़ानून का पालन जरूरी
पूर्व मंत्री ने प्रशासन को सुझाव दिया कि पूर्व में की गई ‘सेंसस प्रक्रिया’ को फिर से अपनाया जाए, जिससे यह तय किया जा सके कि किसी निर्दोष या कृषि उपयोगी पशु की कुर्बानी न हो। उन्होंने यह भी जोड़ा कि स्थानीय प्रशासन, पुलिस, निकाय व पंचायतों को साझा जिम्मेदारी देकर इसे नियंत्रण में लाया जा सकता है।
स्थानीय जागरूकता और अवशिष्ट प्रबंधन पर भी दिया जोर
चिटनिस ने लिखा – त्योहार के बाद सड़कों पर बहते रक्त, अपशिष्ट और दुर्गंध की स्थिति महामारी फैला सकती है। प्रशासन को चाहिए कि वह अवशिष्ट प्रबंधन की ठोस व्यवस्था करे और ताप्ती नदी जैसे धार्मिक व पर्यावरणीय स्थलों की रक्षा करे।
क्यों अहम है ये मुद्दा?
• मध्यप्रदेश में लागू है गौवंश वध प्रतिबंध कानून
• कुर्बानी के नाम पर कृषि उपयोगी बैल, गाय व बछड़ों की हत्या पर है प्रतिबंध
• विगत वर्षों में अवैध कुर्बानी की घटनाएं सामने आती रही हैं
• धार्मिक सौहार्द व कानून के संतुलन की चुनौती

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