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किसान संकट में- तरबूज को फल की बजाय सब्जी में रखा, मुआवजे से वंचित हो सकते हैं किसान

हजारों एकड़ की फसल खराब, मुआवजे की मांग को लेकर किसान आंदोलन की तैयारी में बुरहानपुर। जिले में इस बार तरबूज की फसल पर लीफ कर्ल वायरस के प्रकोप ने किसानों को भारी नुकसान पहुंचाया है। किसानों ने प्रशासन से मुआवजे की मांग की, लेकिन जब उन्हें पता चला कि तरबूज को फल

On: February 20, 2025 8:47 PM
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लीफ कर्ल वायरस से प्रभावित तरबूज की फसल
  • हजारों एकड़ की फसल खराब, मुआवजे की मांग को लेकर किसान आंदोलन की तैयारी में

बुरहानपुर। जिले में इस बार तरबूज की फसल पर लीफ कर्ल वायरस के प्रकोप ने किसानों को भारी नुकसान पहुंचाया है। किसानों ने प्रशासन से मुआवजे की मांग की, लेकिन जब उन्हें पता चला कि तरबूज को फल नहीं बल्कि सब्जी की श्रेणी में रखा गया है, तो उनकी चिंता और बढ़ गई। सरकारी नियमों के अनुसार फल उत्पादन में नुकसान होने पर किसानों को मुआवजा मिल सकता है, लेकिन सब्जी की फसल को यह लाभ नहीं मिलता।
किसानों का प्रतिनिधिमंडल पहुंचा कलेक्टर के पास
गुरुवार को प्रगतिशील किसान संगठन के एक प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर हर्ष सिंह से मुलाकात की। संगठन के संरक्षक शिवकुमार सिंह कुशवाह ने बताया कि जिले में तरबूज की फसल को बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है। लेकिन जब किसानों ने मुआवजे की मांग की तो प्रशासन ने कहा कि तरबूज को फल की बजाय सब्जी माना जाता है, इसलिए मुआवजा नहीं दिया जाएगा।
किसान सुनील महाजन ने कहा कि यह अन्यायपूर्ण निर्णय है, क्योंकि तरबूज एक फल की तरह ही उगाया और बेचा जाता है। वायरस का कोई इलाज नहीं है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है।
तरबूज फल है या सब्जी? क्या कहता है नियम?
भारत में कई राज्यों में तरबूज को फल के रूप में वर्गीकृत किया जाता है, लेकिन कुछ सरकारी नीतियों में इसे सब्जी माना गया है। इसके पीछे कारण यह है कि तरबूज का उत्पादन खेतों में अन्य सब्जियों की तरह किया जाता है और इसका उपयोग कई रूपों में किया जाता है।
हालांकि, किसान इस फैसले का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि तरबूज फल मंडियों में बेचा जाता है, न कि सब्जी मंडियों में। सरकार तरबूज उत्पादकों को फल किसानों की तरह सुविधाएं और लाभ नहीं देती। अगर सरकार तरबूज को सब्जी मान रही है, तो किसानों को सब्जी उत्पादन के तहत भी मुआवजा मिलना चाहिए।
हाईवे निर्माण से जुड़ी समस्याएं भी उठीं
किसानों ने इंदौर-इच्छापुर हाईवे निर्माण के दौरान हो रही समस्याओं को भी कलेक्टर के सामने रखा। कई किसानों के खेतों तक पहुंचने के रास्ते बंद हो गए हैं, जिससे वे लंबा चक्कर लगाकर जाना पड़ता है। महाराष्ट्र सीमा पर अतिक्रमण की वजह से भी किसान अपने खेतों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।
नेपानगर और खकनार क्षेत्र के किसान सबसे ज्यादा प्रभावित
नेपानगर और खकनार क्षेत्र के कई गांवों में लीफ कर्ल वायरस का प्रकोप सबसे ज्यादा देखा गया है।
• इस वायरस की वजह से तरबूज के पौधों की पत्तियां सिकुड़ जाती हैं और फल खराब हो जाते हैं।
• इस बार जिले में तरबूज की खेती करने वाले 70% से अधिक किसानों को भारी नुकसान हुआ है।
• कई किसानों ने कर्ज लेकर खेती की थी, लेकिन अब वे कर्ज चुकाने में असमर्थ हैं।
किसानों को उम्मीद, सरकार करेगी राहत की घोषणा
किसानों की परेशानी को देखते हुए जनप्रतिनिधियों ने भी मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मुआवजा दिलाने की मांग की है। कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र और उद्यानिकी विभाग की टीमों ने खेतों का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया है। लेकिन अभी तक सरकार की ओर से कोई स्पष्ट घोषणा नहीं हुई है कि किसानों को मुआवजा मिलेगा या नहीं।
कलेक्टर हर्ष सिंह ने किसानों को सर्वेक्षण करवाकर समस्या का समाधान निकालने का आश्वासन दिया है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन किसानों की मदद के लिए क्या कदम उठाता है और क्या सरकार तरबूज उत्पादकों को मुआवजा देकर राहत देगी?

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