बुरहानपुर। भाजपा पिछड़ा वर्ग मोर्चा की नई जिला कार्यकारिणी घोषणा के महज दो दिन बाद ही निरस्त कर दी गई। पिछड़ा वर्ग मोर्चा जिलाध्यक्ष की ओर से घोषित सूची पर भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ. मनोज माने के हस्ताक्षर नहीं थे। अब कार्यकारिणी निरस्त होने के बाद पार्टी के भीतर नामों के चयन, अनुमोदन और संगठनात्मक समन्वय को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।
भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ. मनोज माने का कहना है कि मामला गुटबाजी या संगठन में तालमेल की कमी का नहीं है। निर्धारित संगठनात्मक प्रक्रिया का पालन नहीं होने के कारण कार्यकारिणी निरस्त की गई है और फैसला प्रदेश नेतृत्व के आधार पर लिया गया है। लेकिन सवाल यह है कि यदि कार्यकारिणी को निर्धारित अनुमोदन मिलना बाकी था तो उसे सार्वजनिक रूप से घोषित करने की नौबत क्यों आई? और घोषणा हो गई तो महज दो दिन में उसे वापस क्यों लेना पड़ा? यही दो सवाल अब संगठन के भीतर चर्चा का विषय बने हुए हैं।
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सूची निकली, हस्ताक्षर नहीं; फिर पूरी कार्यकारिणी ही निरस्त
जानकारी के मुताबिक पिछड़ा वर्ग मोर्चा की जिला कार्यकारिणी कुछ दिन पहले घोषित की गई थी। खास बात यह है कि सूची पर भाजपा जिलाध्यक्ष के हस्ताक्षर नहीं थे। इसके बाद जिलाध्यक्ष ने कार्यकारिणी को निरस्त कर दिया। मार्च 2026 में पिछड़ा वर्ग, जनजाति और महिला मोर्चा की प्रदेश एवं जिला स्तर की नियुक्तियां प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की सहमति से जारी की गई थीं। ऐसे में बुरहानपुर की सूची बिना पूरी प्रक्रिया के जारी हुई तो यह संगठनात्मक स्तर पर समन्वय को लेकर सवाल जरूर खड़ा करती है।
क्या नामों पर फंसा पेंच? पार्टी में चर्चा, पुष्टि नहीं
कार्यकारिणी निरस्त होते ही राजनीतिक गलियारों में एक और चर्चा शुरू हो गई है। कहा जा रहा है कि घोषित सूची में एक प्रभावशाली खेमे से जुड़े कुछ लोगों को अपेक्षित जगह नहीं मिलने के कारण आपत्ति हुई और इसके बाद पूरी सूची रोक दी गई। हालांकि इस दावे की भाजपा जिलाध्यक्ष ने खारिज किया है। डॉ. माने ने भी साफ कहा है कि संगठन में तालमेल नहीं होने जैसी कोई बात नहीं है और कार्यकारिणी केवल प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण निरस्त की गई है। यानी आधिकारिक कारण प्रक्रिया है, जबकि राजनीतिक गलियारों में चर्चा नामों और समीकरणों की है।
सत्ता-संगठन के समीकरणों से जोड़कर देखी जा रही खींचतान
बुरहानपुर भाजपा की राजनीति में विधायक अर्चना चिटनिस का प्रभाव महत्वपूर्ण माना जाता है। वे वर्तमान में बुरहानपुर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक हैं। पार्टी के जिला संगठन में भी सांसद, दोनों विधायक और अन्य पदाधिकारी संगठनात्मक गतिविधियों में साथ दिखाई देते रहे हैं। इसी पृष्ठभूमि में पिछड़ा वर्ग मोर्चा की कार्यकारिणी के अचानक निरस्त होने को पार्टी के स्थानीय समीकरणों से जोड़कर चर्चाएं हो रही हैं। दावा किया जा रहा है कि सत्ता और संगठन के विभिन्न पदों पर विधायक समर्थकों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिला है और नई मोर्चा कार्यकारिणी में नामों को लेकर भी खींचतान हुई।
सबसे बड़ा सवाल- नई सूची में कितने नाम बदलेंगे?
अब असली तस्वीर संशोधित कार्यकारिणी आने के बाद साफ होगी। यदि नई सूची में पुराने पदाधिकारियों के अधिकांश नाम जस के तस रहते हैं तो प्रक्रिया संबंधी तर्क मजबूत होगा। यदि बड़े स्तर पर नाम बदले जाते हैं तो स्वाभाविक रूप से यह सवाल और गहरा होगा कि पहली सूची को निरस्त करने के पीछे केवल प्रक्रिया थी या नामों पर भी असहमति थी।
फिलहाल भाजपा का आधिकारिक पक्ष स्पष्ट है—कार्यकारिणी निर्धारित प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण निरस्त हुई है और संगठन में तालमेल की कमी नहीं है। दूसरी ओर महज दो दिन में सूची का घोषित होना और फिर निरस्त होना स्थानीय भाजपा की अंदरूनी राजनीति में नई चर्चा जरूर छोड़ गया है।

