बुरहानपुर। नाग पंचमी पर असीरगढ़ किले में हुए धार्मिक आयोजन और गरबा को लेकर शुरू हुआ विवाद अब पुलिस-प्रशासन की चौखट तक पहुंच गया है। हिंदू जागरण मंच एवं सकल हिंदू समाज के लोगों ने सोमवार को कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक के नाम आवेदन देकर AIMIM से जुड़े बताए जा रहे कुछ नेताओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। सबसे ज्यादा नाराजगी गरबा को कथित तौर पर ‘नंगा नाच’ बताए जाने को लेकर है। संगठन ने इसे सनातन धर्म की पूजा पद्धति और धार्मिक परंपरा का अपमान बताते हुए संबंधित लोगों पर जिला बदर और राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत कार्रवाई तक की मांग की है। मामला संवेदनशील है। आवेदन में कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं, लेकिन इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित पक्ष का जवाब भी सामने नहीं आया है।
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विवाद की जड़ असीरगढ़: नाग पंचमी पर पहुंचे थे हजारों श्रद्धालु
हिंदू जागरण मंच के आवेदन के अनुसार नाग पंचमी के अवसर पर हर साल जिले से बड़ी संख्या में सनातनी श्रद्धालु परिवार सहित असीरगढ़ किले स्थित महादेव मंदिर में दर्शन करने पहुंचते हैं। संगठन का कहना है कि इसी धार्मिक अवसर पर आदिवासी समुदाय के श्रद्धालुओं ने कुछ समय के लिए गरबा किया था। इसके बाद गरबा को लेकर कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी सामने आई और मामला तूल पकड़ गया। आवेदन में दावा किया गया है कि जिस स्थान को लेकर विवाद किया जा रहा है, वहां कोई घोषित मस्जिद नहीं है और असीरगढ़ किला पुरातत्व विभाग के अधीन है। संगठन ने इसी आधार पर सवाल उठाया कि धार्मिक आयोजन को लेकर बार-बार विवाद क्यों खड़ा किया जा रहा है।
‘नंगा नाच’ शब्द पर सबसे ज्यादा आक्रोश
शिकायत का सबसे गंभीर हिस्सा गरबा के लिए कथित रूप से इस्तेमाल किए गए ‘नंगा नाच’ शब्द को लेकर है। हिंदू जागरण मंच ने आवेदन में आरोप लगाया कि AIMIM से जुड़े कुछ नेताओं ने गरबा को इस तरह संबोधित किया। संगठन का कहना है कि गरबा धार्मिक आस्था और परंपरा से जुड़ा आयोजन है, इसलिए इसके लिए अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल सनातनी समाज की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला है। संगठन ने प्रशासन से मांग की है कि कथित बयान किसने, कब और किस माध्यम से दिया, इसकी जांच कर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाए।
आवेदन में गंभीर आरोप—‘हर बार त्योहार आते ही माहौल खराब करने की कोशिश’
हिंदू जागरण मंच ने शिकायत को केवल एक बयान तक सीमित नहीं रखा है। आवेदन में आरोप लगाया गया कि कुछ लोग लगातार शहर की शांति भंग करने और समुदायों के बीच सद्भाव बिगाड़ने का प्रयास कर रहे हैं। संगठन ने दावा किया कि 2019, 2025 और 2026 में भी इस तरह की कथित गतिविधियों को लेकर कार्रवाई हुई है। हालांकि इन पूर्व मामलों और कार्रवाइयों का विस्तृत रिकॉर्ड आवेदन के साथ सामने नहीं आया है। संगठन का कहना है कि बुरहानपुर में धार्मिक उत्सवों की शुरुआत होते ही कुछ तत्वों द्वारा भय और तनाव का वातावरण बनाने की कोशिश की जाती है। इससे शहर के साथ ग्रामीण क्षेत्रों से धार्मिक आयोजनों में आने वाले लोग भी असहज महसूस करते हैं।
सोशल मीडिया भी निशाने पर: संगठन बोला—भड़काने के लिए हो रहा इस्तेमाल
आवेदन में सोशल मीडिया को लेकर भी गंभीर चिंता जताई गई है। संगठन का आरोप है कि सोशल मीडिया की व्यापक पहुंच का दुरुपयोग कर धार्मिक मामलों को विवाद का रूप दिया जा रहा है। हिंदू जागरण मंच का कहना है कि सोशल मीडिया पर की गई भड़काऊ या आपत्तिजनक बयानबाजी का असर केवल शहर तक सीमित नहीं रहता। ऐसी सामग्री तेजी से फैलती है और इससे सांप्रदायिक सौहार्द प्रभावित होने का खतरा रहता है। संगठन ने पुलिस से सोशल मीडिया पर प्रसारित संबंधित सामग्री की जांच की मांग भी की है।
जिला बदर से लेकर NSA तक की मांग
हिंदू जागरण मंच एवं सकल हिंदू समाज ने प्रशासन से सामान्य कार्रवाई के बजाय कड़ी प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की मांग की है। आवेदन में संबंधित लोगों पर जिला बदर और राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई करने की मांग करते हुए कहा गया है कि ऐसे मामलों में समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो विवाद बढ़ सकता है। संगठन ने प्रशासन से कहा है कि कथित तौर पर शांति व्यवस्था प्रभावित करने वाले लोगों की गतिविधियों की जांच की जाए और आरोप प्रमाणित होने पर कानून के मुताबिक कठोर कदम उठाए जाएं।
अब प्रशासन की कार्रवाई पर नजर
24 अगस्त को दिया गया यह आवेदन अब पुलिस-प्रशासन के पास है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि कथित आपत्तिजनक टिप्पणी की जांच में क्या सामने आता है और प्रशासन शिकायत पर क्या कार्रवाई करता है। विवाद धार्मिक भावनाओं और सांप्रदायिक सौहार्द से जुड़ा होने के कारण पुलिस के सामने चुनौती केवल आरोपों की जांच की नहीं, बल्कि शहर में शांति व्यवस्था बनाए रखने की भी है।



