बुरहानपुर। जिले में कृषि उपज मंडी के बाहर बिना लाइसेंस अनाज खरीदी का मामला एक बार फिर सामने आया है। गांवों में सीधे किसानों से मक्का खरीदने की शिकायतों के बीच शुक्रवार को मंडी प्रशासन ने ग्राम डोईफोड़िया में कार्रवाई की। मंडी सचिव भूपेंद्र सिंह सोलंकी टीम के साथ मातापुर रोड पहुंचे। यहां एक खरीदार के पास करीब 150 क्विंटल मक्का मिला, जिसकी अनुमानित कीमत 2 लाख 47 हजार 500 रुपए आंकी गई। जांच में संबंधित खरीदार के पास बुरहानपुर कृषि उपज मंडी का अधिकृत व्यापार लाइसेंस नहीं मिला। मंडी प्रशासन ने पंचनामा बनाकर पांच गुना मंडी शुल्क के रूप में 21 हजार 37 रुपए अधिरोपित किए हैं।
इस कार्रवाई ने जिले में मंडी के बाहर चल रही कृषि उपज की खरीदी और उसकी निगरानी पर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। खास बात यह है कि करीब दो साल पहले जिले के 29 किसानों से मक्का खरीदकर लगभग तीन करोड़ रुपए की कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आया था। उस प्रकरण के नामजद आरोपी अब तक पुलिस गिरफ्त से बाहर बताए जा रहे हैं। इसके बावजूद जिले में बिना लाइसेंस उपज खरीदी की शिकायतें सामने आ रही हैं।
Table of Contents
व्यापारियों ने की शिकायत, मंडी सचिव टीम लेकर गांव पहुंचे
बुरहानपुर कृषि उपज मंडी प्रशासन को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ लोग बिना अधिकृत लाइसेंस के गांवों में किसानों से सीधे मक्का खरीद रहे हैं। मंडी के अधिकृत व्यापारियों की ओर से भी इस पर आपत्ति दर्ज कराई गई थी। शिकायतों के आधार पर शुक्रवार को मंडी सचिव भूपेंद्र सिंह सोलंकी ने टीम के साथ ग्राम डोईफोड़िया में जांच की। टीम मातापुर रोड पहुंची, जहां सुरेश पाटील और विनोद महाजन द्वारा मक्का खरीदी किए जाने की जानकारी मिली थी। मौके पर जांच के दौरान 150 क्विंटल मक्का पाया गया। हालांकि मंडी सचिव ने स्पष्ट किया कि निरीक्षण के समय संबंधित व्यक्तियों को प्रत्यक्ष रूप से मक्का खरीदते हुए नहीं देखा गया था। लेकिन इतनी मात्रा में कृषि उपज मिलने के बाद टीम ने उसके संबंध में जांच की। इस दौरान डोईफोड़िया निवासी सुरेश पाटील के पास बुरहानपुर कृषि उपज मंडी का अधिकृत व्यापार लाइसेंस नहीं मिला। मंडी प्रशासन ने मौके पर पंचनामा तैयार कर नियमानुसार कार्रवाई शुरू की।
मक्का मिला, लाइसेंस नहीं; पांच गुना शुल्क लगाया
मंडी प्रशासन ने मौके पर मिले 150 क्विंटल मक्का की अनुमानित कीमत 2 लाख 47 हजार 500 रुपए निर्धारित की। बिना लाइसेंस कृषि उपज की खरीदी के मामले में संबंधित खरीदार पर पांच गुना मंडी शुल्क के रूप में 21 हजार 37 रुपए अधिरोपित किए गए। मंडी सचिव भूपेंद्र सिंह सोलंकी के अनुसार, निर्धारित शुल्क जमा नहीं करने पर उपज जब्त कर प्रकरण न्यायालय में प्रस्तुत किया जाएगा। फिलहाल मक्का का पंचनामा बनाकर उसे संबंधित खरीदार की सुपुर्दगी में रखा गया है। यानी मंडी प्रशासन ने उपज को कार्रवाई के दायरे में लिया है, लेकिन उसे मौके से उठाकर अपने कब्जे में नहीं रखा। अब संबंधित खरीदार द्वारा शुल्क जमा करने और मंडी प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर स्थिति स्पष्ट होगी।
दो साल पहले 29 किसानों से तीन करोड़ की कथित ठगी, आज तक नहीं मिला न्याय
बुरहानपुर जिले में मंडी के बाहर कृषि उपज की खरीदी का विवाद नया नहीं है। करीब दो साल पहले ग्राम फोपनार, बड़सिंगी और तुरकगुराड़ा के 29 किसानों के साथ लगभग तीन करोड़ रुपए की कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आया था। आरोप था कि महाराष्ट्र की एक ट्रेडिंग कंपनी के माध्यम से बाहरी व्यापारियों ने किसानों को मक्का का अच्छा भाव देने का भरोसा दिलाया। किसानों ने अधिक कीमत मिलने की उम्मीद में अपनी उपज बेच दी, लेकिन जब भुगतान का समय आया तो उन्हें रकम नहीं मिली। किसानों ने कई बार संबंधित व्यापारियों से अपनी उपज की राशि मांगी। आरोप है कि उन्हें लगातार भुगतान करने का आश्वासन दिया जाता रहा, लेकिन बकाया रकम नहीं लौटाई गई। आखिरकार किसानों ने पुलिस से शिकायत की। इसके आधार पर महाराष्ट्र के जलगांव जिले की मुक्ताईनगर तहसील के ग्राम कर्की मुकड़ निवासी जितेंद्र वल्लभ महाजन, आरंभ ट्रेडिंग कंपनी के भागीदार डॉ. प्रफुल्ल पिता वासुदेव पाटिल निवासी मलकापुर, जिला बुलढाणा सहित अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी का प्रकरण दर्ज किया गया था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस मामले के नामजद आरोपी अब तक पुलिस गिरफ्त से बाहर हैं। प्रभावित किसान समय-समय पर आरोपियों की गिरफ्तारी और अपनी उपज की बकाया राशि वापस दिलाने की मांग करते रहे हैं।
करोड़ों की ठगी के बाद भी नहीं थमी बाहर खरीदी की शिकायतें, निगरानी पर सवाल
एक तरफ 29 किसान अपनी लगभग तीन करोड़ रुपए की बकाया राशि के लिए संघर्ष कर रहे हैं, दूसरी तरफ जिले में बिना लाइसेंस कृषि उपज खरीदी की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। ऐसे में मंडी प्रशासन की निगरानी व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। आखिर गांवों में कृषि उपज खरीदने वाले व्यापारियों के लाइसेंस की जांच कितनी नियमित रूप से की जाती है? बिना अधिकृत लाइसेंस खरीदी की शिकायतें लगातार मिलने के बावजूद ऐसे मामलों का समय रहते पता क्यों नहीं चल पाता? और सबसे महत्वपूर्ण, किसानों को उपज बेचने के बाद सुरक्षित एवं समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं? हालांकि डोईफोड़िया में मिले मक्का को किसी धोखाधड़ी से जोड़ने का प्रमाण सामने नहीं आया है, लेकिन पुराने प्रकरण को देखते हुए कृषि उपज की खरीदी में व्यापारियों की पहचान और भुगतान की जवाबदेही सुनिश्चित करना जरूरी है।
मंडी के बाहर सौदे में किसानों के लिए भुगतान का जोखिम
किसानों को कई बार गांव में ही उपज बेचने पर परिवहन खर्च और समय की बचत होती है। कुछ खरीदार बेहतर भाव देने का प्रस्ताव भी रखते हैं। लेकिन यदि खरीदार की पहचान, लाइसेंस और भुगतान की शर्तों की जांच नहीं की जाए तो किसान आर्थिक जोखिम में पड़ सकते हैं। बुरहानपुर जिले के 29 किसानों से जुड़ा पुराना धोखाधड़ी प्रकरण इसका गंभीर उदाहरण है। किसानों ने अच्छा भाव मिलने की उम्मीद में उपज बेची थी, लेकिन कथित रूप से भुगतान नहीं मिलने के कारण उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। ऐसे मामलों में जरूरी है कि किसान खरीदार का अधिकृत लाइसेंस जांचें, खरीदी की लिखित रसीद प्राप्त करें और भुगतान की शर्तें स्पष्ट रखें।
बुरहानपुर मंडी में सोयाबीन 6800 रुपए क्विंटल तक बिका, सचिव बोले—मंडी में ही बेचें उपज
मंडी सचिव भूपेंद्र सिंह सोलंकी ने बताया कि बुरहानपुर कृषि उपज मंडी में सोयाबीन का भाव 6800 रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंचा है। उन्होंने इसे मंडी का रिकॉर्ड स्तर बताते हुए दावा किया कि इतना भाव दूसरी मंडियों में नहीं मिल रहा है। उन्होंने किसानों से अपील की है कि वे अपनी कृषि उपज मंडी में लाकर बेचें, ताकि अधिकृत व्यापारियों के माध्यम से खरीदी हो और लेनदेन का रिकॉर्ड उपलब्ध रहे।
तीन बड़े सवाल, जिनका जवाब जरूरी
- पहला सवाल: जब बिना लाइसेंस खरीदी की शिकायतें लगातार मिल रही थीं, तो ऐसे खरीदारों की पहचान और जांच के लिए पहले क्या कार्रवाई की गई?
- दूसरा सवाल: करीब तीन करोड़ रुपए की कथित धोखाधड़ी के मामले में 29 किसानों को उनकी बकाया राशि कब मिलेगी और नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी में देरी क्यों हो रही है?
- तीसरा सवाल: क्या मंडी प्रशासन अब जिले के अन्य गांवों में भी बिना लाइसेंस कृषि उपज खरीदी की जांच करेगा या कार्रवाई डोईफोड़िया तक ही सीमित रहेगी?
मंडी सचिव का पक्ष: शुल्क जमा नहीं किया तो न्यायालय में पेश करेंगे प्रकरण
मंडी सचिव भूपेंद्र सिंह सोलंकी के अनुसार, व्यापारियों से मिली शिकायत के बाद डोईफोड़िया में जांच की गई। मौके पर 150 क्विंटल मक्का पाया गया। संबंधित खरीदार के पास मंडी का अधिकृत लाइसेंस नहीं होने पर पंचनामा बनाकर पांच गुना मंडी शुल्क अधिरोपित किया गया है। शुल्क जमा नहीं होने की स्थिति में नियमानुसार आगे की कार्रवाई कर मामला न्यायालय में प्रस्तुत किया जाएगा।

