बुरहानपुर। मध्यप्रदेश में अब मेडिकल स्टोर पर मनमानी नहीं चलेगी। स्टेट फार्मेसी काउंसिल ने सख्त निर्देश जारी करते हुए साफ कर दिया है कि अब दवा बेचने का अधिकार केवल पंजीकृत फार्मासिस्ट को होगा। गैर-पंजीकृत व्यक्ति द्वारा दवा बेचने या बिना फार्मासिस्ट मेडिकल स्टोर चलाने पर सीधी कार्रवाई होगी। दोषी दुकानदार को 3 महीने जेल और 2 लाख रुपये तक का जुर्माना भुगतना पड़ेगा।
पहले सिर्फ 1000 जुर्माना था, अब नियम और सख्त
अब तक फार्मेसी एक्ट 1948 की धारा 42 में केवल 1000 रुपये जुर्माने और 6 महीने जेल का प्रावधान था। इसी वजह से दुकानदार अक्सर नियमों की अनदेखी करते थे। अब नए प्रावधान के तहत जन विश्वास संशोधन अधिनियम 2023 लागू कर दंड को और कड़ा कर दिया गया है।
बड़ा हादसा बना सख्ती की वजह
- हाल ही में प्रदेश में जहरीले कफ सिरप पीने से 22 मासूमों की मौत हो चुकी है।
- छिंदवाड़ा में 19, बैतूल में 3 और पांढुर्ना में 1 बच्चे की मौत हुई।
- अब भी 4 बच्चे नागपुर अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं।
इस घटना ने प्रदेश को हिला दिया। जांच में सामने आया कि कई मेडिकल दुकानों पर बिना फार्मासिस्ट दवा बेची जा रही थी।
काउंसिल का साफ संदेश
- मेडिकल स्टोर, अस्पताल और दवा विक्रेताओं को चेतावनी दी गई है।
- हर मेडिकल स्टोर पर फार्मासिस्ट की मौजूदगी अनिवार्य होगी।
- दवा वितरण में लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।
- नियम तोड़ने वालों पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी।
जनता को मिलेगा सीधा फायदा
इस फैसले से मरीजों को दवाइयों की सही जानकारी और सुरक्षित खुराक मिलेगी। साथ ही जहरीली और नकली दवाओं पर लगाम लगेगी। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि इससे प्रदेश में जनस्वास्थ्य सुरक्षा मजबूत होगी।
अब मेडिकल स्टोर पर मनमानी नहीं
- दवा सिर्फ फार्मासिस्ट ही देगा।
- नियम तोड़ने पर जेल + भारी जुर्माना तय।
- बच्चों की मौत जैसी घटनाओं के बाद सरकार और काउंसिल सख्त।