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राजनीतिक भूगोल बदलेगा शाहपुर… BJP में ‘नेक्स्ट बिग फेस’ के रूप में उभर रहे वीरेंद्र तिवारी

तिवारी का कद अचानक बढ़ा… बुरहानपुर की राजनीति में नया समीकरण तैयार

On: November 16, 2025 9:02 PM
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शाहपुर को मिल सकता है विधानसभा का दर्जा — बदलेगा राजनीतिक भूगोल

बुरहानपुर। जिले की राजनीति इस समय सबसे बड़े बदलाव की दहलीज पर खड़ी है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि शाहपुर को एक बार फिर अलग विधानसभा बनाने की तैयारी लगभग अंतिम चरण में है। परिसीमन की सुगबुगाहट ने पूरे जिले के राजनीतिक समीकरण को हिला दिया है। अगर शाहपुर को नया विधानसभा क्षेत्र बनाया जाता है, तो सवाल सिर्फ नया भूगोल खींचने का नहीं- सवाल यह है कि शाहपुर की नई कुर्सी पर कौन बैठेगा? और यही सवाल आज पूरी राजनीति के केंद्र में है। इस दौड़ में सबसे चर्चित नाम है वीरेंद्र तिवारी, जिन्हें बुरहानपुर विधायक और पूर्व मंत्री अर्चना चिटनिस की ‘परछाई’, ‘कुशल रणनीतिकार’ और ‘भविष्य का बड़ा दांव’ माना जा रहा है।

तिवारी का कद अचानक क्यों बढ़ा?

भाजपा के अंदर भी चर्चा— ये शाहपुर का सबसे मजबूत चेहरा है

भाजपा के भीतर लगातार चर्चा है कि शाहपुर विधानसभा यदि अस्तित्व में आती है, तो तिवारी को रोक पाना मुश्किल होगा। इसके पीछे कई कारण हैं— संगठन में वर्षों की मेहनत, ग्रामीण क्षेत्रों में मजबूत पकड़, साधना तिवारी (नगर परिषद अध्यक्ष) के कारण प्रशासनिक तालमेल, शालीन और मिलनसार स्वभाव ने लोगों में विश्वास बढ़ाया, छोटे–बड़े वादों को पूरा करने की तैयारी और क्षमता। शाहपुर के राजनीतिक भूगोल को समझने वाले कहते हैं कि तिवारी वह चेहरा हैं जो पिछले एक दशक से लगातार लोगों के बीच दिखाई देते हैं, यही निरंतर उपस्थिति आज उन्हें बाकी दावेदारों से बहुत आगे खड़ा करती है।

बड़े नेताओं से सीधी सीख

‘चिटनिस मॉडल’ का मजबूत असर—तिवारी को राजनीति के दांव–पेंच की पूरी समझ

वीरेंद्र तिवारी की राजनीति में सबसे मजबूत स्तंभ है अर्चना चिटनिस का मार्गदर्शन। चिटनिस सिर्फ नाम नहीं, बुरहानपुर की राजनीति में एक ‘पॉलिटिकल स्कूल’ हैं। सूत्रों की मानें तो तिवारी ना सिर्फ उनका विश्वासपात्र रहे हैं, बल्कि उनकी ‘किचन केबिनेट’ के स्थायी सदस्य भी हैं। यही कारण है कि लोग कहते हैं—तिवारी ने राजनीति की बिसात चिटनिस से सीखी है… और यही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। शाहपुर के राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि विधानसभा का गठन होता है, तो चिटनिस इस सीट पर तिवारी को सबसे मजबूत उम्मीदवार के रूप में आगे रखेंगी। और यह समर्थन भाजपा की अंदरूनी राजनीति में निर्णायक साबित हो सकता है।

संघर्षों से उठकर आया नाम

दरी बिछाने से प्रदेश स्तर तक पहचान— तिवारी का सफर अपने आप में कहानी

तिवारी की कहानी साधारण कार्यकर्ता से शुरू होती है— दरी बिछाना, कुर्सियां लगाना, झंडा उठाना, पोस्टर लगाना, बूथों पर मेहनत करना… यह सब तिवारी ने न सिर्फ किया, बल्कि हर बार नेतृत्व को भरोसा दिलाया कि काम सौंपिए, पूरा करवाऊंगा। धीरे-धीरे जिम्मेदारियाँ बढ़ीं— भाजपा जिला उपाध्यक्ष, अभियान संयोजक, बूथ मैनेजमेंट हेड और हर स्तर पर उन्होंने अपनी उपयोगिता साबित की। इस समर्पण का नतीजा यह हुआ कि आज तिवारी का नाम शाहपुर में सबसे अधिक चर्चा में है।

कांग्रेस के गढ़ में बीजेपी की पैठ— यह तिवारी की रणनीति का ही असर

शाहपुर और इसके आसपास के 30 से अधिक गांव कभी कांग्रेस के ‘सुरक्षित क्षेत्र’ माने जाते थे। कई वर्षों तक यह भूगोल कांग्रेस के हाथों में ही रहा। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में हवा बदली है और इस बदलाव के केंद्र में हैं वीरेंद्र तिवारी। उन्होंने गांव-गांव जाकर लोगों को योजनाओं के लाभ दिलाए, जनसंपर्क बढ़ाया और कांग्रेस की जमीन को धीरे-धीरे कमजोर किया। कई बूथों पर भाजपा को वह बढ़त मिली, जिसकी कल्पना भी पहले नहीं की जाती थी। संगठन मानता है कि यह बदलाव तिवारी के बिना संभव नहीं था।

क्यों कहा जा रहा— तिवारी ही शाहपुर सीट के सबसे बड़े दावेदार?

राजनीतिक विशेषज्ञ इस पर 5 ठोस कारण बताते हैं—

  1. जमीनी नेटवर्क

शाहपुर के हर गांव में तिवारी की सीधी पकड़ है।
युवा, महिलाएं और बुजुर्ग—सभी वर्गों में अच्छी पकड़।

  1. चिटनिस का रणनीतिक समर्थन

यह वह फैक्टर है जो किसी भी राजनीतिक समीकरण को बदलने की क्षमता रखता है।

  1. संगठन में मजबूत भरोसा

BJP के वरिष्ठ नेता मानते हैं कि मेहनत और वफादारी दोनों में तिवारी नंबर एक हैं।

  1. प्रशासनिक तालमेल

पत्नी साधना तिवारी नगर परिषद अध्यक्ष—
इससे क्षेत्रीय विकास में तिवारी की सक्रिय भूमिका और बढ़ी।

  1. लगातार संपर्क और स्वीकार्यता

तिवारी चुनाव के समय नहीं, पूरे साल जनता के बीच रहते हैं।

शाहपुर विधानसभा बनते ही स्थानीय राजनीति में बड़ा विस्फोट

तीन विधानसभा वाला जिला… नया पॉवर सेंटर बनेगा शाहपुर

यदि परिसीमन में शाहपुर अलग होता है, तो बुरहानपुर जिले का राजनीतिक वजन बढ़ेगा। नेपानगर, बुरहानपुर और अब शाहपुर तीन विधानसभा होने से जिले में नेतृत्व के नए चेहरे उभरेंगे। इनमें सबसे आगे, सबसे मजबूत और सबसे विश्वसनीय नाम वीरेंद्र तिवारी।

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