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मां बोलीं – मेरे ही बेटे ने मुझ पर किया घातक हमला, कार-स्कूल-मकान छीनने की कोशिश; कोर्ट ने कहा– मां की संपत्ति पर बेटे का कोई हक नहीं

82 साल की मां ने बेटे को घर और स्कूल से निकाला, बुरहानपुर वरिष्ठ नागरिक अधिकरण का ऐतिहासिक फैसला

On: October 9, 2025 12:53 PM
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82 साल की मां ने बेटे को घर से निकाला | बुरहानपुर फैसला

बुरहानपुर। वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए बुरहानपुर वरिष्ठ नागरिक अधिकरण ने सोमवार 6 अक्टूबर को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया। शहर की जानी-मानी शिक्षाविद और 82 वर्षीय प्रो. कुसुम परिहार की याचिका पर, उनके तलाकशुदा बड़े बेटे विजय परिहार को मां और मां की संपत्ति से बेदखल करने का आदेश पारित हुआ।

क्या है पूरा मामला?

प्रो. कुसुम परिहार के पति का कुछ साल पहले निधन हो गया था। बड़ी उम्र और अकेलेपन का फायदा उठाते हुए, उनके बड़े बेटे विजय परिहार ने मां पर ही जानलेवा हमला किया। आरोप है कि विजय ने कार, डाकवाड़ी स्थित मकान, और 4 एकड़ जमीन पर बने इंपीरियल अकादमी स्कूल भवन सहित चल-अचल संपत्तियों पर कब्जा करने की कोशिश की। मां कुसुम परिहार ने अधिवक्ता मनोज कुमार अग्रवाल के जरिए मई 2025 में वरिष्ठ नागरिक अधिकरण में प्रकरण दायर किया।

फैसले में क्या कहा गया?

हाइकोर्ट के निर्देशानुसार 4 महीने चली सुनवाई के बाद अधिकरण ने 8 अक्टूबर को आदेश जारी किया। विजय परिहार को मां की संपत्ति से पूरी तरह बेदखल किया जाए। कार, मकान, स्कूल भवन व जमीन तत्काल 7 दिनों के भीतर प्रो. कुसुम परिहार को लौटाई जाए। विजय को मां और संपत्ति से दूर रहने के आदेश। थाना शिकारपुरा को निर्देश – आदेश का पालन करवाए।

छोटे बेटे ने थामा मां का हाथ

प्रो. कुसुम परिहार का छोटा बेटा संजय परिहार सूरत में नौकरी करता है। मां ने पहले छोटे बेटे को परेशान नहीं करना चाहा। लेकिन जब हालात बिगड़े, तब संजय ने आकर मां को सहारा दिया। वकील और बेटे की मदद से आखिरकार प्रो. कुसुम परिहार मैडम को इंसाफ मिला।

कानून का सख्त संदेश

वरिष्ठ नागरिक अधिकरण का यह फैसला उन बेटों-बेटियों के लिए सबक है, जो बुजुर्ग माता-पिता की संपत्ति हड़पने या उन्हें प्रताड़ित करने की कोशिश करते हैं। फैसले से साफ है – मां-बाप की संपत्ति पर बेटों का कोई स्वतः अधिकार नहीं। माता-पिता चाहें तो उन्हें बेदखल भी कर सकते हैं। पुलिस को आदेश – बुजुर्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करें।

अधिवक्ता बोले – बुजुर्गों की जीत

अधिवक्ता मनोज अग्रवाल ने कहा – यह फैसला न केवल परिहार मैडम के लिए राहत है बल्कि पूरे समाज के लिए नजीर बनेगा। वरिष्ठ नागरिकों को अब डरने की जरूरत नहीं। कानून उनके साथ है।

देश के बुजुर्गों के लिए सबक
  • अकेले रहने वाले बुजुर्ग यदि प्रताड़ित हों तो तुरंत वरिष्ठ नागरिक अधिकरण का दरवाजा खटखटाएं।
  • कानून उन्हें जीवन की रक्षा और संपत्ति पर संपूर्ण अधिकार देता है।
  • प्रताड़ना करने वाले बच्चों को बेदखल किया जा सकता है।

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