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त्याग पूर्वक उपभोग ही प्रकृति संरक्षण का उपाय है- प्रमोद झा

बुरहानपुर। सृष्टि सेवा संकल्प जिला इकाई बुरहानपुर द्वारा “वृक्ष बैंक” का शुभारंभ, वृक्षारोपण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली संस्थाओं का अभिनंदन समारोह एवं “वृक्षारोपण जन आंदोलन कैसे बने इस विषय पर “परिचर्चा” का आयोजन श्री सकलपंच लेवा पाटीदार मंगल भवन में सम्पन्न हुआ। सर्वप्रथम अतिथियों द्वारा “वृक्ष बैंक” का शुभारंभ किया गया। परिचर्चा […]

बुरहानपुर। सृष्टि सेवा संकल्प जिला इकाई बुरहानपुर द्वारा “वृक्ष बैंक” का शुभारंभ, वृक्षारोपण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली संस्थाओं का अभिनंदन समारोह एवं “वृक्षारोपण जन आंदोलन कैसे बने इस विषय पर “परिचर्चा” का आयोजन श्री सकलपंच लेवा पाटीदार मंगल भवन में सम्पन्न हुआ। सर्वप्रथम अतिथियों द्वारा “वृक्ष बैंक” का शुभारंभ किया गया। परिचर्चा कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा वृक्षपूजन व दीप प्रज्वलन कर मंत्रोच्चार के साथ किया गया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान से किया गया। मंच पर कपड़े के बेनर का उपयोग किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित सभी महानुभावों को पत्तों से निर्मित प्राकृतिक बैच भी लगाया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ चार्टर्ड अकाउंटेंट पंकज सोमैया ने की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ जनरल फिजिशियन डॉ आशीष जैन रहे। कार्यक्रम के मुख्यवक्ता विगत 30 वर्षों से संघ के प्रचारक रहे एवं सृष्टि सेवा संकल्प के राष्ट्रीय मार्गदर्शक प्रमोद झा रहे।
कार्यक्रम के मुख्यवक्ता प्रमोद झा ने बताया कि त्याग पूर्वक भोग करेंगे तभी प्रकृति की रक्षा कर सकेंगे। हमारे ऋषियों ने बताया हमारा प्रकृति के साथ माँ का संबंध है माता भूमि पुत्रोहम पृथ्वीया। हमारी 80% संसाधनों की पूर्ति वृक्षों से ही होती है। और देश की 50% समस्याओं का हल भी वृक्षों से ही है।
सर्वप्रथम धरती पर सात द्वीप बने जिनका नाम वृक्षों के नाम पर रखा गया। हम जिस द्वीप पर रहते है उसका नाम जंबूद्वीप है। जामुन के वृक्षों की अधिकता के कारण जंबूद्वीप नाम रखा गया। वृक्ष हमें सिखाते है कि अपकार करने वाले का भी उपकार करना चाहिए। चंदन का वृक्ष हमें शिक्षा देता है कि विसंगति का भी हम पर कोई असर नहीं होना चाहिए। आद्य शंकराचार्य, स्वामी विवेकानंद, महावीर स्वामी, गौतम बुद्ध आदि को पेड़ों के नीचे ही सर्वं खल्विदं ब्रह्म का ज्ञान प्राप्त हुआ।
जब पेड़ों के नीचे शिक्षा होती थी तब भारत दुनिया में विश्वगुरु था। धरती ब्रह्मांड का मुख है इसलिए धरती माँ तृप्त होंगी तभी ब्रह्मांड का संतुलन हो सकेगा। जब हम अपने जीवन से तेन त्यक्तेन भुंजीथा भोग के वातावरण में त्याग का संदेश देंगे तभी पर्यावरण का संरक्षण व संवर्धन हो सकेगा। टिश्यु पेपर के निर्माण में लाखों पेड़ों का बलिदान होता है इसलिए टिश्यु पेपर के स्थान पर कपड़े का रूमाल इस्तेमाल करने का संकल्प लेना चाहिए।
“सृष्टि सेवा संकल्प” संगठन पर्यावरण के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर पर्यावरण की स्थानीय संस्थाओं को साथ लेकर वृक्षारोपण को जन आंदोलन बनाने व मानव का प्रकृति के साथ संबंध स्थापित हो इसके लिए निरंतर कार्यरत है। वृक्षारोपण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली जिलें की पर्यावरण प्रेमी संस्थाओं व पर्यावरण मित्रों का स्मृतिचिन्ह भेंट कर अभिनंदन भी किया गया।
कार्यक्रम का संचालन योगेश सुरलकर व पुनीत पटेल ने किया। अतिथियों का स्वागत विपिन सुगंधी, राहुल विरवल, अमोल ठाकुर व मयंक पटेल ने किया। संगठन प्रतिवेदन आशीष सोनी, वृक्ष बैंक की जानकारी कुशल भगत, सामूहिक गीत शुभम बारी, एकलगीत शुभम रघुवंशी ने लिया व आभार प्रतीक चौकसे ने किया।
कार्यक्रम की विभिन्न व्यवस्थायें टोपनदास वाधवानी, किरण महाजन, डीगंबर चौधरी, हिमांशु सिंह, विपुल त्रिपाठी, राहुल राठौड़, पंकज महाजन, संजय महाजन, विपुल बारी, मयूर वाणी, योगेश पाटिल, आदि सृष्टिसेवकों ने सम्भाली।

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