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आंदोलन के मूड में आदिवासी-कहा, 15 सालों से वनाधिकार के कईं दावे पेंडिंग

बाकड़ी सहित आसपास के क्षेत्रों से कलेक्ट्रेट पहुंचे, एक महीने में निराकरण नहीं होने पर करेंगे आंदोलन बुरहानपुर। पट्टे नहीं मिलने से नाराज आदिवासी अब आंदोलन के मूड में हैं। इसे लेकर वह मंगलवार को काफी संख्या में कलेक्ट्रेट में जमा हुए। आरोप है कि 15 साल में भी वनाधिकार दावों का निराकरण नहीं किया […]

  • बाकड़ी सहित आसपास के क्षेत्रों से कलेक्ट्रेट पहुंचे, एक महीने में निराकरण नहीं होने पर करेंगे आंदोलन

बुरहानपुर। पट्टे नहीं मिलने से नाराज आदिवासी अब आंदोलन के मूड में हैं। इसे लेकर वह मंगलवार को काफी संख्या में कलेक्ट्रेट में जमा हुए। आरोप है कि 15 साल में भी वनाधिकार दावों का निराकरण नहीं किया गया। अगर एक महीने में निराकरण नहीं हुआ तो आदिवासी समाजजन आंदोलन करेंगे।
बाकड़ी के रूम सिंग ने कहा-हमारे लोगों को वनाधिकार अधिनियम के तहत पट्टे नहीं मिले। जबकि अधिकांश लोग 2005 से पहले काबिज हैं। 2008 में नया कानून लागू हुआ, लेकिन अब तक वनाधिकार अधिनियम के तहत पट्टे नहीं मिले। 2009 से कईं आदिवासी समाजजन ने दावे जमा किए हैं। आज तक कईं साल निकल गए और उपखंड स्तरीय समिति, जिला स्तरीय समिति से जो लाभ मिलना था वह नहीं मिला। इसलिए आज ज्ञापन सौंपा है कि अगर एक महीने के अंदर पात्र, अपात्र की जानकारी नहीं मिली तो हम उग्र आंदोलन करेंगे। पात्र लोगों को अपात्र करते हैं राज्य निगरानी समिति में अपील करें। इस दौरान उन्होंने डिप्टी कलेक्टर अजमेरसिंग गौड़ को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में कहा गया कि वन भूमि पर 13 दिसंबर 2005 के पहले से काबिज दावेदारों को उनकी पात्रता के अनुसार आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत कर पट्टा देने का प्रावधान है, लेकिन बुरहानपुर जिले में इन नियमों को उल्लंघन हो रहा है।
दावों का किया सत्यापन किया जाना चाहिए
अधिकारी, कर्मचारी, पंचायत सचिव, वनाधिकार समिति के अध्यक्ष, सचिव की मौजूदगी में हितग्राहियों के सामने काबिज भूमि का सत्यापन किया जाना चाहिए, लेकिन कईं दावे अपात्र कर दिए गए हैं। वनाधिकार अधिनियम 2006 की धारा 6 तहत वनाधिकार समिति और ग्राम सभा द्वारा स्वीकृत प्रस्ताव पारित होने के बाद जिला स्तरीय समिति और उपखंड स्तरीय समिति को प्रस्ताव निरस्त करने का अधिकार नहीं है। पहले दावे, आपत्ति के लिए वन मित्र पोर्टल शुरू किया गया था, लेकिन बाद में उसे कुछ दिन हटाकर फिर शुरू किया गया था। इससे ऐसा लगता है कि शासन मंशा पट्टा आवंटन की नहीं है। प्रस्तुत दावों का भौतिक सत्यापन किया जाना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है।
बोले- धुलकोट को जनपद का दर्जा मिले
आदिवासी समाजजन ने मांग की कि वन ग्रामों को राजस्व ग्राम में शामिल किया जाए। धुलकोट को तहसील तो बना दिया गया है, लेकिन इसे जनपद का दर्जा दिया जाए। जिन दावेदारों ने पट्टे का आवेदन दिया है उन्हें पट्टे आवंटित किए जाएं। इस दौरान रतन सिंग, सिकदार सिंग, गुमान सिंग, राज कुमार सहित अन्य आदिवासी समाजजन मौजूद थे।

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