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जमीन की ऋण पुस्तिका में नाम सुधार के लिए मांगी रिश्वत, लोकायुक्त ने पटवारी और सहयोगी को रंगेहाथ पकड़ा

- उपयंत्री और वनकर्मी के बाद अब पटवारी व प्राइवेट व्यक्ति लोकायुक्त के हत्थे – नाबालिग से बालिग नाम दर्ज करने के लिए मांगे थे 5 हजार

On: September 22, 2025 8:16 PM
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नेपानगर रिश्वत कांड: पटवारी और प्राइवेट व्यक्ति लोकायुक्त के हत्थे

बुरहानपुर। सरकारी दफ्तरों में रिश्वतखोरी का खेल थमने का नाम नहीं ले रहा। कभी उपयंत्री, कभी वनकर्मी, और अब नेपानगर तहसील में एक पटवारी और उसका प्राइवेट सहयोगी लोकायुक्त के शिकंजे में फंस गए। सोमवार को लोकायुक्त इंदौर की टीम ने नेपानगर तहसील कार्यालय के पटवारी कक्ष से ही नंदू कोली को 3 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों दबोच लिया। गौरतलब है कि बीते 15 दिनों में लोकायुक्त पुलिस ने जिले में तीसरी कार्रवाई की है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि रिश्वतखोरी का खेल सरकारी अफसरों के सिर चढ़कर बोल रहा है।

दरअसल डवालीखुर्द निवासी औंकार राठौर (20 वर्ष, प्राइवेट ड्राइवर) ने लोकायुक्त को बताया कि उनकी पुश्तैनी कृषि भूमि की ऋण पुस्तिका में नाम नाबालिग दिखाया गया है। इसे बालिग में दर्ज कराने के लिए पटवारी प्रियंका ठाकुर और उसके प्राइवेट सहयोगी नंदू कोली ने 5 हजार रुपए की मांग की। बाद में सौदा 4 हजार रुपए पर तय हुआ। आरोपियों ने पहले ही 1 हजार रुपए वसूल लिए। शेष 3 हजार रुपए लेते समय नंदू कोली रंगे हाथों पकड़ा गया।

रिकॉर्डिंग में कैद हुई रिश्वतखोरी

शिकायत मिलने पर लोकायुक्त एसपी राजेश सहाय ने पहले आरोप की रिकॉर्डिंग कराई। इसमें रिश्वत की मांग साफ सुनाई दी। सत्यापन के बाद कार्यवाहक निरीक्षक आशुतोष मिठास की अगुवाई में ट्रैप दल बनाया गया। सोमवार को योजनाबद्ध तरीके से तहसील कार्यालय में छापा मारा गया और आरोपी को पकड़ा गया।

केस दर्ज – पटवारी भी आरोपी

लोकायुक्त ने पटवारी प्रियंका ठाकुर और नंदू कोली दोनों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण संशोधन अधिनियम 2018 की धारा 7 व 61-2 बीएनएस 2023 के तहत केस दर्ज किया है। कार्रवाई में प्रधान आरक्षक आशीष शुक्ला, आरक्षक विजय कुमार, आशीष नायडू, श्रीकृष्ण अहिरवार और महिला आरक्षक प्रिया चौहान शामिल थे।

सवालों के घेरे में सिस्टम

यह मामला सिर्फ रिश्वत का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम पर धब्बा है। साधारण सुधार के लिए भी हजारों की मांग! सरकारी कर्मचारी अपने काम के लिए “मूल्य सूची” बना बैठे हैं। किसान और आम आदमी फाइलों के जाल में फंसकर मजबूर हो जाता है रिश्वत देने के लिए। लगातार हो रही कार्रवाई के बावजूद भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी गहरी हैं कि हर विभाग में नए मामले सामने आ रहे हैं।

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