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गोंद के नाम पर जंगलों की नीलामी? कोर्ट ने वन विभाग के प्रमुख सचिव, कलेक्टर, एसपी, सीसीएफ को नोटिस जारी कर मांगा जवाब

सलाई, धवड़ा पेड़ों का अस्तित्व खत्म करने में वन विभाग भी पीछे नहीं, जांच के बाद भी जारी किए लाइसेंस 

  • मप्र उच्च न्यायालय में लगाई गई जनहित याचिका के बाद नोटिस जारी, कोर्ट ने 2024 के आदेश पर सख्ती से अमल करने को कहा

बुरहानपुर। बीते सालों में बुरहानपुर जिले में बड़े पैमाने पर वन कटा। वन अफसरों के सामने ही बाहरी अतिक्रमणकारी जंगल काटकर दबंगई दिखाते थे। नतीजा यह रहा कि बड़े पैमाने पर वन तबाह हो गया। बाद में जिला प्रशासन, पुलिस ने वन विभाग के साथ मिलकर नावरा, नेपानगर रेंज में 17 दिन तक अभियान चलाकर बाहरी अतिक्रमणकारियों को खदेड़ा। इसी की तर्ज पर अब खकनार, बोदरली और शाहपुर रेंज में बड़े पैमाने पर गोंद निकालने की गरज से सलाई, धवड़ा के पेड़ों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। जब इसे लेकर दो पर्यावरणप्रेमियों ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया तो वहां से राहत मिली। उच्च न्यायालय ने वन विभाग और प्रशासन को ताकीद की है कि जिले में 2024 में जो प्रतिबंध लगाया गया था उस पर सख्ती से अमल किया जाए। सलाई व धवड़ा गोंद निकालने पर प्रतिबंध का कड़ाई से पालन करें।

दरअसल हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ ने बुरहानपुर जिला प्रशासन और वन अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वन वृक्षों से सलाई गोंद और धवड़ा गोंद निकालने पर लगे प्रतिबंध का कड़ाई से पालन करें। एक जनहित याचिका दायर कर आरोप लगाया गया है कि बुरहानपुर वन प्रभाग के वन वृक्षों से सलाई गोंद और धवड़ा गोंद निकालने पर प्रतिबंध होने के बावजूद लाइसेंस जारी किए जा रहे हैं और सलाई और धवड़ा वृक्षों से गोंद निकाली जा रही है। कोर्ट ने वन विभाग के प्रमुख सचिव, कलेक्टर, एसपी, सीसीएफ व अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले पर अगली सुनवाई 24 मार्च को होगी। जनहित याचिकाकर्ता बुरहानपुर निवासी शौकत अली व जितेंद्र राउतोले की ओर से अधिवक्ता अब्दुल्ला उसमानी ने पक्ष रखा।

जांच रिपोर्ट में सामने आए तथ्य

कोर्ट में अधिवक्ता ने दलील दी कि संभागीय वन अधिकारी की एक जांच रिपोर्ट में यह तथ्य सामने आया है कि 89 प्रतिशत सलाई वृक्ष और 73 प्रतिशत धवड़ा वृक्ष क्षतिग्रस्त हो गए हैं। जांच रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कृत्रिम रसायनों का उपयोग किया जा रहा है जिससे सलाई और धवड़ा वृक्षों को नुकसान हो रहा है। कोर्ट को बताया गया कि रासायनिक पदार्थों के प्रयोग के साक्ष्यों को नष्ट करने के लिए कई पेड़ों को जलाया जा रहा है।

वन विभाग ने जारी किए कईं लाइसेंस

सूत्रों के अनुसार बीते समय में वन विभाग की ओर से सलाई, धवड़ा गोंद निकालने के लिए कईं लाइसेंस जारी किए गए हैं। कुछ का नवीनीकरण भी किया गया है जबकि वन विभाग की ओर से ही 2024 में गोंद निकाले जाने पर प्रतिबंध लगाया गया था। खास बाद यह है कि दूसरी जगह तो प्रतिबंध पर अमल हो रहा है, लेकिन खकनार, बोदरली और शाहपुर रेंज में यह सब खुलेआम हो रहा है।

पेड़ों को नुकसान पहुंचाकर निकाल रहे गोंद

शिकायतकर्ताओं के अनुसार पेड़ों से गोंद निकालने के लिए गलत तरीकों का उपयोग किया जा रहा है। इसे जलाया भी जाता है। केमिकल भी डालते हैं और छीलकर नुकसान भी पहुंचाया जाता है। ऐसे में आने वाले समय में इन पेड़ों का अस्तित्व खत्म हो जाएगा। अब अगली सुनवाई में वन विभाग को भी अपना पक्ष रखना होगा। याचिकाकर्ताओं की ओर से भी कोर्ट में साक्ष्य प्रस्तुत किए जाएंगे।

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