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निजी अस्पतालों पर अब ‘सख्ती का ऑपरेशन’ — पारदर्शिता नहीं तो कार्रवाई तय! आयुष्मान योजना में मनमानी पर कलेक्टर का डंडा

- एडीएम, एसडीएम और सीईओ ने अस्पताल संचालकों की बैठक में दिए सख्त निर्देश

On: October 13, 2025 8:12 PM
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निजी अस्पतालों पर प्रशासन की सर्जरी | बुरहानपुर में सख्ती शुरू
  • आयुष्मान योजना के तहत मनमानी वसूली पर होगी जांच और कार्रवाई

बुरहानपुर। अब जिले में निजी अस्पतालों की मनमानी नहीं चलेगी। आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीजों से मनमाने पैसे वसूलने और नियमों का उल्लंघन करने वाले अस्पतालों पर अब प्रशासन ने शिकंजा कस दिया है। कलेक्टर हर्ष सिंह के निर्देश पर सोमवार को निजी अस्पतालों के संचालकों की बैठक बुलाई गई, जिसमें एडीएम वीरसिंह चौहान, एसडीएम अजमेर सिंह गौड़, और जिला पंचायत सीईओ सृजन वर्मा ने अस्पताल संचालकों को साफ चेतावनी दी नियमों का पालन करो, पारदर्शिता रखो — वरना लाइसेंस रद्द करने से भी पीछे नहीं हटेंगे!

विधायक की शिकायत के बाद प्रशासन हरकत में आया

तीन दिन पहले नेपानगर विधायक मंजू दादू ने कलेक्टर से शिकायत की थी कि जिले में कुछ निजी अस्पताल आयुष्मान कार्डधारकों से जबरन जांच और इलाज के नाम पर 10 से 20 हजार रुपये तक वसूल रहे हैं। कलेक्टर ने तुरंत सीएमएचओ डॉ. आर.के. वर्मा को जांच के निर्देश दिए थे। सोमवार को उसी के बाद प्रशासन ने यह ‘समीक्षा बैठक’ बुलाई, जिसमें अस्पतालों को दो टूक निर्देश दिए गए, अब कोई भी “कैश पर कैश” सिस्टम नहीं चलेगा, हर बिल की पारदर्शिता जरूरी होगी।

अस्पतालों के लिए सख्त नियम — अब ये करना होगा जरूरी

बैठक में तय किया गया कि —

  • जिले के आठ निजी अस्पताल, जिन्हें आयुष्मान योजना का कार्य सौंपा गया है,
    अब अपने परिसर में रेट लिस्ट अनिवार्य रूप से प्रदर्शित करेंगे।
  • रेट लिस्ट हिन्दी में लिखी होगी, ताकि हर मरीज उसे समझ सके।
  • मरीज के डिस्चार्ज के समय बिल की पूरी डिटेल देना अनिवार्य होगा, ताकि किसी भी प्रकार की मनमानी रोकी जा सके।
  • यदि इलाज के दौरान अतिरिक्त जांचें या खर्च जोड़ा जाता है, तो उसे भी आयुष्मान कार्ड में दर्ज करना होगा।
  • ऐसे निजी चिकित्सालय जहाँ योजना लागू नहीं है, उन्हें भी इलाज की दर सूची और सेवाओं का बोर्ड प्रदर्शित करना अनिवार्य किया गया है।
जांच के घेरे में कई अस्पताल, एक ‘गुड अस्पताल’ भी शामिल

सीएमएचओ डॉ. आर.के. वर्मा ने बताया कि कलेक्टर को मिली शिकायतों के बाद कई अस्पतालों की जांच की जा रही है। जिन संस्थानों की भूमिका संदिग्ध पाई जाएगी, उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। शिकायतों में एक गुड हॉस्पिटल भी शामिल है। सरकार की योजना गरीब मरीजों के लिए है, किसी के लाभ का माध्यम नहीं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि आगे से अगर किसी अस्पताल ने नियमों का उल्लंघन किया तो न तो चेतावनी दी जाएगी, सीधे लाइसेंस निलंबन की कार्रवाई होगी।

प्रशासन ने दिया सख्त संदेश

एडीएम वीरसिंह चौहान, एसडीएम अजमेर सिंह गौड़ और सीईओ सृजन वर्मा ने कहा- अब हर अस्पताल को पारदर्शिता के साथ कार्य करना होगा। यह अभियान मरीजों की सुरक्षा और विश्वास बहाली के लिए शुरू किया गया है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन मिलकर नियमित निरीक्षण भी करेगा, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि नियमों का पालन हो रहा है या नहीं।

बैठक में रहे अधिकारी और संचालक

बैठक में जिला पंचायत सीईओ सृजन वर्मा, अपर कलेक्टर वीरसिंह चौहान, एसडीएम अजमेर सिंह गौड़, सीएमएचओ डॉ. आर.के. वर्मा, निजी अस्पताल संचालकगण और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

बैठक में तय हुए बिंदु
  • सभी आयुष्मान अस्पतालों को रेट लिस्ट प्रदर्शित करनी होगी।
  • डिस्चार्ज के समय मरीज को बिल और इलाज की जानकारी लिखित में देना अनिवार्य।
  • जांच या अतिरिक्त खर्च को आयुष्मान कार्ड पर दर्ज करना जरूरी।
  • हिन्दी भाषा में डिस्प्ले बोर्ड लगाना अनिवार्य।
  • लापरवाही पर होगी सख्त कार्रवाई — जांच, जुर्माना और लाइसेंस निलंबन तक।

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