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स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खुली: शाहपुर से रेफर प्रसूता की रास्ते में डिलीवरी, परिजनों का फूटा गुस्सा

- विधायक अर्चना चिटनीस के निरीक्षण के बाद भी नहीं सुधरे हालात, शाहपुर स्वास्थ्य केंद्र फिर विवादों में

बुरहानपुर। जिले की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की कमजोर कड़ी एक बार फिर सामने आ गई। शाहपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में स्टाफ की कमी और व्यवस्थाओं की बदहाली के बीच प्रसव पीड़ा से जूझ रही महिला को जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया, लेकिन रास्ते में ही उसकी डिलीवरी हो गई। इसके बाद परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। प्रसूता के पति ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाते हुए सीबीएमओ डॉ. अरुण कुमार सिंह को जमकर खरी-खोटी सुनाई।

Sadaiv Newsग्राम दापोरा निवासी प्रसूता को परिजन प्रसव पीड़ा होने पर शाहपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे थे। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में पर्याप्त डॉक्टर और स्टाफ मौजूद नहीं था। मरीज की स्थिति को समय पर गंभीरता से नहीं लिया गया। बाद में प्रसूता को जिला अस्पताल रेफर किया गया, लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही रास्ते में प्रसव हो गया। घटना के बाद महिला को वापस शाहपुर स्वास्थ्य केंद्र लाया गया, जहां भी परिजनों के अनुसार करीब एक घंटे तक उपचार नहीं मिल सका।

प्रसूता के पति ने आरोप लगाया कि शाहपुर स्वास्थ्य केंद्र में व्यवस्था नाम की कोई चीज नहीं है। उन्होंने कहा कि अस्पताल में न डॉक्टर समय पर मिले, न स्टाफ ने गंभीरता दिखाई। हालत यह रही कि सीबीएमओ का चेंबर भी उनके आने के बाद खोला गया। इस दौरान स्वास्थ्य केंद्र परिसर में काफी देर तक बहसबाजी होती रही और परिजनों ने अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।

स्टाफ की कमी स्वीकार, लापरवाही से इनकार

मामले पर सीबीएमओ डॉ. अरुण कुमार सिंह ने कहा कि महिला की डिलीवरी रास्ते में हुई थी। उसे जिला अस्पताल रेफर किया गया था, जिसके बाद परिजन वापस स्वास्थ्य केंद्र लेकर आए। उन्होंने लापरवाही से इनकार किया, लेकिन यह जरूर स्वीकार किया कि अस्पताल में स्टाफ की कमी है। उन्होंने कहा कि स्टाफ की कमी को लेकर उच्च अधिकारियों को पत्र लिखा गया है। साथ ही बताया कि वे शाहपुर में नए हैं और आज ही यहां आए हैं।

सीबीएमओ का यह बयान अपने आप में बड़ा सवाल खड़ा करता है। जब स्वास्थ्य केंद्र में स्टाफ की कमी है और यह बात जिम्मेदार अधिकारी स्वयं स्वीकार रहे हैं, तो फिर प्रसव जैसी आपात स्थिति में मरीजों को सुरक्षित स्वास्थ्य सेवा कैसे मिलेगी।

विधायक के निरीक्षण के बाद भी नहीं सुधरी व्यवस्था

कुछ दिन पहले ही बुरहानपुर विधायक अर्चना चिटनिस ने शाहपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान उन्होंने यहां की व्यवस्थाओं को लेकर नाराजगी जताई थी और सुधार के स्पष्ट निर्देश दिए थे। उन्होंने मरीजों के साथ बेहतर व्यवहार और समय पर इलाज सुनिश्चित करने की बात कही थी। इसके बावजूद प्रसूता को समय पर समुचित सुविधा नहीं मिलना बताता है कि निर्देशों का असर जमीन पर नहीं दिख रहा।

सवाल यह भी है कि जब स्वास्थ्य केंद्र में संसाधन और सुविधाएं मौजूद हैं, तब भी प्रसूता को जिला अस्पताल क्यों रेफर किया गया। ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले मरीज पहले ही दूरी, आर्थिक संकट और समय की परेशानी झेलते हैं। ऐसे में आपात स्थिति में रेफर की मजबूरी कई बार जान जोखिम में डाल सकती है।

जिला अस्पताल में राहत की तस्वीर: सी-आर्म मशीन से दो सफल ऑपरेशन

शाहपुर स्वास्थ्य केंद्र की बदहाल व्यवस्था के बीच जिला अस्पताल से राहत देने वाली खबर सामने आई है। बुरहानपुर जिला अस्पताल के हड्डी रोग विभाग को अत्याधुनिक सी-आर्म मशीन मिली है। इस मशीन की मदद से गुरुवार को दो मरीजों के सफल ऑपरेशन किए गए।

Sadaiv Newsसिविल सर्जन डॉ. दर्पण टोके ने बताया कि शासन की ओर से उपलब्ध कराई गई सी-आर्म मशीन से उपचार प्रारंभ कर दिया गया है। हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. शरद पवार द्वारा 70 वर्षीय शमा बाई और 80 वर्षीय रेवत बाई का फ्रैक्चर डिस्टल रेडियस ऑपरेशन सफलतापूर्वक किया गया। दोनों मरीजों की स्थिति सामान्य बताई गई है। इस सर्जरी में डॉ. शरद पवार के साथ डॉ. अभिषेक पटेल, डॉ. हेमराज और एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. रौनक जैन का विशेष सहयोग रहा।

अब जटिल फ्रैक्चर का इलाज जिले में ही संभव

सी-आर्म मशीन की सुविधा शुरू होने से दुर्घटनाओं में टूटी हड्डियों, कूल्हे, कमर और जटिल फ्रैक्चर के मरीजों का इलाज अब बुरहानपुर जिला अस्पताल में ही संभव हो सकेगा। पहले ऐसे मरीजों को बड़े निजी अस्पतालों या अन्य शहरों में रेफर करना पड़ता था, जिससे मरीजों और परिजनों पर आर्थिक बोझ बढ़ता था। जिला अस्पताल में यह सुविधा शुरू होना जिले की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। खासकर गरीब और मध्यमवर्गीय मरीजों को इससे बड़ी राहत मिलेगी।

रेफर संस्कृति पर रोक लगाने की जरूरत

पिछले दिनों विधायक अर्चना चिटनिस ने कलेक्ट्रेट में बैठक लेकर मरीजों को अनावश्यक रेफर करने से बचने के निर्देश दिए थे। कलेक्टर हर्ष सिंह ने भी जिला अस्पताल में बैठक कर स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की समीक्षा की थी और मरीजों के परिजनों से संवाद किया था। इसके बाद जिला अस्पताल में सी-आर्म मशीन जैसी सुविधा शुरू होना सकारात्मक संकेत है, लेकिन शाहपुर की घटना बताती है कि जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार अभी अधूरा है।

ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में स्टाफ की कमी, आपातकालीन सेवाओं की कमजोरी और समय पर उपचार न मिलने जैसी समस्याएं अब भी गंभीर चुनौती बनी हुई हैं। जिला अस्पताल में सुविधा बढ़ना स्वागत योग्य है, लेकिन जब तक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मजबूत नहीं होंगे, तब तक ग्रामीण मरीजों को राहत नहीं मिल पाएगी।

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