बुरहानपुर। जिले के किसान इस समय दोहरी मार झेल रहे हैं। एक ओर प्राकृतिक आपदाओं के समय बीमा लाभ से वंचित रह जाते हैं, दूसरी ओर बाजार में केला फसल का उचित दाम भी नहीं मिल पा रहा। हालात ये हैं कि पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र की तुलना में बुरहानपुर के किसानों को प्रति ट्रॉली 500 से 700 रुपए कम मिल रहे हैं। इस गंभीर मुद्दे को लेकर गुरुवार को मराठा सेवा संघ ने कलेक्टर से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा और त्वरित समाधान की मांग की।
मराठा सेवा संघ के जिलाध्यक्ष दिनेश मोहन पाटिल ने कहा कि दोनों राज्यों में एक ही व्यापारी, एक जैसी क्वालिटी का केला खरीदता है, लेकिन दामों में इतना बड़ा फर्क क्यों? पके केले का बाजार भाव कभी कम नहीं होता। फिर कच्चे केले पर किसानों को इतना कम मूल्य क्यों मिलता है? लगातार घाटा उठाने वाले किसान अब लागत तक वसूल नहीं कर पा रहे। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर यही स्थिति बनी रही तो किसान आत्महत्या करने को मजबूर हो जाएंगे, क्योंकि न तो बैंक और सोसायटी का कर्ज चुका पाएंगे और न ही परिवार का भरण-पोषण कर पाएंगे।
किसान बोले – सालभर मेहनत, लेकिन मिलती है निराशा
केला फसल की विशेषता है कि किसान इसे पूरे साल संभालते हैं। खाद, पानी, मज़दूरी, परिवहन सभी में बड़ा खर्च होता है। बावजूद इसके यदि सही दाम नहीं मिले तो किसान टूट जाता है। किसान कहते हैं कि महाराष्ट्र के बराबर दाम मिलें, तभी मेहनत का मूल्य मिलेगा। फसल का उचित मूल्य न मिलने से वे आर्थिक संकट में फंस रहे हैं।
बीमा लाभ से भी वंचित किसान
जिले के किसानों की एक और बड़ी पीड़ा यह है कि उन्हें केला फसल पर बीमा लाभ नहीं मिलता। वर्ष 2018-19 में एक बार बीमा का लाभ दिया गया था। उसके बाद से किसानों की मांग बार-बार उठाई गई, सांसद और विधायक ने संसद व विधानसभा में मुद्दा उठाया, लेकिन आज तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। हर साल प्राकृतिक आपदा से नुकसान होता है, लेकिन सरकार द्वारा आरबीसी नियम 6-4 के तहत मिलने वाला मुआवजा नगण्य है। किसानों का कहना है कि जब पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र में बीमा का लाभ दिया जा रहा है, तो बुरहानपुर के किसान इससे वंचित क्यों?
ज्ञापन देने मे मराठा सेवा संघ के राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष सुनील महाजन, सहकार परिषद के गणेश कापसे, उपाध्यक्ष प्रमोद महाजन, कृषि परिषद के प्रदेश अध्यक्ष दिनेश चौधरी, इंदौर संभाग अध्यक्ष शरद पाटिल, जिला अध्यक्ष दिनेश पाटिल, शिक्षक परिषद के अजय महाजन सहित अन्य मौजूद थे।
किसानों की प्रमुख मांगें
- केला फसल को उचित और स्थायी मूल्य मिले।
- केला फसल को फसल बीमा योजना में शामिल किया जाए।
- खेतों की सुरक्षा हेतु तार फेंसिंग पर 50% सब्सिडी पर लोन की सुविधा दी जाए।