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सिविल सर्जन डॉ. प्रदीप मोजेस पर चलेगा भ्रष्टाचार का मुकदमा

मप्र सरकार ने दी अभियोजन स्वीकृति, लोकायुक्त ट्रैप केस में बड़ा धमाका

बुरहानपुर। नर्मदापुरम के तत्कालीन मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) और वर्तमान में बुरहानपुर जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. प्रदीप मोजेस अब भ्रष्टाचार के आरोपों में अदालत का सामना करेंगे। मध्यप्रदेश शासन ने उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा चलाने की अभियोजन स्वीकृति दे दी है। यह आदेश 15 दिसंबर को जारी हुआ था, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है और जिले में हड़कंप मचा दिया है।

यह आदेश मप्र शासन की अवर सचिव सीमा डेहरिया द्वारा जारी किया गया है, जिसमें साफ कहा गया है कि लोकायुक्त, भोपाल की रिपोर्ट के अनुसार डॉ. प्रदीप मोजेस के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप प्रथम दृष्टया प्रमाणित पाए गए हैं, इसलिए उन्हें अदालत में अभियोजित किया जाएगा।

5 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़े गए थे

लोकायुक्त जांच के मुताबिक, जब डॉ. मोजेस नर्मदापुरम में सीएमएचओ थे, तब उन्होंने संविदा लेखा प्रबंधक भावना चौहान के साथ मिलकर मदनमोहन वर्मा, सहायक ग्रेड-3 से बिल पास करने के बदले रिश्वत मांगी थी। 29 अप्रैल 2022 रिश्वत की मांग, 2 मई 2022 डॉ. मोजेस ने 2,000 रु., भावना चौहान ने 3,000 रु. टेबल पर रखवाकर लिए इसी दौरान लोकायुक्त टीम ने दोनों को रंगे हाथ पकड़ लिया था।

इन धाराओं में चलेगा केस

सरकार ने डॉ. मोजेस के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7, 12, 13(1)(बी), 13(2) और धारा 120-B भादंवि के तहत न्यायालय में अभियोजन चलाने की अनुमति दी है। यह स्वीकृति भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 218 के तहत दी गई है।

राज्य स्तरीय समिति ने लगाई थी मुहर

संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं स्तर पर गठित राज्य स्तरीय समिति ने 10 नवंबर 2025 की बैठक में डॉ. मोजेस के खिलाफ अभियोजन की सिफारिश की थी। उसी के आधार पर शासन ने यह आदेश जारी किया। खास बात यह है कि नर्मदापुरम में वे सीएमएचओ जैसे बड़े पद पर थे और अब बुरहानपुर में सिविल सर्जन हैं।

आरोपों की बौछार और फिर चुप्पी

रोचक संयोग यह है कि एक दिन पहले ही डॉ. मोजेस ने बुरहानपुर जिला अस्पताल में क्रिटिकल केयर यूनिट की 26 लाख की खरीदी में 10 लाख की सामग्री खरीदने और घटिया सामग्री लेने जैसे गंभीर आरोप लगाते हुए सीएमएचओ के खिलाफ रिपोर्ट कलेक्टर को भेजी थी। लेकिन अभियोजन स्वीकृति का आदेश सामने आने के बाद जब उनसे संपर्क किया गया तो उन्होंने कई बार फोन नहीं उठाया, जिससे मामले को लेकर सवाल और गहरे हो गए हैं।

अब पूरे जिले की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि लोकायुक्त कोर्ट में डॉ. मोजेस पर मुकदमा कब और कैसे आगे बढ़ेगा।

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