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मंडी बोर्ड के कर्मचारियों ने जताया विरोध, कहा– “बिना मोबाइल, नेटवर्क और बिजली के कैसे दर्ज करें उपस्थिति?”

संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने लिखा पत्र, आदेश को तानाशाही करार देते हुए तत्काल स्थगन की मांग

On: August 4, 2025 10:06 AM
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बुरहानपुर। मध्य प्रदेश मंडी बोर्ड में इन दिनों एक आदेश को लेकर बवाल मचा है। बोर्ड द्वारा 1 अगस्त 2025 से कर्मचारियों की उपस्थिति मोबाइल ऐप के ज़रिए दर्ज करने के आदेश दिए गए हैं, जिसे लेकर संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने खुलकर विरोध जताया है।
मोर्चा के संयोजकों ने मंडी बोर्ड के प्रबंध संचालक को ज्ञापन सौंपते हुए इसे “बिना तकनीकी आकलन का एकतरफा फैसला” बताया और आदेश को तत्काल प्रभाव से स्थगित करने की मांग की है।
न स्मार्टफोन, न नेटवर्क… फिर कैसे दर्ज करें उपस्थिति? – कर्मचारियों की पीड़ा
संयुक्त संघर्ष मोर्चा के संयोजक बीबी फौजदार, संतोष सिंह दीक्षित, अंगिरा प्रसाद पांडे, रामवीर सिंह किरार, में सिंह सोलंकी और वीरेंद्र नरवरिया ने कहा प्रदेश की सैकड़ों मंडियों में कर्मचारी अभी भी बेसिक मोबाइल फोन इस्तेमाल करते हैं। दूरस्थ इलाकों में न तो नेटवर्क है, न बिजली की नियमित आपूर्ति। ऐसे में यह आदेश ज़मीनी हकीकत से पूरी तरह कटा हुआ है।
बिना आकलन, बिना सलाह… सीधे आदेश जारी
9 जनवरी 2025 को मंडी बोर्ड ने बायोमेट्रिक मशीनों से उपस्थिति दर्ज करने का आदेश दिया था। करोड़ों रुपए की लागत से मशीनें खरीदी गईं और मंडियों में लगाई गईं। 22 जुलाई 2025 को नया आदेश आया – अब से मोबाइल ऐप से उपस्थिति दर्ज की जाए।
मोर्चा का सवाल– जब बायोमेट्रिक व्यवस्था पहले से मौजूद है, तो फिर मोबाइल ऐप की ज़रूरत क्यों? और अगर ज़रूरत है तो संसाधन पहले क्यों नहीं दिए गए?
संघर्ष मोर्चा की मुख्य आपत्तियाँ
• नेटवर्क कनेक्टिविटी की समस्या: कई आदिवासी व दूरदराज के क्षेत्रों में इंटरनेट उपलब्ध नहीं है।
• एंड्रॉयड मोबाइल का अभाव: बड़ी संख्या में मंडी कर्मचारियों के पास स्मार्टफोन ही नहीं है।
• बिजली की अनियमित आपूर्ति: चार्जिंग की समस्या से ऐप आधारित उपस्थिति असंभव।
• बिना मूल्यांकन करोड़ों खर्च: पहले बायोमेट्रिक मशीनों पर भारी खर्च किया गया, अब नई प्रणाली।
• अन्य विभागों में नहीं लागू: मध्यप्रदेश शासन के किसी अन्य विभाग में यह अनिवार्यता नहीं है।
किसानों को भी हो रहा नुकसान – मंडी योजना ऐप पर भी सवाल
संघर्ष मोर्चा ने यह भी बताया कि मंडी बोर्ड द्वारा लागू किए गए “मंडी योजना ऐप” से किसानों को भी नुकसान हो रहा है। फसल विक्रय की समय सीमा बांध दी गई है। किसान समय पर मंडी नहीं पहुंच पाते, जिससे उन्हें घाटा उठाना पड़ता है।
जिओ-मैपिंग पर आपत्ति – बिना संसाधन भेजा जा रहा है कर्मचारियों को
कर्मचारियों को कृषि अवसंरचना निधि योजना के अंतर्गत जिओ-मैपिंग करने के लिए दूरदराज के क्षेत्रों में भेजा जा रहा है, जबकि उनके पास न तो GPS सक्षम मोबाइल है, न ही यात्रा भत्ता या सुरक्षा संसाधन।
अंत में बड़ा सवाल – क्यों सिर्फ मंडी बोर्ड में लागू हो रहा ये ऐप?
संघर्ष मोर्चा ने स्पष्ट कहा कि मध्य प्रदेश शासन के 56 विभागों में कहीं भी यह ऐप अनिवार्य नहीं है। तो फिर सिर्फ मंडी बोर्ड को ही प्रयोगशाला क्यों बनाया जा रहा है? – मोर्चा की सीधी चुनौती
संघर्ष मोर्चा की प्रमुख मांगें:
1. मोबाइल ऐप से उपस्थिति दर्ज करने का आदेश तुरंत स्थगित किया जाए
2. पूर्व की व्यवस्था (बायोमेट्रिक या मैनुअल) को ही यथावत रखा जाए
3. भविष्य में कोई भी तकनीकी निर्णय लेने से पहले क्षेत्रीय परिस्थितियों का पूर्ण अध्ययन हो
4. किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए मंडी योजना ऐप में समय सीमा संबंधी शर्तों में ढील दी जाए

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