Homeबुरहानपुरकागजों में बंट गया राशन, ग्रामीणों के...

कागजों में बंट गया राशन, ग्रामीणों के हाथ खाली: पर्ची काटकर पोर्टल पर चढ़ाने का आरोप, दुकान पर लटका रहा ताला

सागफाटा में राशन वितरण पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा; दावा—दो माह की जगह एक माह का राशन, वह भी आधे गांव को, अब सेल्समैन बदलने की मांग

बुरहानपुर। आदिवासी बहुल नेपानगर क्षेत्र में सार्वजनिक वितरण प्रणाली की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्राम सागफाटा में रविवार को राशन लेने पहुंचे ग्रामीणों को दुकान बंद मिली। सुबह से लोग राशन दुकान खुलने का इंतजार करते रहे, लेकिन संचालक नहीं पहुंचा। आखिरकार ग्रामीणों को खाली हाथ घर लौटना पड़ा। इसी दौरान उनका गुस्सा फूट पड़ा और राशन वितरण को लेकर कई गंभीर आरोप सामने आए।

Sadaiv News
सागफाटा में राशन दुकान के बाहर ग्रामीणों ने वितरण व्यवस्था को लेकर नाराजगी जताई।

ग्रामीणों का आरोप है कि राशन दुकान नियमित नहीं खुलती। इससे भी गंभीर आरोप यह है कि कई हितग्राहियों की पर्ची काटने के बाद पोर्टल पर राशन वितरण दर्ज कर दिया जाता है, लेकिन उन्हें वास्तविक रूप से पूरा अनाज नहीं दिया जाता। ग्रामीणों का कहना है कि आदिवासी और कम पढ़े-लिखे हितग्राही तकनीकी प्रक्रिया की जानकारी नहीं होने के कारण यह पता तक नहीं लगा पाते कि उनके नाम पर सिस्टम में कितना राशन वितरित दिखाया जा चुका है। अब ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं—जब पोर्टल पर राशन वितरण दर्ज है तो अनाज हितग्राहियों तक क्यों नहीं पहुंचा? अगर पूरा राशन बांटा गया है तो ग्रामीण खाली हाथ क्यों घूम रहे हैं? हालांकि ग्रामीणों के इन आरोपों की वास्तविकता विभागीय जांच और वितरण रिकॉर्ड के सत्यापन के बाद ही स्पष्ट होगी।

दो माह का राशन आया तो मिला कितना? यहीं से खड़ा हुआ विवाद

ग्रामीणों का दावा है कि जिले में दो माह का राशन वितरण किया गया, लेकिन सागफाटा में कई हितग्राहियों को सिर्फ एक माह का राशन मिला। आरोप है कि वह भी पूरे गांव को नहीं मिल पाया और करीब आधे गांव के लोग राशन से वंचित रह गए। ऐसे में सबसे महत्वपूर्ण सवाल राशन के आवंटन और वास्तविक वितरण के मिलान का है। विभाग यदि दुकान का स्टॉक रजिस्टर, ऑनलाइन वितरण रिकॉर्ड और हितग्राहियों के बयान का मिलान करे तो स्थिति स्पष्ट हो सकती है कि गांव के लिए कितना राशन आया, पोर्टल पर कितना वितरित बताया गया और वास्तव में हितग्राहियों को कितना अनाज मिला।

सुबह से दुकान के बाहर इंतजार, सेल्समैन नहीं आया

रविवार को ग्रामीण राशन लेने दुकान पहुंचे थे। काफी देर तक लोग दुकान खुलने का इंतजार करते रहे, लेकिन ताला नहीं खुला। ग्रामीणों का कहना है कि राशन दुकान नियमित नहीं खुलने से उन्हें बार-बार काम छोड़कर चक्कर लगाने पड़ते हैं। आदिवासी बहुल गांवों में कई परिवार सार्वजनिक वितरण प्रणाली से मिलने वाले अनाज पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में दुकान समय पर नहीं खुलने से सबसे ज्यादा परेशानी उन्हीं परिवारों को उठानी पड़ती है। ग्रामीणों का आरोप है कि यह समस्या एक-दो दिन की नहीं है। दुकान संचालक अपनी सुविधा से दुकान खोलता है। ग्रामीण राशन के लिए पहुंचते हैं तो कई बार दुकान बंद मिलती है।

ग्रामीण का दावा—98 क्विंटल गेहूं और 22 क्विंटल चावल आया

ग्राम सागफाटा निवासी जगदीश कनासे ने दावा किया कि ऑनलाइन जानकारी देखने पर गांव के लिए 98 क्विंटल गेहूं और 22 क्विंटल चावल आने की जानकारी मिली है। कनासे का आरोप है कि दुकान संचालक कभी-कभी ही राशन दुकान खोलता है। हितग्राहियों की पर्ची काटने के बाद पोर्टल पर राशन चढ़ा दिया जाता है, लेकिन कई ग्रामीणों को राशन नहीं मिलता। यही आरोप पूरे मामले को गंभीर बनाता है। यदि पोर्टल पर किसी हितग्राही के नाम राशन वितरण दर्ज हो चुका है और संबंधित हितग्राही राशन नहीं मिलने की बात कह रहा है तो वितरण रिकॉर्ड की जांच जरूरी हो जाती है।

बड़ा सवाल—पोर्टल पर ‘वितरित’ तो हितग्राही को मिला या नहीं?

सागफाटा मामले में सिर्फ दुकान बंद रहने की शिकायत नहीं है। ग्रामीणों का मुख्य आरोप ऑनलाइन रिकॉर्ड और वास्तविक वितरण के बीच कथित अंतर को लेकर है। इसकी जांच के लिए विभाग को हितग्राहीवार वितरण रिकॉर्ड देखना होगा। किस कार्डधारक के नाम कितना गेहूं-चावल दर्ज हुआ, किस तारीख को वितरण दिखाया गया और संबंधित परिवार को वास्तव में कितना राशन मिला—इन तीन बिंदुओं का मिलान ही स्थिति साफ कर सकता है। अगर रिकॉर्ड और ग्रामीणों के बयान में अंतर मिलता है तो यह महज दुकान समय पर नहीं खोलने की लापरवाही तक सीमित मामला नहीं रहेगा। वहीं यदि रिकॉर्ड सही मिलता है तो ग्रामीणों की शिकायतों की वास्तविक वजह भी सामने आ सकेगी।

आदिवासी क्षेत्र में निगरानी कमजोर क्यों?

मामले ने खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की मैदानी निगरानी को भी सवालों के घेरे में ला दिया है। ग्रामीण क्षेत्र में राशन दुकान कितने दिन और कितने घंटे खुल रही है, स्टॉक कितना पहुंचा, वितरण कितना हुआ और पात्र हितग्राही को निर्धारित मात्रा मिली या नहीं—इनकी नियमित निगरानी विभाग की जिम्मेदारी है। नेपानगर क्षेत्र के गांवों से राशन वितरण को लेकर पहले भी शिकायतें सामने आती रही हैं। इसके बावजूद यदि सागफाटा में ग्रामीणों को राशन के लिए दुकान खुलने का इंतजार करना पड़ रहा है तो मैदानी स्तर पर निरीक्षण की व्यवस्था कितनी प्रभावी है, यह सवाल उठना स्वाभाविक है।

ग्रामीण बोले—सेल्समैन बदलिए, व्यवस्था सुधारिए

लगातार परेशानी से नाराज ग्रामीणों ने अब राशन दुकान के सेल्समैन को बदलने की मांग की है। उनका कहना है कि राशन वितरण नियमित और पारदर्शी होना चाहिए, ताकि हितग्राहियों को अपने हिस्से के अनाज के लिए बार-बार दुकान के चक्कर न काटने पड़ें। ग्रामीणों की मांग है कि अधिकारी गांव में पहुंचकर केवल रिकॉर्ड देखकर जांच पूरी न करें, बल्कि कार्डधारकों के घरों तक जाकर बयान लें। इसके बाद पोर्टल पर दर्ज वितरण, उपलब्ध स्टॉक और ग्रामीणों को मिले वास्तविक राशन का मिलान किया जाए।

जांच का सीधा फॉर्मूला: आवंटन बनाम पोर्टल बनाम ग्रामीण

सागफाटा के मामले की तह तक पहुंचने के लिए तीन आंकड़ों का मिलान अहम होगा—गांव के लिए कितना राशन आवंटित हुआ, पोर्टल पर कितना वितरित दर्ज है और ग्रामीणों को वास्तव में कितना मिला। ग्रामीण जगदीश कनासे के बताए 98 क्विंटल गेहूं और 22 क्विंटल चावल के आंकड़े की भी विभागीय रिकॉर्ड से पुष्टि जरूरी है। यदि यह आवंटन सही है तो अगला सवाल होगा कि यह अनाज किन-किन हितग्राहियों को और कितनी मात्रा में वितरित दिखाया गया। यही जांच तय करेगी कि ग्रामीणों का आक्रोश केवल अनियमित दुकान संचालन को लेकर है या राशन वितरण में वास्तव में कोई बड़ी गड़बड़ी हुई है।

अधिकारी बोले—गांव पहुंचेंगे, बयान लेंगे; गड़बड़ी मिली तो कार्रवाई

कनिष्ठ नागरिक आपूर्ति अधिकारी गिरीश नागपुरे ने कहा— उपभोक्ताओं को समय पर राशन वितरण किया जाना चाहिए। सोमवार या मंगलवार को सागफाटा में विजिट कर स्थिति का पता लगाएंगे। ग्रामीणों के बयान दर्ज करेंगे। अगर किसी तरह की मनमानी या लापरवाही की जा रही है तो कार्रवाई की जाएगी। अब विभाग की प्रस्तावित जांच पर ग्रामीणों की निगाह है। जांच में सबसे अहम सवाल यही रहेगा कि पोर्टल पर दर्ज राशन वास्तव में हितग्राहियों तक पहुंचा या नहीं। इसका जवाब स्टॉक और ऑनलाइन रिकॉर्ड से ज्यादा उन ग्रामीणों के बयान से निकलेगा, जिनके नाम पर राशन वितरण दर्ज होने का आरोप लगाया जा रहा है।

spot_img
spot_img
spot_img

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

0FansLike
0FollowersFollow
0SubscribersSubscribe
- Advertisement -spot_img
- Advertisement -spot_img
- Advertisement -spot_img

Latest Articles