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खसरे में खेल! 400 परिवारों की 1.46 लाख वर्गफीट जमीन कबीर पंथ ट्रस्ट को अस्थायी कब्जा देने पर बवाल

रहवासियों का आरोप – हम 50 साल से रह रहे, जमीन ट्रस्ट को कैसे दी गई?

  • एडीएम बोले – जांच कराएंगे, सच्चाई सामने लाई जाएगी

बुरहानपुर। शहर के मालवीय वार्ड क्रमांक 16 के रहवासियों ने मंगलवार को कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर 146683 वर्गफीट भूमि के कथित फर्जी नामांतरण के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
400 से अधिक परिवारों का आरोप है कि जिस जमीन पर वे 1984 से शासन के पट्टों के आधार पर रह रहे हैं, उसी जमीन को 2010-11 में कबीर पंथ ट्रस्ट को पौधारोपण के लिए अस्थायी कब्जे में देने का उल्लेख खसरे में किया गया, जबकि ऐसा कोई आधिकारिक प्रकरण ही अस्तित्व में नहीं है।
फर्जी प्रकरण का आरोप, रहवासियों को नहीं मिली नस्ती
रहवासियों ने जब पट्टा नवीनीकरण के लिए आवेदन किया तो सामने आया कि उनकी जमीन का नामांतरण कबीर पंथ ट्रस्ट के नाम दर्ज है। रहवासियों की ओर से अधिवक्ता संतोष देवताले का आरोप है कि जिस आदेश क्रमांक का हवाला खसरे में दिया गया है, वह किसी और के नाम का है। असल में वह प्रकरण मून ऑटो पार्ट्स, बाबू अहमद के नाम पर दर्ज था। दायरा पंजी वर्ष 2011 के अवलोकन में यह खुलासा हुआ कि ट्रस्ट के पक्ष में जो उल्लेख है, वह अवैध, असत्य और फर्जी है।
जहां मंदिर को दी जमीन, वहां हैं स्कूल, आंगनवाड़ी और जल स्टेशन
स्थानीय निवासियों ने बताया कि उक्त भूमि पर सिर्फ घर ही नहीं हैं, बल्कि वर्तमान में शासकीय पाठशाला भी संचालित है जिसमें 12वीं कक्षा तक के विद्यार्थी भी अध्ययनरत है। इसके अतिरिक्त खेल मैदान है। प्राचीन महादेव मंदिर, पूरे वार्ड में सप्लाई किए जाने वाले पानी का सबमर्सिबल पंप स्टेशन भी इसी भूमि के तहत निर्मित है। आंगनवाड़ियों के केंद्र भी इसी भूमि के तहत आते हैं। फिर यह सवाल उठता है — क्या शासन इन सभी व्यवस्थाओं को नजरअंदाज कर के, ट्रस्ट को ज़मीन देने का आदेश दे सकता है?
1984 से रह रहे हैं लोग, फिर भी नामांतरण?
अधिवक्ता संतोष देवताले, अनिल पवार, प्रदीप नाविक, अमर चौधरी सहित बड़ी संख्या में पहुंचे लोगों ने कहा हमारे पास शासन से मिले स्थाई पट्टे हैं। नगर निगम को टैक्स अदा करते हैं, तो फिर हमारी भूमि कबीर पंथ ट्रस्ट को कैसे दी जा सकती है? उन्होंने कलेक्टर से आग्रह किया कि इस पुरे प्रकरण की जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
जांच होगी, जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी
ज्ञापन लेने के बाद एडीएम वीरसिंह चौहान ने आश्वासन दिया कि यह गंभीर मामला है। अगर खसरे में गलत नामांतरण किया गया है, तो हम जांच कराकर सच्चाई सामने लाएंगे। जो भी जिम्मेदार होगा, उस पर कार्रवाई होगी।
जमीनी सवाल, जिनका जवाब अभी तक नहीं मिला
• किस अधिकारी ने यह फर्जी नामांतरण खसरे में दर्ज कराया?
• 2010-11 में किस आधार पर ट्रस्ट को अस्थायी कब्जा दिया गया?
• जब यह रहवासी भूमि थी, तो पौधारोपण की अनुमति कैसे दी गई?
• शासन की संपत्ति पर ट्रस्ट का नाम कैसे चढ़ गया?

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