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जिला अस्पताल में हड़कंप: दुष्कर्म का शिकार नाबालिग ने बच्ची को जन्म दिया, खिड़की से फेंका

– कचरे और प्लास्टिक की बोतलों पर गिरी नवजात, बच गई जान; पड़ोसी युवक गिरफ्तार, रेप की धाराओं में केस दर्ज

बुरहानपुर। जिला अस्पताल में नाबालिग लड़की ने बच्ची को जन्म दिया। बदनामी के डर से उसने नवजात का पहले गला दबाने का प्रयास किया। बाद में नवजात को पहली मंजिल के बाथरूम से ही नीचे फेंक दिया था। नीचे बड़ी संख्या में प्लास्टिक की बॉटलें, कचरा आदि होने से नवजात की जान बच गई। हालांकि उसके गले में चोंटें आई थी। डॉक्टरों ने उसका उपचार किया। वह ऑक्सीजन पर थी, लेकिन अब ऑक्सीजन हटा ली गई, वह रिकवर है।

दरअसल नेपानगर की रहने वाली नाबालिग को पेट में दर्द की शिकायत होने पर जिला अस्पताल के मेडिकल वार्ड में भर्ती कराया गया था। जहां बाथरूम वॉशरूम में चुपचाप से बेटी को जन्म दिया। डॉक्टरों के अनुसार करीब एक घंटे तक नाबालिग बाथरूम में थी। पूछने पर वह बार बार पेट दर्द की बात कहती रही। जब वह बाहर निकलकर आई उसे ब्लीडिंग हो रही थी अस्पताल में मौजूद टीम ने उसका उपचार शुरू किया। इसी बीच नवजात के मिलने की बात सामने आई। तब पता चला कि नाबालिग ने ही बच्चे को जन्म दिया। सूचना मिलने पर लालबाग थाना पुलिस मौके पर पहुंची।

आरोपी को गिरफ्तार कर दुष्कर्म का केस दर्ज किया

इसे लेकर नेपानगर थाना प्रभारी ज्ञानू जायसवाल ने कहा आरोपी युवक को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ दुष्कर्म का केस दर्ज किया गया है। नाबालिग के पेट में दर्द था तब वह बुरहानपुर जिला अस्पताल में भर्ती हुई थी। वहां उसकी डिलीवरी हुई। इस मामले में लालबाग थाना पुलिस ने जीरो पर कायमी कर केस यहां भेजा। हमने इसकी जांच कर आरोपी युवक को पकड़कर उसके खिलाफ केस बनाया। उससे पूछताछ की गई है। आरोपी को न्यायालय में पेश किया जाएगा। जांच के बाद आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।

बाल कल्याण समिति ने स्वतः संज्ञान लिया

सोमवार को जिला अस्पताल पहुंचकर बाल कल्याण समिति की टीम ने मामले का स्वतः संज्ञान लिया। टीम नाबालिग और उसके नवजात की स्थिति जानी। बाल कल्याण समिति अध्यक्ष विजया सिंह चौहान ने कहा- बच्ची की हालत कैसी है। किस परिस्थिति में है यह जानने के लिए यहां आए हैं। उन्होंने कहा बड़ी विषम परिस्थिति है कि नवरात्र का समय चल रहा है। माता की, देवी की पूजा करते हैं। बच्चियों को पूजा जाता है, लेकिन इस तरह की घटना से समाज में गलत मैसेज जाता है। हम मेडिकल स्टेट्स देख रहे है। मानसिक स्थिति पता कर रहे। इसके बाद परिजन से संपर्क कर आगे निर्णय लेंगे। इस दौरान महिला सेल डीएसपी प्रीतम सिंह ठाकुर, बाल कल्याण समिति सदस्य संदीप शर्मा, मेघा भिड़े आदि मौजूद थे।

आरएमओ बोले- ऑक्सीजन पर है बेटी, अब दूध भी पी रही

जिला अस्पताल के आरएमओ डॉ. भूपेंद्र गौर के अनुसार बच्ची को ऑक्सीजन पर रखा गया था। ऑक्सीजन हटा ली गई। अब वह दूध भी पी रही है। शॉक से भी रिकवर हो चुकी है। गर्दन में कट लगा था उसका उपचार चल रहा है। मां भी स्वस्थ्य है। कल सुबह 9.30 बजे का मामला है। 16 से 17 साल की लड़की को नेपानगर से पेट दर्द होने पर यहां रेफर किया गया था। ड्यूटी डॉक्टर ने उसे देखा सोनोग्राफी कराने एडवाइज की। पेट में ज्यादा दर्द हुआ तब वह बाथरूम में एक घंटे तक बंद रही। सिस्टर, आया ने देखा कि पेशेंट बेड पर नहीं थी, लेकिन वह बाथरूम में थी। बाहर निकलकर उसने कहा उसकी पेट दर्द की समस्या और बढ़ गई। गॉयनी चेकअप के लिए भेजा गया, लेकिन ब्लीडिंग अधिक हो रही है थी। इसी बीच पीछे से बच्चे की आवाज आ रही थी। डॉक्टर को सूचना दी। टॉयलेट के नीचे स्पेस था जहां प्लास्टिक की बॉटलें आदि के पास बच्चा पड़ा था। उसे एसएनसीयू में भर्ती कराया। उसकी हालत गंभीर थी। गर्दन पर घाव था। ट्रीटमेंट कर एसएनसीयू में ऑक्सीजन पर है, लेकिन गंभीरता कम हुई है। 9 माह पूरे हो गए थे तब बच्चे का जन्म हुआ।

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