बुरहानपुर। शैक्षणिक सत्र आधा बीत चुका है, लेकिन जिले के उर्दू माध्यम स्कूलों में कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थी अब भी नि:शुल्क पाठ्यपुस्तकों का इंतजार कर रहे हैं। शासन ने किताबें उपलब्ध कराने के लिए दो बार स्पष्ट निर्देश जारी किए, इसके बावजूद वितरण नहीं होने का मामला सामने आया है। दूसरी ओर, कुछ स्कूलों में ऐसे शिक्षक पदस्थ हैं जिन्हें उर्दू भाषा का पर्याप्त ज्ञान नहीं है। इससे गणित और फिजिक्स जैसे महत्वपूर्ण विषयों की पढ़ाई प्रभावित होने की शिकायत है। अखिल भारतीय उर्दू शिक्षक संघ ने कलेक्टर विवेक कुमार से हस्तक्षेप कर व्यवस्था सुधारने की मांग की है।
संघ के अनुसार, बुरहानपुर जिले में कक्षा पहली से 12वीं तक उर्दू माध्यम की शालाएं संचालित हैं। इनमें छह हायर सेकेंडरी स्कूल हैं। इन संस्थाओं में बड़ी संख्या में विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। आरोप है कि शिक्षा विभाग शासन के निर्देशों का पालन नहीं करवा पाया है। इसका सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई और परीक्षा की तैयारी पर पड़ रहा है।
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2025 और 2026 में जारी हुए आदेश, फिर भी नहीं पहुंचीं किताबें
अखिल भारतीय उर्दू शिक्षक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अशफाक खान और प्रदेश सलाहकार मंडल अध्यक्ष ठाकुर संतोष सिंह दीक्षित ने बताया कि लोक शिक्षण संचालनालय, भोपाल ने 28 जनवरी 2025 और 23 जनवरी 2026 को पाठ्यपुस्तक वितरण संबंधी निर्देश जारी किए थे। इन निर्देशों के अनुसार, उर्दू माध्यम की पुस्तकें विमर्श पोर्टल से डाउनलोड कर विद्यार्थियों को उपलब्ध कराई जानी थीं। वहीं, मनोविज्ञान विषय की पुस्तक एनसीईआरटी की वेबसाइट से डाउनलोड कर उसकी फोटोकॉपी वितरित करने के निर्देश थे। श्री दीक्षित का आरोप है कि आदेश जारी होने के बावजूद कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों को निर्धारित पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध नहीं कराई गईं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब शासन ने पुस्तकों की व्यवस्था का विकल्प पहले ही दे दिया था, तो आधा सत्र गुजरने के बाद भी वितरण क्यों नहीं हुआ?
उर्दू माध्यम के स्कूल, लेकिन गणित-फिजिक्स पढ़ाने में भाषा की बाधा
पाठ्यपुस्तकों के साथ शिक्षकों की पदस्थापना पर भी संघ ने सवाल उठाए हैं। शिकायत के अनुसार, खैराती बाजार स्थित शासकीय उर्दू हायर सेकेंडरी स्कूल में दो शिक्षिकाएं पदस्थ हैं। वहीं, बहादरपुर के शासकीय उर्दू हायर सेकेंडरी स्कूल में फिजिक्स विषय के लिए मराठी माध्यम की शिक्षिका नियुक्त है। ठाकुर संतोष सिंह दीक्षित का कहना है कि संबंधित शिक्षकों को उर्दू भाषा का पर्याप्त ज्ञान नहीं होने के कारण विद्यार्थियों को गणित और फिजिक्स जैसे विषय समझने में कठिनाई होती है। हिंदी और अंग्रेजी जैसे विषयों की पढ़ाई की तुलना में तकनीकी एवं विज्ञान विषयों में भाषा की समस्या अधिक सामने आ रही है। संघ ने मांग की है कि संबंधित शिक्षकों की पदस्थापना की समीक्षा कर उर्दू माध्यम के विद्यार्थियों के लिए विषय और भाषा के अनुरूप शिक्षकों की व्यवस्था की जाए।
किताबों के बिना परीक्षा की तैयारी कैसे करेंगे विद्यार्थी?
अखिल भारतीय उर्दू शिक्षक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अशफाक खान ने चिंता जताई कि पाठ्यपुस्तकों के अभाव में विद्यार्थियों को नियमित अध्ययन के साथ परीक्षा की तैयारी में भी परेशानी हो रही है। विशेष रूप से 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए समय पर अध्ययन सामग्री उपलब्ध होना जरूरी है। संघ के मुताबिक, यदि किताबों के वितरण और शिक्षकों की व्यवस्था में और देरी हुई तो इसका असर विद्यार्थियों के शैक्षणिक प्रदर्शन पर पड़ सकता है।
कलेक्टर से मांग—किताबें तत्काल बंटवाएं, शिक्षकों की पदस्थापना सुधारें
प्रदेश सलाहकार मंडल अध्यक्ष ठाकुर संतोष सिंह दीक्षित, राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अशफाक खान और जिला अध्यक्ष साकिर मीर ने कलेक्टर विवेक कुमार से मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। संघ ने शासन के निर्देशों के अनुरूप सभी विद्यार्थियों को नि:शुल्क पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराने और भाषा संबंधी समस्या वाले स्कूलों में शिक्षकों की पदस्थापना की समीक्षा करने का आग्रह किया है।
बड़ा सवाल यह है कि जब पाठ्यपुस्तक वितरण के लिए शासन के आदेश पहले से मौजूद हैं, तो विद्यार्थियों को आधा शैक्षणिक सत्र बिना किताबों के क्यों गुजारना पड़ा? अब देखना होगा कि शिक्षा विभाग कब तक किताबें उपलब्ध कराता है और पढ़ाई में आ रही भाषा संबंधी बाधाओं को कैसे दूर करता है।

