बुरहानपुर। शहर के पांच वार्डों में फैले डायरिया संक्रमण ने बुरहानपुर जिला अस्पताल की व्यवस्था हिला दी है। पिछले चार दिनों में 160 से ज्यादा मरीज भर्ती हो चुके हैं। हालांकि स्वास्थ्य विभाग दावा कर रहा है कि स्थिति अब नियंत्रण में है, लेकिन मंगलवार को ही 25 नए मरीज अस्पताल पहुंचे, जिससे दावों पर सवाल उठ रहे हैं।
इंदौर से उपसंचालक डॉ. सोनिया मंगलवार को निरीक्षण के लिए बुरहानपुर पहुंचीं। उन्होंने बंद कमरे में अस्पताल प्रबंधन के साथ बैठक की और स्थिति की समीक्षा की। वहीं खंडवा मेडिकल कॉलेज की टीम भी मौके पर पहुंचकर मरीजों का उपचार कर रही है। टीम ने प्रभावित वार्डों से पानी के सैंपल लेकर इंदौर लैब भेजे हैं, ताकि संक्रमण के स्रोत का पता लगाया जा सके।
कंट्रोल में आ गया डायरिया, फिर भी रोज़ बढ़ रहे मरीज
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि मरीजों की संख्या में कमी आई है, लेकिन ज़मीनी हकीकत अलग कहानी कहती है। मंगलवार को ही 25 नए मरीज डायरिया के लक्षणों के साथ जिला अस्पताल पहुंचे। सहायक प्रबंधक धीरज चौहान ने बताया 8 नवंबर से डायरिया फैलना शुरू हुआ था। अब स्थिति बेहतर है। 160 मरीजों में से 50 से अधिक डिस्चार्ज किए जा चुके हैं। मंगलवार को 16 मरीजों को छुट्टी दी गई। इलाज समय पर हो रहा है और सुधार तेज़ी से दिख रहा है। उन्होंने बताया कि अस्पताल में इस समय 40 मरीज भर्ती हैं, जिनमें से 15 डायरिया से पीड़ित हैं।
मौतों की चर्चा पर प्रशासन ने साधी चुप्पी
संक्रमण की शुरुआत में एक महिला और एक बच्चे की मौत की चर्चा रही। परिजनों ने डायरिया को मौत का कारण बताया, लेकिन प्रशासन ने इसे नकारते हुए कहा दोनों मरीज अन्य बीमारियों से पीड़ित थे। हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि मौतें दूषित पानी और समय पर इलाज न मिलने का नतीजा हैं। प्रशासन ने अब तक इन मौतों की औपचारिक पुष्टि या जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की है।
इंदौर भेजे गए पानी के सैंपल, अब रिपोर्ट पर टिकी नज़र
खंडवा मेडिकल कॉलेज से आई टीम ने शहर के संक्रमित वार्डों में जाकर पानी के सैंपल एकत्रित किए। सभी सैंपल इंदौर लैब में जांच के लिए भेजे गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही यह साफ होगा कि संक्रमण का असली कारण क्या है। दूषित पानी, पाइपलाइन में लीकेज या सफाई व्यवस्था में लापरवाही।
फिर दोहराई गई वही कहानी, कंपनी पर कार्रवाई नहीं
करीब डेढ़ साल पहले भी बुरहानपुर नगर में डायरिया का प्रकोप फैला था। उस समय जलावर्धन योजना की नई पाइपलाइन बिछाने के दौरान लापरवाही सामने आई थी। तब भी निजी कंपनी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई थी और इस बार भी इतिहास खुद को दोहराता दिख रहा है। कंपनी को सात साल पहले यह प्रोजेक्ट पूरा करना था, लेकिन आज तक अधूरा है। शहरवासी दूषित पानी पी रहे हैं, और जिम्मेदार अधिकारी अब भी फाइलों में सफाई दे रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग की बैठक में ‘कंट्रोल’ शब्द की गूंज
उपसंचालक डॉ. सोनिया की बैठक में स्वास्थ्य अधिकारियों ने बार-बार कहा अब स्थिति पूरी तरह कंट्रोल में है। पर सवाल यह है कि जब बीमारी काबू में है, तो हर दिन नए मरीज अस्पताल क्यों पहुंच रहे हैं? अंदरखाने चर्चा यह भी है कि विभाग वास्तविक आंकड़े छिपा रहा है, ताकि हालात गंभीर न दिखें और उच्चस्तरीय जांच से बचा जा सके।
शहरवासी बोले — हर साल यही हाल, जिम्मेदार कौन?
स्थानीय नागरिकों ने बताया कि हर बार बारिश के बाद डायरिया और पेचिश जैसी बीमारियां फैल जाती हैं। नगर निगम और जल विभाग के बीच तालमेल की कमी से शहर की पेयजल व्यवस्था सबसे ज्यादा प्रभावित है। हर बार अधिकारी दौरे पर आते हैं, बैठक होती है, सैंपल भेजे जाते हैं लेकिन पानी वही, हालात वही। कोई जवाबदेही तय नहीं होती।
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