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राष्ट्रपति के सामने दमक उठा बुरहानपुर — धरती आबा जनजातीय अभियान में रचा इतिहास

- राष्ट्रपति की उपस्थिति में पेश हुआ बुरहानपुर मॉडल, उत्कृष्ट जिलों में शामिल हुआ नाम

बुरहानपुर। जनजातीय सशक्तिकरण की दिशा में बुरहानपुर जिले ने पूरे देश में अपनी अलग पहचान बनाई है। “धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान” में उत्कृष्ट कार्य के लिए बुरहानपुर को राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली है। देश के श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले जिलों में बुरहानपुर का नाम शामिल किया गया है।

यह अभियान आदिवासी समुदाय के समग्र विकास, आत्मनिर्भरता और सामाजिक सशक्तिकरण के उद्देश्य से चलाया जा रहा है, जिसका नाम जनजातीय नायक भगवान बिरसा मुंडा के सम्मान में रखा गया है।

भारत सरकार के जनजातीय कार्य विभाग द्वारा आयोजित “आदि कर्मयोगी अभियान राष्ट्रीय सम्मेलन” में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू की उपस्थिति में बुरहानपुर जिले की उपलब्धियों का प्रेजेंटेशन जनजातीय कार्य विभाग के प्रमुख सचिव श्री गुलशन बामरा ने किया। इस प्रस्तुति में बुरहानपुर जिले में हुए कार्यों को देशभर के लिए मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया गया।

कलेक्टर हर्ष सिंह के नेतृत्व में जमीनी स्तर पर सफलता

कलेक्टर हर्ष सिंह के मार्गदर्शन में अभियान को जनपद से लेकर ग्राम पंचायत स्तर तक व्यापक रूप से लागू किया गया। प्रशासन ने गांव-गांव पहुंचकर जनजातीय परिवारों को योजनाओं का लाभ दिलाया, जिससे जिले के 116 चयनित जनजातीय बाहुल्य ग्रामों में 100 प्रतिशत सैचुरेशन सुनिश्चित किया गया। इन प्रयासों से बुरहानपुर जिला राष्ट्रीय पटल पर अपनी पहचान स्थापित करने में सफल रहा है।

मेगा शिविरों के जरिए हजारों को मिला लाभ

अब तक 18 मेगा शिविरों के माध्यम से हजारों जनजातीय परिवारों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिला। इनमें उपलब्धियाँ इस प्रकार रहीं— 41,617 आधार कार्ड, 32,632 आयुष्मान कार्ड, 11,837 जाति प्रमाणपत्र, 41,459 समग्र आईडी, 42,248 जनधन खाते, 536 किसान क्रेडिट कार्ड, 4,466 सिकल सेल एनीमिया जांच, 492 पीएम किसान सम्मान निधि लाभार्थी, 44 उज्जवला योजना लाभार्थी, 38 सुकन्या समृद्धि योजना और 730 मनरेगा पंजीयन इन सबके साथ एमपीटास प्रोफाइल, पीएम विश्वकर्मा योजना, सामाजिक सुरक्षा पेंशन जैसी कई योजनाओं के लाभ भी प्रदान किए गए।

जनजातीय विकास की नई मिसाल

वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, जिले में 1.82 लाख से अधिक जनजातीय जनसंख्या निवास करती है, जिनमें प्रमुख रूप से कोरकू, बारेला, भील, भिलाला और गोंड जनजातियाँ शामिल हैं। इन समुदायों को मुख्यधारा से जोड़ने और आत्मनिर्भर बनाने के लिए “धरती आबा अभियान” मील का पत्थर साबित हो रहा है।

बुरहानपुर बना राष्ट्रीय प्रेरणा केंद्र

धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान ने बुरहानपुर को न केवल राष्ट्रीय पहचान दिलाई है, बल्कि अन्य जिलों के लिए एक आदर्श मॉडल भी प्रस्तुत किया है। यह सफलता प्रशासनिक समर्पण, जनभागीदारी और योजनाओं के ईमानदार क्रियान्वयन का परिणाम है।

जनजातीय समाज को मिले सम्मानजनक जीवन

बुरहानपुर का लक्ष्य केवल योजनाओं का वितरण नहीं, बल्कि जनजातीय समाज को सशक्त, आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन देना है। धरती आबा अभियान ने विकास को गाँव के दरवाज़े तक पहुंचाया है।  – हर्ष सिंह, कलेक्टर, बुरहानपुर

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