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लोकायुक्त के बाद स्वास्थ्य विभाग का शिकंजा, सिविल सर्जन को दूसरा कारण बताओ नोटिस

सार्थक एप में बांड डॉक्टरों की आईडी न बनाने पर दो वेतनवृद्धि रोकने की चेतावनी

On: December 31, 2025 9:07 PM
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अभियोजन के बाद सिविल सर्जन को दूसरा नोटिस, सार्थक एप गड़बड़ी पर कार्रवाई

बुरहानपुर। जिला अस्पताल के सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक पर शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। लोकायुक्त की मांग पर मध्यप्रदेश शासन द्वारा अभियोजन की अनुमति मिलने के बाद अब स्वास्थ्य विभाग ने भी मोर्चा खोल दिया है। वरिष्ठ संयुक्त संचालक, शिकायत संचालनालय (लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग) ने सिविल सर्जन डॉ. प्रदीप मोजेस को गंभीर कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है।

यह नोटिस बांड पर नियुक्त डॉक्टरों की ‘सार्थक एप’ आईडी जानबूझकर या लापरवाही से क्रिएट न करने के मामले में जारी किया गया है। विभागीय जांच में पाया गया कि जिला अस्पताल में पदस्थ बंधपत्र चिकित्सकों को कार्यकाल के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) तो जारी कर दिए गए, लेकिन उनकी सार्थक एप पर उपस्थिति दर्ज कराने की व्यवस्था ही नहीं बनाई गई।

डॉ. छोटू सिंह की हाजिरी सिस्टम से बाहर

नोटिस में विशेष रूप से उल्लेख है कि डॉ. छोटू सिंह (यूजी), जिला अस्पताल बुरहानपुर की सार्थक एप में आईडी नहीं बनाई गई, जिससे उनकी उपस्थिति दर्ज ही नहीं हो सकी। यह सीधे तौर पर शासन के आदेशों की अवहेलना मानी गई है।

कदाचार की श्रेणी में लापरवाही

शिकायत संचालनालय ने सिविल सर्जन डॉ. प्रदीप मोजेस के इस कृत्य को कदाचार की श्रेणी में रखा है। नोटिस में कहा गया है कि आदेशों का पालन न कर सिविल सर्जन ने स्वयं को अनुशासनात्मक कार्रवाई का भागी बना लिया है।

15 दिन में जवाब या दो वेतनवृद्धि रुकेगी

सिविल सर्जन को डॉ. प्रदीप मोजेस 15 दिन के भीतर जवाब प्रस्तुत करने का अल्टीमेटम दिया गया है। यदि स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाया गया तो उनके खिलाफ एकपक्षीय कार्रवाई करते हुए दो वेतनवृद्धि असंचयी प्रभाव से रोक दी जाएंगी।

लोकायुक्त के बाद विभागीय मोर्चा

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही सिविल सर्जन डॉ. मोजेस के खिलाफ लोकायुक्त मामले में अभियोजन की अनुमति राज्य सरकार दे चुकी है। अब विभागीय कार्रवाई शुरू होने से यह साफ है कि प्रशासनिक स्तर पर भी उनके खिलाफ गंभीर रुख अपनाया जा रहा है।

जिला अस्पताल पर उठ रहे हैं सवाल

जिला अस्पताल पहले ही खरीद घोटाले, प्रशासनिक अनियमितताओं और वित्तीय गड़बड़ियों को लेकर चर्चा में है। अब बांड डॉक्टरों की उपस्थिति तक को सिस्टम से बाहर रखने का मामला सामने आना, पूरे अस्पताल प्रबंधन की कार्यशैली पर बड़ा सवाल बन गया है। अब यह देखना अहम होगा कि सिविल सर्जन अपने बचाव में क्या जवाब देते हैं, या फिर यह मामला उनके लिए और बड़ी मुश्किलें खड़ी करेगा।

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