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जंगल से गांव तक खतरा! पानी की तलाश में भटक रहे बाघ-तेंदुए, वन विभाग की अलर्ट एडवाइजरी

- अकेले जंगल जाना खतरनाक, 7 साल की सजा का प्रावधान; मेलघाट कनेक्शन से बुरहानपुर में बढ़ी हलचल

बुरहानपुर। भीषण गर्मी के साथ जंगलों का संतुलन बिगड़ने लगा है और इसका सीधा असर अब गांवों तक दिखने लगा है। पानी की तलाश में बाघ, तेंदुआ और भालू जैसे वन्यजीव जंगलों से निकलकर आबादी की ओर रुख कर रहे हैं। हालात को गंभीर मानते हुए वन विभाग ने सख्त एडवाइजरी जारी कर आमजन को चेताया है जंगल में जरा सी लापरवाही, जान पर भारी पड़ सकती है।

प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) डॉ. समीता राजौरा ने साफ कहा है कि महुआ, तेंदूपत्ता और अन्य लघु वनोपज के संग्रहण के दौरान ग्रामीणों का वन्यजीवों से आमना-सामना बढ़ रहा है। ऐसे में चोटिल होने या जनहानि की घटनाओं की आशंका भी बढ़ गई है। वन समितियों को अलर्ट करते हुए ग्रामीणों को जागरूक करने के निर्देश दिए गए हैं।

जंगल जाने वालों के लिए ‘रेड अलर्ट’ गाइडलाइन

वन विभाग ने साफ निर्देश जारी किए हैं—

  • अकेले जंगल में प्रवेश बिल्कुल न करें, समूह में ही जाएं
  • डंडा, मोबाइल, टॉर्च और पानी साथ रखें
  • सुबह-शाम के समय विशेष सतर्क रहें, यही वन्यजीवों की सक्रियता का समय है
  • अंधेरे में जंगल में प्रवेश पूरी तरह वर्जित
  • बच्चों को जंगल जाने से रोकें
  • महुआ पेड़ों के नीचे बीड़ी-सिगरेट या आग जलाने पर सख्त रोक
  • बीट गार्ड व वन अमला ग्रामीणों के साथ मौजूद रहे
अवैध शिकार-व्यापार पर ‘जीरो टॉलरेंस’

एडवाइजरी में साफ चेतावनी—वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत बाघ, तेंदुआ, कछुआ, पक्षी या अन्य जीवों का शिकार, खरीद-फरोख्त, पालन या परिवहन करना गंभीर अपराध है। ऐसे मामलों में 7 साल तक की जेल और भारी जुर्माना तय है। वन विभाग को जानकारी मिली है कि कुछ पेट शॉप्स और एक्वेरियम दुकानों में प्रतिबंधित जीवों की अवैध बिक्री हो रही है। ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। आमजन से अपील है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत टोल फ्री 0755-2524000 पर दें।

बुरहानपुर ‘हॉटस्पॉट’ क्यों बन रहा?

बुरहानपुर की भौगोलिक स्थिति इसे संवेदनशील बनाती है। जिले की सीमा सीधे महाराष्ट्र के मेलघाट टाइगर रिजर्व से जुड़ी है, जिससे वन्यजीवों की आवाजाही यहां आम बात है। हाल ही में खकनार रेंज में बाघिन की मौत और पहले भी बाघ की मौत के मामलों ने इस खतरे को और गंभीर बना दिया है।

अधिकारी बोले—‘जागरूकता ही सुरक्षा’

एसडीओ वन अजय सागर ने बताया कि वन्यजीवों के संरक्षण और लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एडवाइजरी जारी की गई है। वन समितियों के माध्यम से गांव-गांव में जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।

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