बुरहानपुर। ताप्ती नदी को प्रदूषण से बचाने के लिए शुरू की गई करोड़ों की सीवरेज परियोजना की रफ्तार अब सवालों के घेरे में है। शहर के C सेक्टर में हालात ऐसे हैं कि महज 300 मीटर पाइपलाइन बिछाने का काम करीब 40 दिन बाद भी पूरा नहीं हो पाया है। कहीं सड़कें खुदी पड़ी हैं, कहीं घरों के सीवरेज कनेक्शन अधूरे हैं तो कहीं घरों का गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है। विकास के नाम पर बार-बार हो रही खुदाई से परेशान जनता अब नगर निगम प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से जवाब मांग रही है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब 300 मीटर पाइपलाइन का काम पूरा करने में ही 40 दिन लग रहे हैं, तो पूरे शहर की सीवरेज परियोजना कब पूरी होगी? आखिर ठेकेदार की कार्यप्रणाली की निगरानी कौन कर रहा है? काम में देरी होने पर अब तक क्या कार्रवाई की गई? क्या निगम की मॉनिटरिंग केवल कागजों तक सीमित है या धरातल पर भी उसका असर दिखाई दे रहा है?
Table of Contents
ताप्ती शुद्धिकरण का दावा, लेकिन अहम C सेक्टर में अधूरा काम
शहर के नालों का गंदा पानी सीधे ताप्ती नदी में मिलने से रोकने के लिए सीवरेज परियोजना को तीन सेक्टरों में बांटा गया है। A सेक्टर में लालबाग और आसपास की कॉलोनियां, B सेक्टर में हरीरपुरा, राजेंद्र प्रसाद वार्ड, मालीवाड़ा सहित शहर का मध्य क्षेत्र शामिल है। वहीं C सेक्टर में आलमगंज, सरदार पटेल वार्ड, मालवीय वार्ड, नागझिरी, दौलतपुरा और महाजनापेठ जैसे क्षेत्र आते हैं। स्थानीय रहवासियों का आरोप है कि ठेकेदार A सेक्टर का काम पूरा करने पर अधिक ध्यान दे रहा है, जबकि ताप्ती में गंदे पानी की निकासी रोकने की दृष्टि से महत्वपूर्ण C सेक्टर में काम की रफ्तार बेहद धीमी है। कई स्थानों पर पाइपलाइन डालने के बाद सड़कें नहीं बनाई गईं। घरेलू कनेक्शन भी अधूरे बताए जा रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या परियोजना का काम निर्धारित कार्ययोजना के अनुसार चल रहा है या ठेकेदार अपनी सुविधा के हिसाब से क्षेत्रों की प्राथमिकता तय कर रहा है?
वार्ड 18 में तीन साल से परेशानी, 30 दिन में 300 मीटर काम भी नहीं
सरदार पटेल वार्ड क्र 18 में निर्माण कार्यों से परेशान रहवासियों का सब्र जवाब देने लगा है। क्षेत्र में पहले नाले की पाइपलाइन के लिए खुदाई हुई और अब सीवरेज के लिए सड़कें खोदी जा रही हैं। रहवासियों के अनुसार पिछले तीन वर्षों से किसी न किसी निर्माण कार्य के कारण क्षेत्र की सड़कें प्रभावित रही हैं।
स्थानीय निवासी विजय पाखरे ने बताया कि क्षेत्र में पीने का पानी एक दिन छोड़कर मिल रहा है। पिछले 30 दिनों से सीवरेज का काम चल रहा है। घरों के गंदे पानी की निकासी प्रभावित होने से पानी सड़कों पर बह रहा है। त्योहारों के समय भी घरों के सामने गंदगी और मलबा जमा रहने से लोगों को परेशान होना पड़ रहा है। रहवासियों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से शिकायत करने पर आश्वासन तो मिलते हैं, लेकिन समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो रहा है।
पार्षद ने उठाए गंभीर सवाल—ठेकेदार पर आखिर इतनी मेहरबानी क्यों?
वार्ड क्रमांक 18 के पार्षद गौरव शुक्ला ने सीवरेज कार्य की धीमी गति और ठेकेदार के विरुद्ध कार्रवाई नहीं होने पर सवाल उठाए हैं। शुक्ला के अनुसार क्षेत्र की सड़क पर पिछले तीन वर्षों से काम चल रहा है। पहले नाले के पाइप डाले गए और अब सीवरेज का काम किया जा रहा है। स्थिति यह है कि 30 दिनों में 300 मीटर पाइपलाइन का कार्य भी पूरा नहीं हो पाया। उन्होंने आरोप लगाया कि निगम अधिकारियों से लेकर विधायक और महापौर तक बार-बार शिकायत करने के बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। पार्षद ने सवाल उठाया कि आखिर ठेकेदार के विरुद्ध कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही? उन्होंने ठेकेदार पर नेताओं और निगम अधिकारियों की मेहरबानी होने की आशंका भी जताई।
पहले जल आवर्धन ने खोदी सड़कें, अब सीवरेज ने बढ़ाई मुश्किलें
बुरहानपुर में विकास योजनाओं के तहत बार-बार सड़कों की खुदाई नागरिकों के लिए बड़ी परेशानी बनती जा रही है। पहले अमृत योजना के प्रथम चरण और जल आवर्धन योजना के दौरान सड़कों की खुदाई हुई। अब सीवरेज कार्य के चलते कई क्षेत्रों में दोबारा सड़कें खोदी जा रही हैं। रहवासियों का सवाल है कि आखिर अलग-अलग विभागों और निर्माण एजेंसियों के बीच समन्वय क्यों नहीं किया जा रहा? एक बार सड़क बनने के बाद दोबारा खुदाई की नौबत क्यों आती है? पाइपलाइन डालने के साथ ही सड़क बहाली का काम समय पर क्यों नहीं कराया जाता? अमृत योजना के द्वितीय चरण और सीवरेज कार्यों में भी ऐसी स्थिति बनने की आशंका है। यदि निर्माण एजेंसियों के बीच समन्वय और कार्य की समयबद्ध निगरानी नहीं हुई तो शहरवासियों को आने वाले समय में भी अधूरी सड़कों से जूझना पड़ सकता है।
ठेकेदार को भुगतान किस आधार पर? गुणवत्ता और प्रगति की जांच भी जरूरी
सीवरेज कार्य की धीमी गति के बीच अब ठेकेदार को होने वाले भुगतान और निर्माण की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। पार्षद गौरव शुक्ला ने कहा नगर निगम प्रशासन को स्पष्ट करना चाहिए कि C सेक्टर में अब तक कितना काम पूरा हुआ है, कितने घरेलू कनेक्शन दिए गए हैं और कितनी सड़कों की बहाली बाकी है। ठेकेदार को अब तक कितना भुगतान हुआ है और क्या प्रत्येक भुगतान से पहले कार्य की गुणवत्ता तथा वास्तविक प्रगति का सत्यापन किया गया? यह भी सार्वजनिक होना चाहिए कि अनुबंध के अनुसार कार्य पूरा करने की निर्धारित समय-सीमा क्या है और देरी होने पर जुर्माने या अन्य कार्रवाई का क्या प्रावधान है।
विधायक-महापौर से भी सवाल, आखिर जनता की परेशानी कब दूर होगी?
सीवरेज परियोजना को लेकर नगर निगम के साथ जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। क्षेत्र के पार्षद गौरव शुक्ला शिकायतों की बात कह रहे हैं, जबकि रहवासी लंबे समय से परेशानी झेलने का दावा कर रहे हैं। ऐसे में विधायक, महापौर और संबंधित अधिकारियों से अपेक्षा है कि वे प्रभावित क्षेत्रों का संयुक्त निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति सामने लाएं। केवल आश्वासन देने के बजाय प्रत्येक अधूरे कार्य की समय-सीमा तय की जाए और उसकी प्रगति सार्वजनिक की जाए। विपक्ष सहित सभी जनप्रतिनिधियों के लिए भी यह स्थानीय मुद्दा महत्वपूर्ण है। शहर की सड़कें, जल निकासी और स्वच्छता सीधे आम नागरिकों के जीवन से जुड़ी हैं। इन समस्याओं के समाधान के लिए जवाबदेही तय करना जरूरी है।
आयुक्त का जवाब—गणेशोत्सव में रोका था काम, जल्द बनेंगी सड़कें
नगर निगम आयुक्त संदीप श्रीवास्तव ने सीवरेज कार्य की धीमी गति को लेकर कहा कि वार्ड में काम अच्छी तरह चल रहा है। गणेशोत्सव के दौरान कार्य रोका गया था। निगम द्वारा निर्माण कार्यों की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। सीवरेज के लिए खोदी गई सड़कों का निर्माण जल्द कराया जाएगा।
आयुक्त के इस जवाब के बाद भी महत्वपूर्ण सवाल बना हुआ है कि सड़क बहाली की निश्चित तारीख क्या होगी और अधूरे घरेलू कनेक्शन कब पूरे होंगे? निगम की मॉनिटरिंग का असर जमीन पर कब दिखाई देगा?
निगम प्रशासन से सीधे पांच सवाल
- महज 300 मीटर पाइपलाइन बिछाने में 30 से 40 दिन क्यों लग रहे हैं और देरी के लिए जिम्मेदार कौन है?
- C सेक्टर में कितने घरेलू सीवरेज कनेक्शन और कितनी सड़कें अब भी अधूरी हैं?
- बार-बार शिकायतों के बावजूद ठेकेदार पर अब तक क्या कार्रवाई की गई?
- ठेकेदार को अब तक कितना भुगतान किया गया और कार्य की गुणवत्ता का सत्यापन किसने किया?
- विधायक, महापौर और निगम प्रशासन प्रभावित रहवासियों को सड़क बहाली और सीवरेज कार्य पूरा होने की निश्चित समय-सीमा कब बताएंगे?
ताप्ती की सफाई जरूरी, लेकिन जनता को परेशानी में छोड़ना कहां तक उचित?
ताप्ती नदी का शुद्धिकरण बुरहानपुर के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। नालों के गंदे पानी को नदी में मिलने से रोकना आवश्यक है, लेकिन इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए नागरिकों को अनिश्चितकाल तक खुदी सड़कों, गंदगी और अधूरे निर्माण कार्यों के बीच रहने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।
अब निगम प्रशासन के सामने चुनौती केवल सीवरेज पाइपलाइन बिछाने की नहीं, बल्कि जनता का भरोसा बनाए रखने की भी है। सवाल सीधा है—आखिर बुरहानपुर की जनता को विकास के नाम पर कब तक खुदी सड़कें और आश्वासन मिलते रहेंगे? शहर को अब नई घोषणाएं नहीं, अधूरे कार्यों की निश्चित समय-सीमा, ठेकेदार की जवाबदेही और जमीन पर दिखाई देने वाले परिणाम चाहिए।

