बुरहानपुर। कक्षा 12वीं की परीक्षा, भविष्य से जुड़ी उम्मीदें और परिणाम में केवल 15 अंक। छात्र ने मेहनत पर भरोसा कर पूरक परीक्षा दी, लेकिन परिणाम में फिर वही 15 अंक दर्ज मिले। जब संदेह दूर करने के लिए उत्तरपुस्तिका की फोटो कॉपी मंगाई तो एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया—बोर्ड से भेजी गई उत्तरपुस्तिका कथित रूप से छात्र की थी ही नहीं। अंग्रेजी माध्यम से परीक्षा देने वाले विद्यार्थी को हिंदी माध्यम में लिखी किसी दूसरे परीक्षार्थी की कॉपी भेज दी गई।
यह मामला ग्राम बादखेड़ा निवासी छात्र दुर्गेश महाजन से जुड़ा है। दुर्गेश ने एमपी बोर्ड की कक्षा 12वीं की भौतिक विज्ञान विषय की परीक्षा अंग्रेजी माध्यम से दी थी। परीक्षा परिणाम जारी हुआ तो उसे मात्र 15 अंक मिले और वह विषय में अनुत्तीर्ण घोषित कर दिया गया। छात्र को अपने प्रदर्शन के अनुरूप अंक नहीं मिलने का संदेह था, लेकिन उसने निराश होने के बजाय पूरक परीक्षा देकर दोबारा प्रयास किया।
दो परीक्षाएं, दोनों में ठीक 15 अंक… यहीं से बढ़ा संदेह
पूरक परीक्षा का परिणाम सामने आया तो दुर्गेश को उसमें भी ठीक 15 अंक ही मिले। मुख्य परीक्षा और पूरक परीक्षा में समान अंक मिलने से छात्र और परिवार की शंका गहरा गई। सवाल उठा कि क्या दोनों परीक्षाओं में उसका प्रदर्शन वास्तव में एक जैसा रहा या मूल्यांकन प्रक्रिया में कोई त्रुटि हुई? इसी संदेह को दूर करने के लिए दुर्गेश ने निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपनी उत्तरपुस्तिका की फोटो कॉपी प्राप्त करने के लिए आवेदन किया। छात्र के अनुसार आवेदन में रोल नंबर सहित सभी जानकारियां सही दर्ज की गई थीं। परिवार को उम्मीद थी कि कॉपी मिलने के बाद स्थिति साफ हो जाएगी, लेकिन उत्तरपुस्तिका देखकर वे हैरान रह गए।
अंग्रेजी माध्यम का छात्र, कॉपी हिंदी माध्यम की
दुर्गेश का दावा है कि बोर्ड द्वारा उपलब्ध कराई गई उत्तरपुस्तिका हिंदी माध्यम में लिखी गई है, जबकि उसने भौतिक विज्ञान की परीक्षा अंग्रेजी माध्यम से दी थी। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि बोर्ड ने उसे किस परीक्षार्थी की कॉपी भेज दी और उसकी वास्तविक उत्तरपुस्तिका वर्तमान में कहां है? यदि छात्र का दावा सही है तो यह केवल कॉपी भेजने की सामान्य चूक नहीं, बल्कि उत्तरपुस्तिकाओं की स्कैनिंग, रिकॉर्ड संधारण और परीक्षार्थी से मिलान की पूरी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। क्या जांचे गए अंक दुर्गेश की वास्तविक कॉपी के ही हैं? क्या रिकॉर्ड में किसी अन्य छात्र की उत्तरपुस्तिका उससे जोड़ दी गई? या केवल फोटो कॉपी भेजने के दौरान गड़बड़ी हुई? इन सवालों का जवाब निष्पक्ष जांच के बाद ही सामने आ सकेगा।
एक गलती से दांव पर लग सकता है छात्र का भविष्य
कक्षा 12वीं का परिणाम विद्यार्थी की आगे की पढ़ाई, प्रवेश और करियर की दिशा तय करता है। ऐसे में उत्तरपुस्तिका से जुड़ी छोटी-सी प्रशासनिक चूक भी छात्र का पूरा शैक्षणिक वर्ष प्रभावित कर सकती है। दुर्गेश और उसके परिवार का कहना है कि उन्होंने प्रक्रिया के अनुसार आवेदन किया, फिर भी सही उत्तरपुस्तिका उपलब्ध नहीं कराई गई। परिवार ने मांग की है कि छात्र की वास्तविक उत्तरपुस्तिका तत्काल खोजकर उपलब्ध कराई जाए, उसके मूल्यांकन की निष्पक्ष जांच हो और आवश्यकता पड़ने पर दोबारा मूल्यांकन कर न्यायपूर्ण अंक प्रदान किए जाएं।
पारदर्शिता पर सवाल—छात्र भरोसा करे तो किस पर?
शिक्षा क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि उत्तरपुस्तिका की फोटो कॉपी उपलब्ध कराने की व्यवस्था इसलिए बनाई गई है, ताकि विद्यार्थी अपने मूल्यांकन को देख सके और परीक्षा प्रणाली में उसका भरोसा बना रहे। लेकिन जब उसे अपनी जगह किसी दूसरे परीक्षार्थी की कॉपी मिले तो पारदर्शिता की पूरी प्रक्रिया ही सवालों के घेरे में आ जाती है। अब दुर्गेश के सामने केवल अंकों का प्रश्न नहीं है। वह यह जानना चाहता है कि उसकी वास्तविक कॉपी कहां है, उसे दोनों परीक्षाओं में समान अंक कैसे मिले और बोर्ड की ओर से भेजी गई उत्तरपुस्तिका किसी दूसरे छात्र की क्यों निकली।
फिलहाल मामले में एमपी बोर्ड या शिक्षा विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है। विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि गड़बड़ी मूल्यांकन में हुई, रिकॉर्ड प्रबंधन में या उत्तरपुस्तिका भेजने की प्रक्रिया में। लेकिन एक छात्र के भविष्य से जुड़े इस मामले ने बोर्ड की कार्यप्रणाली पर बड़ा प्रश्नचिह्न जरूर लगा दिया है।



