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थाना शिकारपुरा के खिलाफ हाईकोर्ट का अहम फैसला: किसान को मिली अग्रिम जमानत

किसान संतोष चंदनकर पर जबरन वसूली जैसे गंभीर अपराध में हुई थी एफआईआर दर्ज बुरहानपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण मामले में ग्राम खड़कोद के किसान संतोष चंदनकर को राहत देते हुए उनकी अग्रिम जमानत की याचिका मंजूर कर ली। मामला अवैध खनन और ब्लास्टिंग के खिलाफ किसान द्वारा की गई शिकायत पर उलटे […]

  • किसान संतोष चंदनकर पर जबरन वसूली जैसे गंभीर अपराध में हुई थी एफआईआर दर्ज

बुरहानपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण मामले में ग्राम खड़कोद के किसान संतोष चंदनकर को राहत देते हुए उनकी अग्रिम जमानत की याचिका मंजूर कर ली। मामला अवैध खनन और ब्लास्टिंग के खिलाफ किसान द्वारा की गई शिकायत पर उलटे उनके ही खिलाफ दर्ज गंभीर धाराओं की एफआईआर से जुड़ा है।
मामले की पृष्ठभूमि
किसान संतोष चंदनकर ने अपने खेत के पास हो रहे अवैध खनन और ब्लास्टिंग के खिलाफ कई बार प्रशासन को शिकायतें दी थीं। इन खनन गतिविधियों से उड़ते पत्थर उनके खेतों में गिर रहे थे, जिससे फसल को नुकसान हो रहा था। शिकायतों के बावजूद कलेक्टर बुरहानपुर द्वारा खनन ठेकेदार के खिलाफ कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। इसके विपरीत, रसूखदार खनन ठेकेदार द्वारा पुलिस थाना शिकारपुरा में शिकायत दर्ज कराई गई, जिसके आधार पर किसान संतोष चंदनकर पर जबरन वसूली जैसे गंभीर अपराध की धाराओं में एफआईआर दर्ज कर दी गई।
हाईकोर्ट का निर्णय
किसान संतोष चंदनकर के अधिवक्ता मनोज कुमार अग्रवाल ने बताया कि इस अनुचित एफआईआर के खिलाफ हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की गई थी। 13 नवंबर 2024 को मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद अग्रिम जमानत प्रदान करने का आदेश दिया। 18 नवंबर 2024 को यह आदेश सार्वजनिक हुआ, जिससे किसान को बड़ी राहत मिली।
अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी
अधिवक्ता मनोज कुमार अग्रवाल ने कहा कि अब किसान की ओर से कलेक्टर बुरहानपुर और अन्य संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सक्षम न्यायालय में कार्रवाई की जाएगी। ठेकेदार के अवैध खनन और ब्लास्टिंग को रोकने के लिए कानूनी लड़ाई तेज की जाएगी। अधिवक्ता मनोज कुमार अग्रवाल ने कहा कि यह मामला केवल एक किसान की नहीं बल्कि आम नागरिकों की सुरक्षा और अधिकारों से जुड़ा है। किसानों की फसलों और भूमि को अवैध खनन से बचाने के लिए प्रशासन की निष्क्रियता सवालों के घेरे में है। हाईकोर्ट का यह आदेश अन्य पीड़ित नागरिकों के लिए भी न्याय पाने का एक रास्ता दिखाता है।

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