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बुरहानपुर में अवैध शराब का कारोबार, आबकारी विभाग की कार्रवाई पर सवाल: हैदरपुर में 120 महिलाओं ने खोला मोर्चा, बोलीं- शराब ने उजाड़ दिए परिवार, अब बच्चों का भविष्य नहीं होने देंगे बर्बाद

- गांव में कच्ची-पक्की शराब की अवैध बिक्री से परेशान महिलाओं ने बनाई संयुक्त समिति; पंचायत से पुलिस चौकी तक पहुंचकर किया विरोध, शराब बेचने वालों पर कार्रवाई की मांग। महिलाओं का गंभीर आरोप- विरोध करने पर पुलिस की निगरानी में शराब बेचने की बात कहते हैं कारोबारी।

बुरहानपुर। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध शराब की बिक्री को लेकर आबकारी विभाग की निगरानी और कार्रवाई व्यवस्था सवालों के घेरे में है। नेपानगर क्षेत्र के हैदरपुर गांव में हालात ऐसे हैं कि शराब की अवैध बिक्री से परेशान 120 से ज्यादा महिलाओं को खुद मोर्चा संभालना पड़ा है। महिलाओं ने संयुक्त महिला समिति बनाकर गांव में शराबबंदी का अभियान छेड़ दिया है। उनका आरोप है कि गांव में कच्ची और पक्की शराब की अवैध बिक्री के कारण कई परिवार बर्बादी की कगार पर पहुंच गए हैं। घरों की आर्थिक स्थिति बिगड़ रही है और बच्चों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। इसके बावजूद अवैध शराब बेचने वालों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है।

Sadaiv News
हैदरपुर में अवैध शराब के खिलाफ एकजुट हुईं महिलाएं, ग्राम पंचायत में शिकायत और शराबबंदी की मांग

महिलाओं का आक्रोश अब गांव की गलियों से निकलकर पंचायत और पुलिस चौकी तक पहुंच गया है। समिति की सदस्य पहले ग्राम पंचायत हैदरपुर पहुंचीं। इसके बाद नावरा पुलिस चौकी जाकर शिकायत दर्ज कराई और नारेबाजी करते हुए अवैध शराब की बिक्री बंद कराने की मांग की। महिलाओं ने स्पष्ट किया कि वे अब शराब के कारण अपने परिवारों को बर्बाद होते नहीं देख सकतीं। गांव में अवैध शराब की बिक्री रोकने के लिए वे संगठित होकर अभियान चलाएंगी।

आबकारी विभाग की निगरानी पर सवाल: जब महिलाएं बता रहीं कहां बिक रही शराब, तो कार्रवाई क्यों नहीं?

हैदरपुर में महिलाओं का एकजुट होकर सड़कों पर उतरना आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है। महिलाओं के अनुसार, गांव में कच्ची और पक्की शराब के साथ अन्य नशीले पदार्थों की बिक्री भी बढ़ रही है। शराब की उपलब्धता के कारण नशे की लत लगातार परिवारों को प्रभावित कर रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि जिस अवैध कारोबार के खिलाफ गांव की महिलाएं खुलकर शिकायत कर रही हैं, उस पर आबकारी विभाग की ओर से अब तक प्रभावी रोक क्यों नहीं लग सकी? क्या विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों को ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध शराब की बिक्री की जानकारी नहीं है? यदि जानकारी है तो कितने विक्रेताओं के खिलाफ कार्रवाई की गई? कितनी अवैध शराब जब्त हुई और हैदरपुर में बिक्री रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए? महिलाओं की शिकायत के बाद इन सवालों का जवाब देना आबकारी विभाग और पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारी है।

120 महिलाओं ने बनाई समिति, अब गांव-गांव जाकर शराब के खिलाफ जगाएंगी अलख

हैदरपुर की महिलाओं ने अवैध शराब के खिलाफ अपने अभियान को संगठित रूप देने के लिए संयुक्त महिला समिति का गठन किया है। समिति से 120 से ज्यादा महिलाएं जुड़ी हैं। महिलाओं का कहना है कि शराब की लत के कारण कई परिवारों की आर्थिक स्थिति कमजोर हो चुकी है। घरों में विवाद बढ़ रहे हैं। परिवार की कमाई नशे पर खर्च होने से बच्चों की पढ़ाई, पालन-पोषण और अन्य जरूरी आवश्यकताएं प्रभावित हो रही हैं। समिति ने निर्णय लिया है कि महिलाएं केवल अपने गांव तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भी लोगों को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करेंगी। महिलाओं ने कहा कि यदि समय रहते नशे की बढ़ती प्रवृत्ति पर अंकुश नहीं लगाया गया तो आने वाली पीढ़ी भी इसकी चपेट में आ सकती है। इसी चिंता ने उन्हें एकजुट होकर अभियान शुरू करने के लिए प्रेरित किया है।

पहले अकेले विरोध किया तो शराब बेचने वालों ने किया विवाद, अब संगठित होकर उठाएंगी आवाज

महिलाओं ने बताया कि पहले जब वे व्यक्तिगत रूप से कच्ची शराब की अवैध बिक्री का विरोध करती थीं, तो शराब बेचने वाले लोग उनसे विवाद करते थे। ऐसे में महिलाओं के सामने अपनी सुरक्षा की चिंता भी बनी रहती थी। इसी वजह से अब उन्होंने संयुक्त महिला समिति के माध्यम से सामूहिक रूप से आवाज उठाने का निर्णय लिया है। महिलाओं ने स्पष्ट किया कि वे अवैध शराब बेचने वालों से सीधे विवाद करने के बजाय पुलिस और प्रशासन को सूचना देंगी। जहां भी अवैध शराब की बिक्री की जानकारी मिलेगी, वहां संबंधित अधिकारियों को बुलाकर कार्रवाई की मांग की जाएगी। महिलाओं का कहना है कि अवैध शराब के खिलाफ अभियान चलाना जरूरी है, लेकिन इस दौरान उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना भी पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारी है।

महिलाओं का गंभीर आरोप: शराब बेचने से रोको तो कहते हैं, पुलिस की निगरानी में बेचते हैं

हैदरपुर की महिलाओं ने अवैध शराब बेचने वालों को लेकर एक गंभीर आरोप भी लगाया है। महिलाओं के मुताबिक, जब वे कुछ लोगों को शराब बेचने से रोकती हैं, तो वे पुलिस की निगरानी में शराब बेचने की बात कहते हैं। महिलाओं के इस आरोप ने पुलिस की भूमिका को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, शराब बेचने वालों के कथित दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इससे पुलिस की संलिप्तता स्थापित नहीं होती। लेकिन सवाल यह है कि आखिर अवैध शराब बेचने वाले पुलिस का नाम लेकर ग्रामीण महिलाओं को ऐसा जवाब क्यों दे रहे हैं? क्या यह महिलाओं को डराने का तरीका है या इसके पीछे कोई अन्य कारण है? महिलाओं ने पुलिस और आबकारी विभाग से मांग की है कि अवैध शराब बेचने वालों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही पुलिस की निगरानी में शराब बेचने संबंधी कथित दावों की भी जांच की जाए, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।

शराब से उजड़ रहे घर, बच्चों की शादी तक में आ रही परेशानी; महिलाओं का छलका दर्द

अवैध शराब के खिलाफ महिलाओं की नाराजगी के पीछे केवल गांव में शराब की बिक्री का मुद्दा नहीं, बल्कि परिवारों की बिगड़ती आर्थिक और सामाजिक स्थिति भी है। महिलाओं का कहना है कि शराब के कारण कई परिवार बर्बाद हो रहे हैं। नशे की लत से घर की आर्थिक स्थिति कमजोर हो रही है। इसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई और उनके भविष्य पर पड़ रहा है। महिलाओं ने बताया कि शराब की वजह से परिवारों में ऐसी परिस्थितियां बन रही हैं कि बच्चों की शादी तक में परेशानी आ रही है। एक ओर परिवारों की कमाई नशे में खर्च हो रही है, दूसरी ओर घर की जिम्मेदारियां संभालने वाली महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। महिलाओं का कहना है कि वे अपने बच्चों को बेहतर भविष्य देना चाहती हैं। इसके लिए गांव में अवैध शराब की बिक्री बंद होना जरूरी है।

पहले पंचायत में ज्ञापन, फिर पुलिस चौकी पहुंचकर नारेबाजी; कार्रवाई की मांग

संयुक्त महिला समिति की सदस्य पहले हैदरपुर ग्राम पंचायत पहुंचीं। यहां उन्होंने गांव में शराबबंदी की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा। इसके बाद महिलाएं नावरा पुलिस चौकी पहुंचीं। यहां उन्होंने अवैध शराब की बिक्री के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई और नारेबाजी करते हुए कार्रवाई की मांग की। महिलाओं ने कहा कि गांव में कच्ची और पक्की शराब की अवैध बिक्री बंद कराई जाए। शराब बेचने वालों के खिलाफ कार्रवाई हो और ग्रामीण क्षेत्रों में नशे के कारोबार पर प्रभावी अंकुश लगाया जाए। गांव की ममता मोरे, नर्मदा गवले, पूजा और ज्योति सहित अन्य महिलाओं ने पुलिस और आबकारी विभाग से जल्द कार्रवाई की मांग की है। महिलाओं ने स्पष्ट किया कि वे गांव में शराब की अवैध बिक्री रोकने के लिए आगे आई हैं और इस अभियान को जारी रखेंगी।

गांव की महिलाएं सड़क पर, अब आबकारी विभाग को देना होगा कार्रवाई का हिसाब

हैदरपुर में महिलाओं का आंदोलन जिले में अवैध शराब की बिक्री रोकने की व्यवस्था पर बड़ा सवाल है। जिस कारोबार के खिलाफ कार्रवाई की जिम्मेदारी पुलिस और आबकारी विभाग की है, उसके विरोध में अब ग्रामीण महिलाओं को संगठित होकर आवाज उठानी पड़ रही है। महिलाओं ने अपनी शिकायत पंचायत और पुलिस चौकी तक पहुंचा दी है। अब प्रशासन के सामने केवल शिकायत प्राप्त करने की औपचारिकता नहीं, बल्कि उसकी जांच कर अवैध शराब की बिक्री पर प्रभावी रोक लगाने की चुनौती है।

आबकारी विभाग को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि हैदरपुर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध शराब की बिक्री रोकने के लिए कितनी बार जांच की गई, कितने मामले दर्ज किए गए और शिकायतों के बाद क्या कार्रवाई हुई। महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी जरूरी है, क्योंकि उन्होंने पहले अवैध शराब की बिक्री का विरोध करने पर विवाद होने की बात कही है।

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