बुरहानपुर। प्राकृतिक आपदा से फसल गंवा चुके बुरहानपुर के किसानों को शुक्रवार को बड़ी आर्थिक राहत मिली है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सिंगल क्लिक से जिले के 309 प्रभावित किसानों के खातों में ₹3 करोड़ 38 लाख से अधिक की राहत राशि ट्रांसफर की। यह राशि सीधे उनके बैंक खातों में पहुंच गई है।
वीडियों कांफ्रेंसिंग के दौरान, बुरहानपुर विधायक एवं पूर्व मंत्री अर्चना चिटनीस ने मुख्यमंत्री के सामने जिले की मुख्य मांग को एक बार फिर पुरजोर तरीके से रखा। उन्होंने उद्यानिकी फसलों, विशेषकर केले को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में प्राथमिकता से शामिल करने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह विषय प्रक्रियाधीन है।
सर्वाधिक मुआवजा बुरहानपुर के किसान को
राहत राशि वितरण के बाद श्रीमती चिटनीस ने किसानों की ओर से मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि एक संवेदनशील मुख्यमंत्री ने किसानों का दर्द समझा है।
- रिकॉर्ड राहत: चिटनीस ने बताया कि इस बार प्रदेश में सबसे अधिक राहत राशि ₹3 लाख 60 हजार बुरहानपुर के किसान पांडुरंग विट्ठल को मिली है।
- केले पर विशेष प्रावधान: उन्होंने याद दिलाया कि भाजपा सरकार ने केले की फसल की 50 प्रतिशत से अधिक क्षति पर दी जाने वाली राहत राशि की सीमा ₹3 लाख से बढ़ाकर ₹6 लाख कर दी है। इसके तहत ₹2 लाख प्रति हेक्टेयर की दर से सहायता दी जा रही है। यह सरकार की किसान-हितैषी सोच को दर्शाता है।
- पुरानी सहायता का जिक्र: चिटनीस ने बताया कि बुरहानपुर में 27-28 अगस्त और 16-17 सितंबर 2025 को आए आंधी-तूफान से केले की फसल को भारी नुकसान हुआ था, जिसके लिए तत्काल सर्वे कराया गया और आरबीसी 6-4 के तहत यह राशि जारी की गई है। उन्होंने यह भी बताया कि सितंबर 2025 में 433 किसानों को ₹5 करोड़ से अधिक और जुलाई 2024 में भी लगभग ₹65 करोड़ का मुआवजा वितरित किया गया था।
श्रीमती चिटनीस ने जोर देकर कहा कि संकट की घड़ी में भारतीय जनता पार्टी की सरकार हमेशा किसानों के साथ खड़ी रही है। यह मुआवजा किसानों को अगली फसल की तैयारी में बड़ा सहारा देगा।
मांग पूरी होने का किसानों को इंतजार
मुख्यमंत्री द्वारा ‘प्रक्रियाधीन’ बताए जाने के बावजूद, केले की फसल को बीमा योजना में शामिल करने की मांग बुरहानपुर के किसानों के लिए सबसे महत्वपूर्ण है। क्षेत्र में केले की फसल बड़े पैमाने पर ली जाती है, और हर साल आंधी-तूफान से होने वाले भारी नुकसान को देखते हुए, किसान फसल बीमा का सुरक्षा कवच चाहते हैं। यदि यह मांग पूरी होती है, तो यह जिले के हजारों किसानों के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि होगी।
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