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साड़ी भारत की समृद्ध और विविध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक -चिटनिस 

अनोखा आयोजन-बुरहानपुर में निकली ‘‘भारत साड़ी वॉकथॉन’‘ बुरहानपुर। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर परंपरागत साड़ी परिधान को बढ़ावा देने के लिए ‘‘भारत साड़ी वॉकथॉन‘‘ का आयोजन किया गया। जो शहर के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरी। पारंपरिक साड़ी में करीब दो हजार से अधिक महिलाओं द्वारा नया कीर्तिमान स्थापित किया।साड़ी वाकथान में

On: March 8, 2024 1:44 PM
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  • अनोखा आयोजन-बुरहानपुर में निकली ‘‘भारत साड़ी वॉकथॉन’‘

बुरहानपुर। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर परंपरागत साड़ी परिधान को बढ़ावा देने के लिए ‘‘भारत साड़ी वॉकथॉन‘‘ का आयोजन किया गया। जो शहर के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरी। पारंपरिक साड़ी में करीब दो हजार से अधिक महिलाओं द्वारा नया कीर्तिमान स्थापित किया।साड़ी वाकथान में भाजपा प्रदेश प्रवक्ता एवं विधायक अर्चना चिटनिस एवं महापौर माधुरी पटेल ने भी हिस्सा लिया और पैदल चले। यह आयोजन अपने आप में अनोखा रिकॉर्ड बना, जहां इतनी बड़ी संख्या में महिलाएं जुटी और कार्यक्रम में हिस्सा लिया।
Sadaiv Newsविधायक अर्चना चिटनिस ने कहा भारतीय संस्कृति और मान्यताओं में, साड़ी एक देवता का प्रतीक है, और इसे पहनना किसी भी महिला के लिए उन्नति और गौरव को दर्शाता है। एक साड़ी भारत की महिलाओं को हमेशा जड़ों से जोड़कर रखती है और उनकी संस्कृति, परंपरा और मूल्यों की याद दिलाती, अहसास कराती है। साड़ी सिर्फ कपड़े का एक टुकड़ा नहीं है, यह भारत की समृद्ध और विविध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। जो परंपरा, कलात्मकता और कालातीत सुंदरता का प्रतिनिधित्व करता है। यह भारतीय संस्कृति का एक स्थायी और पोषित पहलू बना हुआ है।
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर परंपरागत साड़ी परिधान को बढ़ावा देने के लिए यह आयोजन किया गया। भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय, मध्य प्रदेश शासन, मध्यप्रदेश हस्तशिल्प, हाथकरघाा विकास निगम भोपाल की ओर से महिला दिवस से पहले साड़ी के पहनावे को प्रमोट करने के लिए पूरे देश में तरह तरह के आयोजन कर रहा है जिसमें मेरे अपने बुरहानपुर में आयोजित हुआ साड़ी वॉकथॉन भी एक अनूठा और यादगार कार्यक्रम बना है। इस साड़ी वॉकथॉन में हजारों की संख्या में महिलाएं शामिल हुईं, कई जगह उन पर पुष्प वर्षा की गई। वॉकथॉन में अलग-अलग तरह से महिलाएं साड़ी पहन कर पहुंचीं। कमल चौक से रैली निकली, जो गांधी चौक, फव्वारा चौक, बाई साहब की हवेली, पांडुमल चौराहा से होते हुए वापस कमल तिराहे परर पहुंची। कार्यक्रम में निगमाध्यक्ष अनिता यादव, एसडीएम पल्लवी पुराणिक, भाजपा महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष किरण रायकवार, सावित्री बत्रा, कविता मोरे, उमा कपूर, सुधा चौकसे, सुषमा लाड सहित बड़ी संख्या में महिलाएं उपस्थित रही। महिलाएं गुलाबी, नीली, पीली साडि़यों में नजर आई।
श्रीमती चिटनिस ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पूर्व संध्या पर परंपरागत साड़ी परिधान को बढ़ावा देने के लिए आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के विजन से भारत साड़ी वॉकथॉन का यह आयोजन किया गया। उन्होंने कहा कि साड़ी विश्व में शायद सबसे लम्बा बिना सिला हुआ परिधान है। यह विश्व में पांचवा सबसे ज्यादा पहना जाने वाला परिधान है। हमारे भारत में अलग अलग राज्यों में अलग अलग प्रकार की साडि़या मिलती है। साडि़यों को पहनने का तरीका भी अलग-अलग होता है। हमारे संस्कृति में एक परिधान के रूप में साड़ी का इतिहास बहुत पुराना है। इसका सबसे पहला उल्लेख वेदों में मिलता है। यज्ञ और हवन के समय साड़ी पहनने का उल्लेख है। यह परिधान हमें हमारी भारतीयता से बांधे रखता है और विश्व को भी हमारी विरासत से परिचित कराता है।

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