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बीजेपी का मास्टर स्ट्रोक : संगठन में नए चेहरों का धमाका, पुराने को किनारे

जिलों में नई कार्यकारिणी इस महीने, विधायकों और हारे प्रत्याशियों की चलेगी पसंद

  • संगठन की कमान अब जमीन से जुड़े नेताओं के हाथ में, हेमंत की नई टीम का खाका तैयार

भोपाल। मध्यप्रदेश बीजेपी में अब “पुराने को सम्मान, नए को जिम्मेदारी” का फॉर्मूला लागू होने जा रहा है। लंबे समय से संगठन की बागडोर थामे वरिष्ठ नेताओं को किनारे कर, पर्दे के पीछे काम करने वाले और जमीन पर सक्रिय कार्यकर्ताओं को बड़ा मौका मिलने वाला है। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की नई टीम में वही चेहरे चमकेंगे, जो अब तक संगठन की धड़कन तो थे, पर मंच पर नहीं दिखते थे।

मंत्री दर्जा वालों को संगठन से बाहर का रास्ता

जिन नेताओं को निगम, मंडल, बोर्ड या प्राधिकरण में मंत्री का दर्जा मिलेंगा, उन्हें संगठन से दूर रखा जाएगा। पार्टी का साफ संदेश है— “एक व्यक्ति, एक पद”। मतलब या तो सरकार में रहिए, या फिर संगठन संभालिए। दोनों कुर्सियाँ अब साथ नहीं मिलेंगी।

जिलों की टीमें इस महीने अंत तक

सूत्रों की मानें तो इस महीने के अंत तक सभी जिला कार्यकारिणी घोषित हो जाएंगी। नाम प्रदेश स्तर पर बुला लिए गए हैं। खास बात यह है कि इस बार जिलों की कार्यकारिणी बनाते वक्त स्थानीय विधायकों और हारे हुए प्रत्याशियों की राय को भी महत्व दिया जा रहा है। यानी जमीन से जुड़े नेता तय करेंगे कि जिले की कमान किसे मिले।

हेमंत का मास्टर स्ट्रोक

हेमंत खंडेलवाल ने संकेत दिए हैं कि उनकी टीम में शामिल होंगे—

  • युवा और ऊर्जावान चेहरे
  • बूथ स्तर तक काम करने वाले संगठनकर्ता
  • चुनावी रणनीति में माहिर कार्यकर्ता
  • और वे नेता, जिनका नाम भले ही अखबारों की सुर्खियों में न हो, लेकिन संगठन उनकी मेहनत से खड़ा है।

मंत्री दर्जा वालों की एंट्री बंद

  • निगम, मंडल, बोर्ड या प्राधिकरण में मंत्री दर्जा पाने वाले नेताओं को संगठन में जगह नहीं।
  • पार्टी का सख्त फॉर्मूला – “एक व्यक्ति, एक पद”।
  • अब या तो सरकार संभालो, या फिर संगठन।

इस महीने के अंत तक नई जिला टीमें

  • सभी जिलों की कार्यकारिणी इसी महीने के अंत तक घोषित।
  • प्रदेश स्तर से पर्यवेक्षकों ने नाम मंगा लिए हैं।
  • इस बार स्थानीय विधायकों और हारे हुए प्रत्याशियों की पसंद को भी दिया जाएगा महत्व।

टीम हेमंत की प्राथमिकताएँ

  • युवा और ऊर्जावान कार्यकर्ता
  • बूथ से लेकर जिला स्तर तक सक्रिय नेता
  • रणनीतिकार, जिन्होंने चुनावी काम में अहम भूमिका निभाई
  • वो चेहरे जो पार्टी की रीढ़ हैं, पर सुर्खियों में नहीं

बदलाव का असली मतलब

यह सिर्फ़ संगठन की लिस्ट बदलने की कवायद नहीं।

  • पुराने नेताओं को सम्मान, लेकिन जिम्मेदारी अब नए चेहरों की।
  • मंत्रियों और विधायकों की संगठन में “डबल भूमिका” खत्म।
  • संदेश साफ: पार्टी अब संगठन चलाने के लिए संगठनकर्मियों पर ही भरोसा करेगी।
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