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मदरसा शिक्षा पर बड़ा सवाल: हिंदू बच्चों को क्यों दी जा रही मजहबी तालीम?

सरकार बोली–मदरसों में सिर्फ मुस्लिम बच्चे… आंकड़े बोले–22% हिंदू बच्चे भी दाखिल

  • मुरैना के मदरसों में 22% हिंदू बच्चे, सरकार के आदेशों के बाद भी जारी मजहबी शिक्षा

मुरैना जिले के मदरसों में 22 प्रतिशत हिंदू बच्चों की मौजूदगी ने प्रदेश सरकार की शिक्षा नीति और निगरानी तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह केवल नियम उल्लंघन का मामला नहीं है, बल्कि बच्चों के भविष्य और शिक्षा के अधिकार से भी जुड़ा हुआ है। बाल आयोग ने इसे गंभीरता से लिया है और जल्द ही शासन को रिपोर्ट भेजने की बात कही है।

जिले के कुल 55 मान्यता प्राप्त मदरसों में इस समय 2,514 छात्र पढ़ते हैं, जिनमें से 1,958 मुस्लिम (78%) और 556 हिंदू (22%) हैं। यानी हर पाँचवाँ छात्र हिंदू समुदाय का है, जो कुरान, हदीस और तालीमुल इस्लाम जैसी इस्लामिक किताबें पढ़ रहा है। यह स्थिति तब सामने आई है जबकि प्रदेश सरकार ने एक वर्ष पहले ही आदेश जारी कर दिया था कि मदरसों में गैर-मुस्लिम छात्रों को पढ़ाया नहीं जाएगा, क्‍योंकि उनके लिए अन्‍य विद्यालय है, उन्‍हें इस्‍लामिक शिक्षा की क्‍या जरूरत है।

सरकार का आदेश और हकीकत

दरअसल, अगस्त 2024 में स्कूल शिक्षा विभाग ने आदेश जारी कर कहा था कि मदरसों में केवल मुस्लिम बच्चों को ही पढ़ने की अनुमति होगी। यदि किसी गैर-मुस्लिम बच्चे को अभिभावकों की लिखित अनुमति के बिना मजहबी शिक्षा दी जाती है, तो संबंधित मदरसे की मान्यता रद्द कर दी जाएगी और आर्थिक सहायता बंद कर दी जाएगी। लेकिन आदेश को लागू हुए एक साल से अधिक समय बीत चुका है और मुरैना जिले के मदरसों में बड़ी संख्या में हिंदू बच्चे अभी भी पढ़ रहे हैं।

आयुक्त लोक शिक्षण शिल्पा गुप्ता की ओर से जारी आदेश में सभी अधिकारियों को निर्देशित किया गया था कि वे मदरसों का निरीक्षण करें और देखें कि कहीं गैर-मुस्लिम बच्चे तो दाखिल नहीं हैं। शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने भी उस समय कहा था, “प्रदेश में मदरसों में हिन्दू बच्चों को नहीं पढ़ाया जा सकेगा। ऐसा होता पाए जाने पर वायलेशन ऑफ रूल्स के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।”

मदरसों में हिंदू छात्रों की संख्या

जिले से प्राप्त जानकारी के अनुसार मुरैना के 55 मान्यता प्राप्त मदरसों में कुल 2,514 छात्र अध्ययनरत हैं। इनमें 1,958 मुस्लिम और 556 हिंदू छात्र शामिल हैं। कई मदरसों में हिंदू छात्रों की संख्या काफी अधिक पाई गई है। मदरसा गौस-ए-आजम (कैलारस) में 100 हिंदू छात्र दर्ज हैं। मदरसा आयशा इस्लामिया (अंबाह) में 135 हिंदू छात्र पढ़ रहे हैं। मदरसा अंजुमन इस्लामिया आलिया (पुराना जौरा) में 24 हिंदू छात्र तालीम ले रहे हैं।

इसके अलावा मुरैना और जौरा में तीन ऐसे मदरसे भी सामने आए हैं जिनका संचालन हिंदू व्यक्ति कर रहे हैं। मदरसा रहीम (इस्लामपुरा) का संचालन सुनील शर्मा करते हैं, जहाँ आठ हिंदू छात्र अध्ययनरत हैं। मदरसा मोईन प्राथ.वि. गोपालपुर हाल केशव कॉलोनी मुरैना में अभी पांच हिन्‍दू बच्‍चे पढ़ रहे सबसे ज्‍यादा हिन्‍दू छात्र धर्मेन्‍द्र श्रीवास्‍तव द्वारा संचालित मदरसा अंजुमन इस्‍लामिया आलिया पुराना जौरा में 24 की संख्‍या में हैं। इस तरह से मुरैना में दो और जौरा में एक मदरसा हिन्दू द्वारा संचालित किया जाकर दीन (अल्‍लाह और रसूल) की तालीम दी जा रही है। अब यह तो प्रदेश के एक जिले की स्‍थ‍िति है, इसी के आधार पर सोचा जा सकता है कि सभी 55 जिलों का इस मामले में निकलकर आनेवाला आंकड़ा कितना चिंता जनक होगा!

किताबें और पढ़ाई पर सवाल

बाल संरक्षण आयोग के सदस्यों ने इस पर आपत्ति जताई है कि हिंदू बच्चों को कुरान, हदीस और तालीमुल इस्लाम जैसी किताबें क्यों पढ़ाई जा रही हैं। आयोग की सदस्य डॉ. निवेदिता शर्मा ने कहा कि यह जांच का विषय है कि आखिर माता-पिता अपने बच्चों को स्कूलों के बजाय मदरसों में क्यों भेज रहे हैं। क्या उनके पास स्कूल उपलब्ध नहीं हैं या किसी सुविधा की वजह से वे ऐसा कर रहे हैं? उन्होंने यह भी कहा कि आयोग को पहले भी शिकायत मिली है कि कुछ मदरसों में तालीमुल इस्लाम जैसी किताबें पढ़ाई जाती हैं, जिन्हें जिहादी मानसिकता बढ़ाने वाली कहा गया है।

आयोग और सरकार की भूमिका

दूसरी ओर तत्‍कालीन राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) के अध्‍यक्ष प्रियंक कानूनगो बोले थे “मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आश्वस्त किया है कि मध्य प्रदेश में कोई भी हिंदू बच्चा मदरसे में शिक्षा नहीं लेगा। हमें उनकी नियत पर शक नहीं है। आयोग मप्र सरकार को लिख रहा है कि कोई हिंदू बच्चा मदरसे का छात्र हो तो संविधान के अनुच्छेद 28 (3) के तहत उसके अभिभावकों का सहमति पत्र हमें भेजा जाए।” लेकिन अब तक ऐसी कोई जानकारी आयोग को प्राप्त नहीं हुई है।

मध्यप्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य ओंकार सिंह ने कहा कि प्रदेश में कई गैर-मान्यता प्राप्त मदरसे भी चल रहे हैं। इनमें नियम विरुद्ध बच्चों को दाखिला देने, स्कॉलरशिप और मध्याह्न भोजन की राशि हड़पने जैसी शिकायतें लगातार सामने आती हैं। उन्होंने बताया कि आयोग ने इस पर संज्ञान लिया है और सरकार को कार्रवाई के लिए पत्र लिखा जाएगा।

गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों का मामला

आधिकारिक जानकारी के अलावा जिले में ऐसे मदरसों की भी संख्या है जो बिना मान्यता के चल रहे हैं। इन मदरसों पर किसी तरह की निगरानी नहीं होती। पिछले वर्ष एनसीपीसीआर के आँकड़ों में सामने आया था कि प्रदेश के 1,755 पंजीकृत मदरसों में लगभग 9,417 हिंदू बच्चे पढ़ रहे हैं। इन आँकड़ों के बाद शिक्षा विभाग ने सभी जिलों के डीईओ को निरीक्षण करने और रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए थे।

अभिभावकों से सवाल

बाल संरक्षण आयोग का मानना है कि सबसे बड़ा प्रश्न अभिभावकों से पूछना चाहिए कि आखिर वे अपने बच्चों को मदरसों में क्यों भेज रहे हैं। क्या यह केवल डिग्री हासिल करने का साधन है या फिर किसी और कारण से वे बच्चों को मजहबी शिक्षा दिला रहे हैं?

प्रशासन पर उठ रहे सवाल

यह पूरा मामला प्रशासनिक लापरवाही को भी उजागर करता है। सरकार के आदेश के बावजूद जमीनी स्तर पर पालन न होना दर्शाता है कि शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन ने इस विषय को गंभीरता से नहीं लिया।

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