बुरहानपुर। नई पेंशन योजना (NPS) के विरोध में बुधवार को जिले में संयुक्त मोर्चा ने “काला दिवस” मनाकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। कर्मचारियों ने कार्यस्थलों पर काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराया और इसे अपने भविष्य के साथ “अन्याय” बताया।
प्रदेश अध्यक्ष एवं नेशनल मूवमेंट ऑफ ओल्ड पेंशन स्कीम के प्रांतीय संयोजक ठाकुर संतोष सिंह दीक्षित ने तीखे शब्दों में कहा कि NPS कर्मचारियों के लिए “अभिशाप” बन चुकी है। उन्होंने मांग की कि सेवानिवृत्ति के अंतिम महीने का आधा वेतन महंगाई भत्ते सहित पेंशन के रूप में दिया जाए, ताकि कर्मचारी सम्मानजनक जीवन जी सकें।
सरकार के वादे निकले खोखले
श्री दीक्षित ने कहा कि जब NPS लागू की गई थी, तब बड़े-बड़े सपने दिखाए गए थे—लाखों-करोड़ों के लाभ के दावे किए गए। लेकिन हकीकत में जब कर्मचारी रिटायर हुए, तो उन्हें केवल ₹600 से ₹2500 तक की पेंशन मिल रही है। संयुक्त मोर्चा ने कहा इतनी राशि में तो महीने भर का दूध भी नहीं आ सकता… फिर बुजुर्ग अपना जीवन कैसे चलाएंगे?
अपना ही पैसा, पेंशन बनकर वापस
कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि NPS में 60% राशि वापस कर दी जाती है, जबकि 40% राशि बाजार आधारित निवेश में रोक दी जाती है। उसी निवेश से मिलने वाला पैसा ही पेंशन कहलाता है। सवाल उठाया गया — जब पैसा हमारा ही है, तो सरकार का योगदान क्या?
बुढ़ापे की चिंता बनी सबसे बड़ा मुद्दा
संयुक्त मोर्चा के संतोष सिंह दीक्षित ने कहा कि रिटायरमेंट के बाद बीमारियों और खर्चों का बोझ बढ़ जाता है, ऐसे में इतनी कम पेंशन में जीवन यापन असंभव है। परिवार व्यवस्था के बदलते स्वरूप पर भी चिंता जताई गई— आज के दौर में बेटे-बहू खुद संघर्ष कर रहे हैं, ऐसे में बुजुर्गों का सहारा कौन बनेगा?
ये कर्मचारी रहे मुखर
विरोध में कई कर्मचारी नेता और सदस्य शामिल रहे, जिनमें डॉ. अशफाक खान, धर्मेंद्र चौकसे, अनिल बाविस्कर, बृजेश राठौर, राजेश साल्वे, राजेश पाटील, सतीश दामोदर, अनिल सातोने, रहमान मोहम्मद फहीम, श्रीमती प्रमिला सागरे, कल्पना पवार, ज्योति पाटील, साधना पटेल सहित अन्य शामिल रहे।
काली पट्टी, कड़ा संदेश
संयुक्त मोर्चा ने सभी शिक्षक, कर्मचारी और अधिकारियों से अपील की कि वे कार्यस्थल पर काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज करें। NPS में संशोधन या पुरानी पेंशन योजना लागू करने की मांग को मजबूत करें।
सरकार के लिए चेतावनी
संयुक्त मोर्चा ने साफ कहा— यदि सरकार ने जल्द ही NPS में संशोधन नहीं किया, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। हमें सम्मानजनक बुढ़ापा चाहिए… नहीं तो यह व्यवस्था बदलनी ही होगी।